बाजार को दोपहर करीब एक घंटे तक दबे रहने के बाद सुधरना पड़ा और निफ्टी 0.84 फीसदी की बढ़त लेकर 5613.55 पर बंद हुआ। कारण, तेजड़िए पिछले दो हफ्तों से लांग हैं या आसान शब्दों में कहा जाए तो बढ़त की उम्मीद में खरीद किए पड़े हैं और वे अब भी नई खरीद किए जा रहे हैं। इसका मतलब यही हुआ कि बाजार निफ्टी को 6000 की तरफ उठाए जा रहा है। हालांकि तेजड़ियों ने 5600 केऔरऔर भी

बाजार सुधर कर वापस 5500 के ऊपर के प्रतिरोध स्तर पर आ चुका है। निफ्टी 1.07 फीसदी की बढ़त के साथ 5585.45 पर बंद हुआ है। दरअसल मुद्दा टेक्निकल रैली का नहीं, बल्कि यह तथ्य है कि 22 जून 2011 के बाद कल पहली बार एफआईआई का निवेश ऋणात्मक रहा। उन्होंने कल 969.44 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की है। लेकिन ऐसा इनफोसिस के अपेक्षा से कमतर नतीजों, आईआईपी के कमजोर आंकड़ों व यूरोप में छाई कमजोरीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति ठंडी पड़ी, दयानिधि मारन का इस्तीफा हुआ और बाजार तेजी से झूम उठा। किसी को भी भान नहीं था कि निफ्टी यूं 5740 के एकदम करीब तक चला जाएगा। मुझे दुनिया को खुद के सही होने का सबूत देने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिंदगी जब तक है, तब तक आलोचक भी रहेंगे। बिग बी तक के आलोचक हैं और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के भी। आपको किसी व्यक्ति की उपलब्धिऔरऔर भी

बाजार अगर थोड़ा इधर-उधर हो भी रहा है तो चिंता करने की कोई बात नहीं। यह बाजार के जमने का दौर है। अभी वह जितना ज्यादा खुद को जमाएगा, उतना ही ज्यादा उसके तेजी से उठने के आसार बढ़ जाएंगे। अगर निफ्टी 5500 के नीचे जाता है, तभी मंदी की धारणा पालिए और अगर यह 5780 को पार कर जाता है तो जबरदस्त तेजी के मूड में आ जाइए। आज तो यह महज 6.65 अंक गिरकर 5625.45औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट का विशेष जांच दल (एसआईटी) अगले महीने अगस्त के तीसरे हफ्ते तक अपनी पहली रिपोर्ट पेश कर देगा। इससे विदेशी बैंकों में रखे भारतीयों के काले धन पर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। इससे तमाम चिंताओं पर विराम लग जाएगा। और, सुप्रीम कोर्ट की फटकार सहने के बावजूद यूपीए सरकार को यह कहने का मौका मिलेगा कि उसने अपना काम कर दिखाया है। इधर, सरकार के एजेंडे में आर्थिक सुधार फिर से केंद्रऔरऔर भी

बाजार का हाल जो भी हो, लेकिन उसकी सवारी गांठने वाले विशेषज्ञों का हाल बडा रोचक है। ये ‘विशेषज्ञ’ लोग पहले कह रहे थे कि बाजार का 5500 पर पहुंचना असंभव है और अब, जब वहां तक पहुंच गया तो कह रहे हैं कि यह 5650 तक नहीं जा सकता है। लेकिन निफ्टी जब 5705 तक भी चला गया तो कहने लगे कि अब 5270 का स्टॉप लॉस लगाकर बेचो क्योंकि इसका 5720 को पार कर पानाऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ब्याज दरों को बराबर बढ़ा रहा है, फिर भी मुद्रास्फीति पर लगाम नहीं लग रही। हां, इससे आर्थिक विकास की रफ्तार पर जरूर लगाम लगती दिख रही है। बाजार को यह कतई पसंद नहीं और वो किसी न किसी बहाने लार्सन एंड टुब्रो, इनफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), एसबीआई व मारुति सुजुकी जैसी ऊंची विकास दर वाली कंपनियों को भी लपेटे जा रहा है। रिलायंस का स्टॉक दो साल के न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।औरऔर भी

बाजार में भयंकर निराशा का आलम है। निफ्टी 5400 से भी नीचे जा चुका है। विदेशी निवेशकों की तरफ से डंका बजाया जा रहा है कि अगर यह 5300 के नीचे चला गया तो फिर इसे 4700 तक गिरने से रोक पाना मुश्किल होगा। लेकिन इस निराशा के बीच भी आम निवेशकों के लिए नोट बनाने का एक सुनहरा पक्ष उभर रहा है। अभी तक चार बहुराष्ट्रीय कंपनियां डीलिस्टिंग की घोषणा कर चुकी हैं। फिर भी वेऔरऔर भी

बाजार का बैरोमीटर, निफ्टी 5440 से बढ़कर 5586 पर पहुंच गया जो उस स्पष्ट रुझान की तस्दीक करता है जिसे हम पहले ही बता चुके हैं। असल में, फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में पूरे सिस्टम के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हमने पिछले कॉलम में तथ्यों व आंकड़ों के साथ दिखाया है कि डेरिवेटिव या एफ एंड ओ बाजार 32,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नहीं है, जबकि इसे 1,15,000 करोड़ रुपए का दिखाया जाता है।औरऔर भी

बाजार पर तेजी का जुनून इस कदर सवार है कि कच्चे तेल के बढ़ते दाम, मुद्रास्फीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डाउनग्रेड किया जाना भी उसे रोक नहीं पा रहा। आज लगता है कि वे ट्रेडर व निवेशक कितने बौड़म थे जो सेंसेक्स के 17,000 के स्तर पर कच्चे तेल, मुद्रास्फीति और वैश्विक चिंताओं का भय दिखाकर हमें समझा रहे थे कि यह 14,000 तक गिर जाएगा। ऐसा न कभी होना था, न ही हुआ क्योंकि लाभार्जन केऔरऔर भी