जिसने भी सच बोला, छोड़कर जाना पड़ा
दिक्कत यह है कि नौ सालों से देश पर राज कर रही हमारी सरकार न खुद सच बोलती-सुनती है और न ही सच बोलनेवालों को बरदाश्त कर पाती है। तमाम पत्रकार, बुद्धिजीवी व सांसद तक सच बोलने पर सरकार के कोप का शिकार हो चुके हैं। यहां तक कि रिजर्व बैंक के गवर्नर और केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी इससे नहीं बचे। 14 सितंबर 2018 को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व वित्त मत्रालय केऔरऔर भी
ना आत्मनिर्भर और ना ही कहीं स्वदेशी!
सरकार ने जमकर ढोल बजाया कि भारत का डिफेंस निर्यात 2013-14 से 2022-23 तक के नौ सालों में 23 गुना बढ़कर 686 करोड़ रुपए से 15,918 रुपए तक पहुंच गया है। यह देश को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की शानदार कामयाबी है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि भारत का हथियार निर्यात इतना कम है कि वो दुनिया के शीर्ष 25 हथियार निर्यातक देशों तक में नहीं गिना जाता। अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन व जर्मनीऔरऔर भी
भारत कैसे बनेगा मैन्यूफैक्चरिंग का हब
हवा-हवाई दावे बिखरते हैं तो हवामहल धराशाई हो जाता है। दावा करनेवाले उड़कर भाग जाते हैं, जबकि जनता के पास त्राहि-त्राहि करने के सिवाय कोई चारा नहीं रहता। भारतीय अर्थव्यवस्था के ताजा हाल को देखकर कभी-कभी ऐसी ही आशंका दिल दहलाने लगती है। यकीनन शेयर बाज़ार चढ़ा जा रहा है। लेकिन वह आज के यथार्थ नहीं, कल की संभावनाओं पर उछलता है और वह भी दावों व वादों पर। जिनको इस पर शक हो, वे 2008 काऔरऔर भी
अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों सी बिखरी तो!
सितंबर तिमाही में जीडीपी के 7.6% बढ़ने का आंकड़ा आया तो रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023-24 की विकास दर का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 7% कर दिया। जैसे यह कहने की होड़ लगी हो कि चढ़ जा बेटा सूली पर भला करेंगे राम! किसको चढ़ा रहे हैं ये लोग? कोई इस पहले का जवाब क्यों नहीं देता कि जिस तिमाही में जीडीपी 7.6% बढ़ा है, उसी तिमाही में निफ्टी-500 कंपनियों की बिक्री मात्र 3.5% ही क्योंऔरऔर भी






