2008 का वित्तीय संकट टाला जा सकता था

दो साल पहले वर्ष 2008- 09 में दुनिया को हिलाकर रख देनी वाली आर्थिक मंदी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था, इसका पता लगाते हुए एक अमेरिकी समिति ने कहा है कि लोगों की कारगुजारी से लेकर नियामक विफलता और नीति निर्माता सभी इस संकट के लिए जिम्मेदार रहे हैं।

वित्तीय संकट जांच आयोग की 500 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। अमेरिकी संसद ने संकट के कारणों का पता लगाने के लिए इस समिति का गठन किया था। समिति ने कहा कि 2008-09 के वित्तीय संकट को टाला जा सकता था। समिति के अनुसार जो कुछ हुआ है यह सब आदमी का किया-धरा है, यह किसी प्राकृतिक आपदा अथवा कंप्यूटर की गडबडी की वजह से नहीं हुआ है।

पिछले 18 महीने से वित्तीय संकट की जांच कर रही 10 सदस्यीय समिति ने लाखों पृष्ठों के दस्तावेजों और 700 लोगों से साक्षात्कार किया। रिपोर्ट के मुताबिक कि वित्तीय कंपनियों के प्रमुखों ने चेतावनियों को नजरअंदाज किया। वित्तीय नियमन और निगरानी में विफलता प्रणाली के लिए खतरनाक साबित हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि नीति निर्माण से जुड़े लोग संकट के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि उन्हें वित्तीय प्रणाली की शायद पूरी समझ नहीं थी।

समिति ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बड़ी वित्तीय इकाइयों के बेहतर तरीके से प्रबंध नहीं किए जाने के कारण बाजार में अनिश्चितता और दहशत बढ़ी। समिति के चेयरमैन फिल एजेंलाइड्स ने कहा, ‘‘सबसे दुखद स्थिति यह स्वीकार करना होगा कि कोई भी इस संकट को नहीं पहचान सका, अत: कोई कदम नहीं उठाया जा सका। अगर हम इस हकीकत को स्वीकार करते तो वैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है।’’

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