निवेश लम्बी ट्रेडिंग, ट्रेडिंग छोटा निवेश!
शेयर बाज़ार से कमाने के लिए अगर हम निवेश और ट्रेडिंग के अंतर को सही-सही समझ लें तो हमारी सफलता की प्रायिकता बढ़ जाती है। याद रखें कि शेयर बाज़ार में पक्का कुछ नहीं। यहां सब कुछ रैंडम या यदृच्छया चलता है। इसलिए यहां सफलता की प्रायिकता या प्रोबैबिलिटी ही चलती है। लेकिन यह बात मन में पक्के तौर पर बैठाना लेनी चाहिए कि निवेश लम्बे समय की ट्रेडिंग है और ट्रेडिंग छोटे समय का निवेश। इसऔरऔर भी
क्यों-कैसे चढ़े काठ की हांडी तीसरी बार!
पहली बार अच्छे दिन और विदेश से कालाधन वापस लाने का जुमला था। मतदाता ने भरोसा किया। दूसरी बार पुलवामा के शहीदों के नाम पर अवाम की देशभक्ति को ललकारा गया। तब भी मतदाता ने तहेदिल से साथ दिया। लेकिन न अच्छे दिन आए, न विदेश से कालाधन और न ही देश की बाहरी-भीतरी सुरक्षा मजबूत हुई। हां, इतना ज़रूर हुआ कि विरोधियों पर ईडी व सीबीआई के हमले तेज कर दिए गए। विपक्ष के जो नेताऔरऔर भी
गिना दी जातियां, हाल भी बयां कर देते!
इसे राजनीतिक अवसरवाद की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या कहेंगे कि जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चुनावी सभाओं व रैलियों में खुद को अति पिछड़ा बताते थे, वे अब कहने लगे हैं कि भारत में केवल चार ही जातियां हैं – गरीब, युवा, महिलाएं और किसान। उनमें यह बदलाव तब आया, जब विपक्ष के इंडिया गठबंधन ने जाति जनगणना का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठा दिया। प्रधानमंत्री पिछड़ी व दलित जातियों की गोलबंदी को रोकने के लिए नईऔरऔर भी
विकसित देश महज नारा, एजेंडा नदारद
दस साल हो गए। क्या अच्छे दिन सभी के आ गए? किसानों की आय 2022 में दोगुनी होनी थी। हो गई क्या? हर साल दो करोड़ नौजवानों को रोज़गार मिलना था। मिला क्या? पांच ट्रिलियन डॉलर या पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था मार्च 2025 तक बन जानी थी। बन पाएगी क्या? खुद सरकार मानती है कि हमारा जीडीपी ऊपर-ऊपर 10.5% बढ़ जाए, तब भी मार्च 2025 तक हमारी अर्थव्यवस्था 3,27,71,808 करोड़ रुपए यानी 3.95 ट्रिलियन डॉलरऔरऔर भी






