जो कल सही था, आज भी सही हो, जरूरी नहीं। विचार या व्यक्ति का सही होना तय करती है प्रासंगिकता। हर वस्तु व इंसान की तरह विचार का भी जीवनकाल होता है। हर विचार को नया जन्म लेना ही पड़ता है।और भीऔर भी

खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे। तो क्या बीच में जो था, वो सब निरर्थक था? नहीं। बीच में थी रचनात्मकता जिसने हमें रंग दिया, अर्थ दिया। जीवन कितना जिया? जितना हम रचनात्मक रहे, सृजन किया। बस…और भीऔर भी

सरकार ने 15 सितंबर 2010 को तय किया था कि 1 अप्रैल 2011 ने कर्मचारियों के उन भविष्य निधि (ईपीएफ) खातों पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा जिनमें तीन साल से कोई रकम नहीं जमा की गई है। अब वह इन खातों को बंद करने जा रही है। ऐसे निष्क्रिय खातों की संख्या करीब तीन करोड़ है और इनमें 15,415 करोड़ रुपए पड़े हुए हैं। इन्हें बंद करने से जहां उसे यह रकम मुफ्त में मिल जाएगी,औरऔर भी

सार्वजनिक अस्पतालों को चलाने के लिए सरकार को सब्सिडी देनी पड़ती है, जबकि निजी अस्पताल महंगे होने के बावजूद लोगों से पटे रहते हैं और करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं। यह मानसिकता और पद्धति का सवाल है। ब्रिटेन में सब्सिडी चलती है तो हेल्थकेयर सिस्टम पिटा पड़ा है। जर्मन में स्वास्थ्य बीमा चलता है तो हेल्थकेयर सिस्टम चकाचक है। भारत में सब घालमेल है। लेकिन ‘जान है तो जहान है’ और परिजनों के लिए कुछ भी करनेवालेऔरऔर भी

कोई भी घर-परिवार, देश या समाज अपना रह गया है या नहीं, इसकी एक ही कसौटी है कि वहां आप भय-मुक्त और निश्चिंत रहते हैं कि नहीं। जो आक्रांत करता है, वह अपना कैसे हो सकता है? वह तो बेगाना ही हुआ न!और भीऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें बैंकों को एक-दूसरे के बीच गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) सहित ऋण के टांसफर पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बैंकों के बीच ऋण का स्थानांतरण कानूनी रूप से उचित है और बैंकिंग सेवा नियमन कानून में इसकी अनुमति है। पीठ ने कहा, ‘‘बैंकिंग नियमन कानून में इस पर रोक नहीं है। हमऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि उनका देश अपना प्रतिस्पर्धी स्थान खो रहा है और भविष्य की नौकरियां भारत जैसे देशों के युवाओं के हाथ में होंगी, जहां शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के लोवा शबर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में कहा, ‘‘आप देखिए चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश शिक्षा प्रणाली और बुनियादी ढांचे में जमकर निवेश कर रहे हैं। कहां हम अव्वल होते थे, मसलन कॉलेजऔरऔर भी

भारत में अमीरी का संकेंद्रण अमेरिका और चीन से भी ज्यादा है। यहां सबसे ज्यादा अमीर 100 लोगों की संपत्ति का 50 फीसदी हिस्सा मात्र दस लोगों के हाथ में सिमटा हुआ है। चीन में यह अनुपात 38 फीसदी और अमेरिका में 32 फीसदी है। यह निष्कर्ष है फोर्ब्स इंडिया पत्रिका की ताजा रिपोर्ट का। इसका सीधा-सा मतलब यह हुआ कि भारत में लोकतंत्र के बावजूद संपत्ति का आधार विस्तृत नहीं हुआ है। इसका पता इस बातऔरऔर भी

स्कूटर्स इंडिया भारत सरकार की बीमार कंपनी है। केवल बीएसई (कोड – 505141) में लिस्टेड है। कभी लैम्ब्रेटा व विजय सुपर मॉडल के स्कूटर बनाती थी। अब थ्री ह्वीलर और उसके इंजिन व पार्ट-पुर्जे बनाती है। निजी क्षेत्र की किसी कंपनी को बेचने या उसके साथ संयुक्त उद्यम बनाने से ही इसका उद्धार हो सकता है। ऊंचे से ऊंचे स्तर से ऐसी बिक्री या गठबंधन का संकेत देकर इसके शेयर को उठाने की कोशिशें हो चुकी हैं।औरऔर भी

उम्र बढ़ती है, मृत्यु करीब आती है। लेकिन ज़िंदगी नहीं घटती क्योंकि समझदारी से जिया गया एक साल मूर्खता में जिए गए बीसियों साल के बराबर होता है जैसे रुई का बड़ा ढेर भी कुछ किलो लोहे से नप जाता है।और भीऔर भी