तीन साल से भाग रहे हैं विदेशी निवेशक
सेवाओं का निर्यात ठंडा पड़ता गया। वैसे यह भी एक मिथ है कि भारत सेवाओं के निर्यात में तोप-तमंचा है। विश्व बैंक की रैंकिंग में प्रति व्यक्ति सेवा निर्यात में भारत 114 देशों में 89वें नंबर पर है और मलयेशिया, तुर्किए व थाईलैंड जैसे देशों से भी नीचे हैं। खैर, सेवाओं का निर्यात ठंडा पड़ने से देश में डॉलर का आना थम गया, जबकि निकलने की रफ्तार बढ़ गई तो रुपया कमज़ोर होता चला गया। विदेशी पोर्टफोलियोऔरऔर भी
रुपया बाहर नहीं, भीतर के घात से टूटा!
डॉलर के मुकाबले रुपए का गिरना कोई अनोखी बात नहीं। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान रुपया गिरा था और 2013 में भी खूब गिरा जब अमेरिका के क्रेंदीय बैंक फेडरल रिजर्व ने घोषणा कर दी थी कि वो सरकार के ट्रेजरी बॉन्ड खरीदकर सिस्टम में डॉलर झोंकने का सिलसिला धीमा करने जा रहा है जिसके बाद वहां के सरकारी बॉन्डों के दाम घट और उन पर यील्ड बढ़ गई थी। लेकिन इस बार रुपया केवलऔरऔर भी
इस बजट के सिर चढ़कर बोलेगा रुपैया
तारीख 27 सितंबर 2024। उस दिन देश का विदेशी मुद्रा भंडार 704.88 अरब डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर था। उसी दिन बीएसई सेंसेक्स ने 85,978.25 और एनएसई निफ्टी ने 26,277.35 का ऐतिहासिक शिखर चूमा था। तब एक डॉलर 83.72 रुपए का हुआ करता था। यही वो दिन था, जब से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भारतीय शेयर बाज़ार से मोहभंग होना शुरू हुआ। एनएसडीएल के आधिकारिक डेटा के मुताबिक वे तब से 24 जनवरी 2024 तक हमारेऔरऔर भी
शेयरों का गिरना जनगण के लिए अच्छा
गणतंत्र की 75वीं वर्षगांठ पर आप सभी को अनंत बधाइयां। गणतंत्र में सबसे अहम है जन या गण। हम सभी जनगण शारीरिक के साथ ही आर्थिक, मानसिक व बौद्धिक, हर दृष्टि से सशक्त हो जाएं तो देश खुद-ब-खुद मजबूत हो जाएगा। बतौर ट्रेडर या निवेशक खुद को सशक्त व समझदार बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी हमारी अपनी है। इधर सितंबर में शिखर पकड़ने के बाद चार महीने में ही हमारा शेयर बाज़ार करीब 12% गिर गया है तोऔरऔर भी






