बड़े-बड़े विद्वान भले कहते हों कि शेयरों में निवेश हमेशा के लिए होता है, लेकिन इस बाज़ार से वही कमाता है तो बराबर मुनाफा निकालता रहता है। ऐसे में सबसे अहम सवाल है कि किसी शेयर से कब मुनाफा निकाला जाए? सीधा-सा जवाब है जब भी ज़रूरत पड़े। पहली बात तो यह है कि शेयर बाज़ार में वही धन लगाना चाहिए जो हमारी वर्तमान व आकस्मिक ज़रूरतों का इंतज़ाम करने के बाद इफरात बचता हो। दूसरी बात,औरऔर भी

आंकड़े गवाह हैं कि पिछले सात साल में सड़क पर आ गए नौजवानों की संख्या लगातार बढ़ती गई है। इसी का एक हिस्सा दंगाई या उन्मादी भीड़ बन जा रहा है। ऊपर से कोई राजनीतिक संगठन इन्हें दिन के 200-250 से लेकर 500 रुपए दे दे तो करैला नीम चढ़ा की स्थिति बन जाती है। लेकिन यह देश के आर्थिक विकास के लिए बेहद घातक स्थिति है। यह हमारी युवा शक्ति को, हमारी डेमोग्राफी की ताकत कोऔरऔर भी

यह बेहद खतरनाक ट्रेंड है कि देश में रोजगार-प्राप्त लोगों में नौजवानों का हिस्सा घट रहा है और 60 साल के करीब पहुंच रहे लोगों का हिस्सा बढ़ रहा है। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक देश में वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 15 से 29 साल तक की 35.49 करोड़ की आबादी में से 10.34 करोड़ या करीब 29% को रोज़गार मिला हुआ था। 2022-23 में ऐसे युवाओं की आबादी 38.13 करोड़ हो गई, जिसमें से 7.10औरऔर भी

एक तरफ प्रधानमंत्री देश के नौजवान बेटी-बेटियों के सौभाग्य की बात कर रहें हैं, दूसरी तरफ दुर्भाग्य की बात यह है कि पिछले सात सालों में देश की श्रम-शक्ति तेज़ी से बूढ़ी होती जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों की थाह लेने पर पता चलता है कि वित्त वर्ष 2016-17 के शुरू से 2022-23 के अंत तक देश की काम-धंधे में लगी आबादी में 15 से 29 साल तक के युवाओं काऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से बोले, “आज मेरे देश के नौजवानों को, मेरे देश की बेटे-बेटियों को जो सौभाग्‍य मिला है, ऐसा सौभाग्‍य शायद ही किसी को नसीब होता है। इसलिए हमें इसे गंवाना नहीं है। युवा शक्ति में मेरा भरोसा है, युवा शक्ति में सामर्थ्‍य है और हमारी नीतियां और हमारी रीतियां भी उस युवा सामर्थ्‍य को और बल देने के लिए हैं।” क्या सचमुच ऐसा है? सरकार की जो नीतियांऔरऔर भी