अमेरिकी सरकार ने भारत-अमेरिका परमाणु करार को लेकर लोकसभा में हुए मतदान के दौरान सामने आए ‘वोट के बदले नोट’ मामले पर विकीलीक्स के खुलासे पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर ने वॉशिंगटन में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं नहीं कह सकता कि यह दस्तावेज गोपनीय है अथवा नहीं, लेकिन अगर यह गोपनीय है तो हम इसके बारे में कुछ नहीं बोलेंगे।’’ विकीलीक्स के खुलासे के बाद भारत में जारीऔरऔर भी

अमेरिका ने जापान के परमाणु संकट पर गहरी चिंता जताते हुए क्षतिग्रस्त फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से होने वाले विकिरण के स्तर को अत्यंत खतरनाक बताया है और अपने नागरिकों से कहा है कि वे जापानी परमाणु संयंत्रों के 50 मील के आसपास के इलाकों में न रहें। अमेरिकी विदेश उपमंत्री व प्रबंधन मामलों के प्रभारी पैट्रिक कैनेडी ने वॉशिंगटन में मीडिया से कहा, ‘‘फुकुशिमा दाइची में परमाणु रिएक्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वे अनेक खराबियों सेऔरऔर भी

भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है। यहां तक कि चीन से भी बड़ा। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2006-10 के दौरान दुनिया के कुल हथियार निर्यात का 9% हिस्सा सोख लिया, जबकि चीन 6% के साथ दूसरे नंबर पर चला गया। भारत के हथियार आयात का 82% हिस्सा रूस से आया है। अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक है। उसके बाद रूस व जर्मनी का नंबर आताऔरऔर भी

जापान में 8.9 तीव्रता के भूकंप और सुनामी के बाद दुनिया भर के समुद्रतटीय इलाकों में सुनामी का खतरा मंडराने लगा है। लेकिन इससे न तो भारत को कोई खतरा है और न ही इससे भारतीय शेयर पर नकारात्मक असर पड़ने वाला है। फिलहाल जापान के पूरे प्रशांत महासागर के तट के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है। गुआम, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया और अमेरिकी राज्य हवाई को सुनामी पर नजर रखने को कहा गया है। इंडोनेशिया,औरऔर भी

भारत के 55 अरबपति (डॉलर में) विश्व प्रसिद्ध पत्रिका फोर्ब्स द्वारा जारी दुनिया के सबसे अमीरों की ताजा सूची में शामिल हो गए हैं। भारत में सबसे आखिरी पायदान पर एक अरब डॉलर की बराबर संपत्ति के साथ चार लोग हैं – रमेश चंद्रा (रीयल एस्टेट), अनु आगा (इंजीनियरिंग), आश्विन दानी (पेंट), हरिंदर पाल बग्गा (जिंस) और मोफतराज मुनोत (रीयल एस्टेट)। ये चारों दुनिया के अमीरतम लोगों में 1040वें नंबर पर हैं। इस बार सबसे अमीर भारतीयोंऔरऔर भी

अमेरिका की एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत नकली मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से जूझ रहा है जिसका प्रमुख स्रोत पाकिस्तान है और इस मुद्रा का इस्तेमाल आतंकवाद व आपराधिक नेटवर्क अपनी गतिविधियां चलाने के लिए करते हैं। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए अमेरिकी विदेश विभाग की वर्ष 2011 की अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत बड़े पैमाने पर नकली मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से जूझ रहा है जोऔरऔर भी

दो साल पहले वर्ष 2008- 09 में दुनिया को हिलाकर रख देनी वाली आर्थिक मंदी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था, इसका पता लगाते हुए एक अमेरिकी समिति ने कहा है कि लोगों की कारगुजारी से लेकर नियामक विफलता और नीति निर्माता सभी इस संकट के लिए जिम्मेदार रहे हैं। वित्तीय संकट जांच आयोग की 500 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। अमेरिकी संसद ने संकट के कारणों का पता लगाने केऔरऔर भी

ऑयल इंडिया सरकार की नवरत्न कंपनी है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के धंधे में है। सितंबर 2009 में इसका आईपीओ 1050 रुपए प्रति शेयर मूल्य पर आया था। शुक्रवार को यह बीएसई (कोड – 533106) में 3.18 फीसदी की गिरावट के साथ 1328.70 रुपए और एनएसई (कोड – OIL) में 2.32 फीसदी गिरकर 1336.30 रुपए पर बंद हुआ है। हो सकता है आज भी गिरावट आए। लेकिन कंपनी के कामकाज और भावी योजनाओं को देखें तोऔरऔर भी

सरकार जल्दी ही विदेश में धन छिपाकर रखनेवाले भारतीयों पर निगाह रखने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और साइप्रस जैसे देशों में आयकर कार्यालय खोलने जा रही है। ये कार्यालय संबंधित देश के कर अधिकारियों के साथ बराबर संपर्क में रहेंगे और किसी भी संदेहास्पद लेन-देन की खोज-खबर रखेंगे। इससे सरकार को कर चोरों के पनाहगार समेत अन्य देशों से गोपनीय वित्तीय सूचनाएं हासिल करने में मदद मिल सकती है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन,औरऔर भी

वक्त की जरूरत है कि देश में वित्तीय सुधार लागू किए जाएं और निवेशकों के हितों की हिफाजत की जाए। इस समय हमारे शेयर बाजार में करीब 1600 कंपनियां सस्पेंड पड़ी हैं। लेकिन उनके खिलाफ सेबी या कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे बेहद गलत संकेत जा रहा है। सच कहें तो यह काफी बड़ा घोटाला है। इन सस्पेंड कंपनियों में रिटेल निवेशकों के करीब 58,000 करोड़ रुपए फंसे हैं।औरऔर भी