ऑप्शंस के भाव कभी शेयरों की तरह नहीं चलते कि मांग सप्लाई से ज्यादा हुई तो बढ़ गए और मांग सप्लाई से कम हुई तो घट गए। ये तो महज छाया हैं कैश-सेगमेंट में शेयरों की चाल की। वह भी महीने भर या सप्ताह का चक्र है। जिस तरह दिख रहे चंद्रमा का आकार अमावस्या और पूर्णिमा के बीच बदलता रहता है, कुछ-कुछ वैसी ही गति ऑप्शंस भावों की होती है। हमें कैश-सेगमेंट में शेयरों और डेरिवेटिव्सऔरऔर भी

ऑप्शंस में कॉल व पुट से आगे बढ़ते हुए हम यहां तक पहुंच गए हैं कि दोनों ही तरह के ऑप्शंस की तीन श्रेणियां होती हैं – इन द मनी (आईटीएम), ऐट द मनी (एटीएम) और आउट ऑफ द मनी (ओटीएम)। इनमें से ऑप्शन धारक को तभी फायदा होता है जब उसका खरीदा ऑप्शन इन द मनी या आईटीएम होता है। बाकी दोनों ही स्थितियों – एटीएम व ओटीएम में उसने ऑप्शंस खरीदते वक्त जो दामं याऔरऔर भी

डेरिवेटिव्स में ऑप्शंस का सौदा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इसमें भी सबसे ज्यादा चलनेवाले ऑप्शंस दो तरह के होते हैं। एक कॉल ऑप्शंस और दो पुट ऑप्शन। कॉल ऑप्शन उसके धारक को नियत तिथि पर किसी आस्ति को पूर्व निधारित भाव या स्ट्राइक प्राइस पर खरीदने का हक देता है, लेकिन खरीदना उसकी बाध्यता नहीं होती। वहीं, पुट ऑप्शन उसके धारक को नियत तिथि पर किसी आस्ति को पूर्व निधारित भाव या स्ट्राइक प्राइस पर बेचने काऔरऔर भी

कोरोना के कोहराम में ऐसा हल्ला है जैसे दुनिया खत्म होने जा रही है, जबकि सच यही है कि यह एक आम वायरस है जो कुछ महीने में गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाएगा। फिर जीवन बहुत जल्दी पटरी पर आने लगेगा। संभव है इसके बाद दुनिया के राजनीतिक व अंतरराष्ट्रीय संबंधों के समीकरण थोड़े बदल जाएं। लेकिन बिजनेस की लंबी छलांग की गुंजाइश बनी रहेगी। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

ऑप्शंस की चर्चा सोमवार को। उससे पहले हम फ्यूचर्स के कुछ खास-खास पहलू जान लें। कैश सेगमेंट में हम कोई स्टॉक जितने का खरीदते हैं, उतना मूल्य सौदा पूरा होते ही हमारे पास आ जाता है। लेकिन जब हम किसी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तब उसकी कोई वैल्यू नहीं होती। उसमें वैल्यू या मूल्य तब आता है, तब उसका भाव सौदे के भाव से इधर-उधर होता है। मसलन, हमने कोई फ्यूचर्स सौदा 100 रुपए का खरीदा तोऔरऔर भी

दुनिया में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की शुरुआत करीब 400 साल पहले हुई थी। इसके कुछ उदाहरण यूरोप में ट्यूलिप के फॉरवर्ड सौदे और जापान में चावल के फ्यूचर्स हैं। मशहूर कैंडल स्टिक पद्धति का आगाज़ जापान में चावल के फ्यूचर्स की ट्रेडिंग से ही हुई। दुनिया के सबसे पुराना फ्यूचर्स व ऑप्शंस एक्सचेंज – शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड का गठन 1848 में हुआ। वहीं, भारत में पहला फ्यूचर्स बाज़ार साल 1875 में बॉम्बे कॉटन ट्रेड एसोसिएशन के रूपऔरऔर भी

कोरोना वायरस के प्रकोप से देश को बचाने के लिए लॉकडाउन या घरबंदी की मीयाद 19 दिन और बढ़ा दी गई है। इस बीच शेयर बाज़ार छुट्टियों के अलावा बराबर खुला रहा। वह पस्ती से थोड़ा बाहर निकला नज़र आ रहा है। 24 मार्च को घरबंदी लागू होने से सोमवार 13 अप्रैल तक के मात्र बारह ट्रेडिंग सत्रों में निफ्टी-50 सूचकांक 15.29% बढ़ चुका है। लेकिन बाज़ार से अनिश्चितता का साया अभी तक उठा नहीं है तोऔरऔर भी

तीन महीने पहले 11 जनवरी को चीन ने कोरोना वायरस से हुई पहली मौत की घोषणा की थी। उसके बाद सारी दुनिया उलट-पुलट चुकी है। कोरोना की महामारी कोने-कोने तक जा पहुंची है। एशिया ही नहीं, यूरोप से लेकर अमेरिका तक कोहराम मचा हुआ है। विश्व अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में आ गई है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता। लेकिन यह घना अंधेरा भविष्य का उजाला भी लाएगा। आज तथास्तु में निवेश लायक 11 कंपनियां…औरऔर भी

मार्च 2020 में सेंसेक्स 23% गिर गया। शेयर बाज़ार से निवेशकों के करीब 15 लाख करोड़ रुपए उड़ गए। विश्व वित्तीय संकट के आगाज़ के दौरान अक्टूबर 2008 में भी सेंसेक्स 24% गिरा था। पर, तब निवेशकों को इतना नुकसान नहीं हुआ था। जाहिर है बाज़ार अब तेज़ी से मंदी के चक्र में गिर चुका है। खरीदने का शानदार मौका। मगर, आम निवेशकों के पास बाज़ार में लगाने को धन ही नहीं। फिर भी पेश है तथास्तु…औरऔर भी

वित्त वर्ष 2020-21 शुरू। कोरोना के चलते बीते वित्त वर्ष 2019-20 में अंत तक सेंसेक्स 24% और निफ्टी 26% से ज्यादा टूट गया। जल्दी ही मौसम विभाग मानसून का अनुमान पेश करेगा। लॉक-डाउन उठने में अभी 13 दिन बाकी हैं। इसमें से मात्र 5 दिन ट्रेडिंग होगी। रामनवमी, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे व अम्बेडकर जयंती पर 4 दिन बाज़ार बंद है। ऊपर से 4 दिन शनि-रवि। सो, अगला कॉलम अब 15 अप्रैल को। फिलहाल बुध की बुद्धि…औरऔर भी