सोमवार को आपने यह खबर शायद देखी होगी कि बीएसई-500 में शामिल देश की 500 बड़ी कंपनियों के पास मार्च 2011 के अंत तक 4.7 लाख करोड़ रुपए का कैश था। लेकिन अगर सभी लिस्टेड कंपनियों को मिला दें तो यह आंकड़ा 11.6 लाख करोड़ रुपए का हो जाता है। यह वित्त वर्ष 2010-11 में रहे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 48.78 लाख करोड़ रुपए का 23.78 फीसदी है। प्रमुख ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल की एकऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को चिंता सता रही है कि कहीं विकास के मौजूदा ढर्रे से समाज में असंतोष न पैदा हो जाए। उन्होंने सोमवार को राजधानी दिल्ली में एशियाई विकास बैंक के एक समारोह में कहा कि व्‍यापक, समावेशी व निरंतर विकास हासिल करना बेहद जरूरी है। जो विकास समावेशी और आबादी के विभिन्‍न वर्गों के बीच समानता सुनिश्चित नहीं करता, उससे समाज में विवाद और असंतोष पैदा हो सकता है। श्री मुखर्जी ने कहा किऔरऔर भी

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लि‍ए वि‍त्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्‍यक्षता में गठि‍त मंत्री समूह (जीओएम) ने प्राकृति‍क संसाधनों के आवंटन पर चावला समि‍ति की कई सि‍फारि‍शों को मानने को कहा है। पूर्व वि‍त्‍त सचि‍व अशोक की अध्यक्षता में इस समिति का गठन जनवरी 2011 में किया गया था। समि‍ति‍ ने अपनी रि‍पोर्ट 31 मर्इ 2011 को सरकार को सौप दी थी। समि‍ति को सरकार द्वारा आवंटि‍त कि‍ए जा रहे मुख्‍य प्राकृति‍क संसाधनों की पहचान, आवंटनऔरऔर भी

आपको आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि आप देखते ही नहीं। लेकिन जो भी देश के निर्यात आंकड़ों पर गौर कर रहा होगा, वह निश्चित रूप से आश्चर्य कर रहा होगा कि जब अमेरिका व यूरोप में आर्थिक संकट छाया हुआ है और हमारे 40 फीसदी निर्यात वहीं जाते हैं, तब हमारा निर्यात हर महीने इतनी छलांग क्यों लगाता जा रहा है? प्रमुख ब्रोकरेज फर्म कोटक सिक्यूरिटीज ने हाल ही जारी रिपोर्ट में विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) के आंकड़ोंऔरऔर भी

बड़ी बेरहम दुनिया है शेयर बाजार की। यहां कोई नैतिकता नहीं चलती क्योंकि घोड़ा घास से यारी करेगा तो खाएगा क्या। यहां कुछ नियम चलते हैं जो कमोबेश शाश्वत हैं। बड़े खिलाड़ी जब सस्ते भावों पर किसी स्टॉक को जमा कर लेते हैं तो वे ब्रोकरों, एनालिस्टों व मीडिया के जरिए फैलाते हैं कि कैसे वह बहुत धांसू स्टॉक है और उसे खरीद लेना चाहिए। मकसद सिर्फ एक होता है कि वे अपना माल निकालकर नोट बनाऔरऔर भी

इस समूची सृष्टि में हर सीधी रेखा किसी न किसी बड़े वक्र का हिस्सा होती है। अगर लगता है कि कोई चीज सीधी रेखा में चल रही है तो वो अल्पकालिक सच है। दीर्घकाल में हर चीज चक्र में ही चलती है।और भीऔर भी

जो भगवान का जितना बड़ा भक्त है, वो सच्चे दोस्तों से उतना ही महरूम होता है। बेचारा अंदर से निपट अकेला होता है। उसका अकेलापन दूर कीजिए। दोस्त बनिए। भगवान का भ्रम मिटता चला जाएगा।और भीऔर भी

सामाजिक जीवन और प्रकृति में बिंदासपना चलता है। बल्कि सच कहा जाए तो जो रिस्क उठाते हैं, जीवन का असली आनंद वही लोग उठा पाते हैं। महाभारत में कृष्ण यही तो मनोभूति बना रहे होते हैं, जब वे अर्जुन से कहते हैं कि युद्ध में जीत गए तो धरती के सुखों का भोग करोगे और वीरगति को प्राप्त हो गए तो स्वर्ग का आनंद लूटोगे। लेकिन यह मानसिकता शेयर बाजार में नहीं चलती। यहां भावना में आंखऔरऔर भी

जब तक आप इंद्रियों के जाल में फंसे हो, पुरुष स्त्री और स्त्री पुरुष को देखकर खिंचती है, खाने को देखकर लार टपकती है, तब तक आप बन रहे होते हैं, बड़े नहीं होते। वयस्क होने के बावजूद छोटे रहते हो।और भीऔर भी

अमेरिका में श्रीलंकाई मूल के अरबपति धंधेबाज राज राजारत्नम को इनसाइडर ट्रेडिंग का दोषी करार देते हुए अदालत ने जब 11 साल कैद की सजा सुनाई तो उसने राजारत्नम से पूछा कि क्या उसे अपनी सजा पर कुछ कहना है तो उसका जवाब था, “नहीं। शुक्रिया, योर ऑनर।” राजारत्नम अदालत के फैसले से मायूस भी नहीं दिखा। शायद उसे अंदाजा था कि अदालत उसे रियायत नहीं देगी। कोर्ट के बाहर निकलते ही कैमरे उसकी तरफ मुड़ गएऔरऔर भी