सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की रणनीति सुझाने के लिए बने कार्यदल ने अपनी अंतिम रिपोर्ट बुधवार को वित्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी को सौंप दी। वित्‍त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 के बजट भाषण में मिट्टी के तेल, रसोई गैस व उर्वरक पर सब्सिडी कंपनियों के बजाय सीधे ग्राहक को देने के विषय पर इस कार्यदल के गठन की घोषणा की थी। इस कार्यदल या टास्क फोर्स की अध्यक्षता भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरणऔरऔर भी

सार्वजनिक तेल मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दाम और डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ते रुपए को देखते हुए पेट्रोल के दाम में 1.82 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने की तैयारी में हैं। करीब ढाई महीने पहले ही 16 सितंबर को तेल कंपनियों – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम ने पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 3,14 रुपए बढ़ाए हैं। नोट करने की बात यह है कि जून 2010 से ही पेट्रोल के मूल्यऔरऔर भी

देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सितंबर तक के छह महीनों में ही पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग 71 फीसदी हो चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2010-11 की पहली छमाही में यह बजट अनुमान का 34.9 फीसदी ही था। वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर 2011 के बीच 1.92 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष का बजट लक्ष्य 4.13 लाख करोड़ रुपए रखा गयाऔरऔर भी

पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीजल की दोहरी मूल्य-नीति को खारिज करते हुए कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी समाप्त करने की कोई मंशा नहीं है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री जयपाल रेड्डी ने आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में पूछे गए सवाल पर कहा कि डीजल पर दोहरी मूल्य-नीति व्यावहारिक नहीं है। हम डीजल की दोहरी मूल्य प्रणाली शुरू नहीं कर सकते हैं। इससे बाजारऔरऔर भी

डॉलर के सापेक्ष रुपए की गिरावट ने अपना असर दिखा ही दिया। सरकारी तेल कंपनियों ने कमजोर रुपए से बढ़ी आयात की लागत की भरपाई के लिए गुरुवार-शुक्रवार की मध्य-रात्रि से पेट्रोल का दाम 3.14 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला कर लिया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम वन हिंदुस्तान पेट्रोलियम के आला अफसरों ने पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बैठक के बाद पेट्रोल के मूल्य बढ़ाने की घोषणा की। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल के दामऔरऔर भी

सरकार में डीजल के दाम तय करने को लेकर मतभेद बुधवार को उभर कर सामने आ गए, जब योजना आयोग ने डीजल के दाम को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का पक्ष लिया, जबकि भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार के सामाजिक दायित्व को देखते हुए डीजल पर सब्सिडी जारी रखने का समर्थन किया। राजधानी दिल्ली में सियाम (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स) के सालाना समारोह को संबोधित करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंहऔरऔर भी

सरकार की नवरत्न कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 3080.26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यह घाटा साल भर पहले इसी तिमाही में हुए 1884.29 करोड़ रुपए के घाटे के डेढ़ गुने से ज्यादा है। महज एक तिमाही का यह घाटा बीते पूरे वित्त वर्ष 2010-11 में हुए 1539.01 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ को पचा जाने के लिए काफी है। इस घाटे की सीधी-सी वजह यह है किऔरऔर भी

अभी कुछ दिन पहले तक जो सरकार बढ़ती महंगाई के बीच राजनीतिक बवाल के डर से डीजल के मूल्यों को छेड़ने से डर रही थी, उसे विपक्ष ने ऐसा मौका दे दिया है कि वह बड़े उत्साह से इस पर मूल्य नियंत्रण उठाने की तैयारी में जुट गई है। इसका सबसे पहला वार उन लोगों पर होगा जो डीजल से चलनेवाली कारें इस्तेमाल करते हैं। लोकसभा में महंगाई पर चल रही बहस का जवाब देते हुए वित्तऔरऔर भी

सालाना छह लाख रुपए से अधिक की आय वाले लोगों के लिए रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी खत्म कर दी जानी चाहिए। यह सुझाव है कि पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस पर संसद की स्थायी समिति का। समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि एलपीजी सिलेंडरों पर भारी सब्सिडी को बचाने के लिए सरकार को अमीर लोगों को इससे बाहर कर देना चाहिए। बता दें कि दिल्ली में इस समय 14.2 किलो के आम घरेलू एलपीजी सिलेंडरऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की शीर्ष तेल उत्खनन कंपनी ओएनजीसी का एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) लगता है कि अगस्त में ही नहीं आ पाएगा। इसका लगभग 11,500 करोड़ रुपए का एफपीओ इस साल मार्च से पहले ही आना था। फिर कहा गया कि यह अप्रैल में आएगा। इसके बाद टाल कर जुलाई किया गया। और, अब कहा जा रहा है कि जून 2011 की तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद ही इस पर विचार किया जा सकता है।औरऔर भी