त्योहारी सीज़न के साथ हमारे वित्त वर्ष की दूसरी छमाही का आगाज़ होता है। इस दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं तो इसका सीधा असर शेयर बाज़ार पर पड़ता है। लेकिन इस सीज़न को परे रखकर देखें तो भी शेयर बाज़ार कुदरत की ऋतुओं की तरह चक्रों में चलता है। आप कहेंगे कि बाज़ार तो छोटे-बड़े हरेक ट्रेडर की खरीद-बिक्री का योगफल होता है। फिर इसमें कहां से मौसम जैसा चक्र आ गया? दरअसल बाजार का हालऔरऔर भी

दिलों में सिहरन-सी है, दिमाग में भय-सा है कि शेयर बाज़ार कभी भी क्रैश हो सकता है। चीन का आर्थिक संकट और अमेरिका में लटके पड़े प्रमुख सरकारी बिल इन आशंकाओं के ठोस आधार हैं। ऊपर से बढ़ती मुद्रास्फीति और उसके असर को सम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार। बावजूद इसके बाज़ार थोड़ा-बहुत दम मारकर फिर चढ़ जाता है। चीन से उपजी चिंता ज्यादा ठोस है क्योंकि रीयल एस्टेट फर्म एवरग्रांड के अलावा वहांऔरऔर भी

आज से चालू वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी छमाही शुरू हो रही है। असल में इसमें भी अक्टूबर तिमाही को कंपनियों के साथ ही सरकार व समूची अर्थव्यवस्था के लिए काफी अच्छा माना जाता है। उपभोक्ता उत्पाद बनानेवाली कंपनियों को यकीन रहता कि त्योहारी सीजन होने के नाते इस तिमाही में उनके माल खूब बिकेंगे। सरकार को पूरे साल में जितना उधार जुटाना होता है, रिजर्व बैंक उसके बड़े हिस्से का इंतजाम कर चुका होता है। विदेशीऔरऔर भी

गणपति विसर्जन हो चुका है। श्राद्ध पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या अगले हफ्ते बुधवार 6 अक्टूबर को है। इसके बाद भारत के बहुलांश रिटेल व एचएनआई निवेशक त्योहारी सीजन के मूड में आ जाएंगे। यह सिलसिला दशहरा, दीवाली से होते-होते अगले साल पतंग उड़ाने के त्योहार मकर संक्रांति तक चलता रहेगा। बाज़ार में इस दौरान अगले साल मार्च तक होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के कालेधन की भी आवक शुरू हो चुकी होगी। साफ है किऔरऔर भी

हर तरफ हल्ला है कि शेयर बाजार में चल रही तेज़ी रिटेल निवेशकों की सीधी सक्रियता का नतीज़ा है। लेकिन यह दरअसल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के साथ ही देशी निवेशक संस्थाओं की तरफ से बाज़ार में ज्यादा धन डालने का नतीज़ा है। एफपीआई/एफआईआई ने इस साल अब तक भारतीय शेयर बाज़ार में शुद्ध रूप से 64,655 करोड़ रुपए डाले हैं। म्यूचुअल फंडों ने भी सितंबर तिमाही में अपना एनएवी बढ़ाने के लिए जमकर निवेश किया। वैसे,औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जो भी ट्रेडर बाज़ार को प्रभावित करनेवाले कारकों पर नज़र और उनकी समझ रखता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौट सकता। उसे इस सत्य पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि ऐसा-ऐसा है तो वैसा-वैसा होगा और ऐसा-ऐसा नहीं है तो वैसा-वैसा नहीं होगा। यह देश-दुनिया, समाज व बाज़ार का अकाट्य नियम है। यह भी ध्यान रहे कि बाज़ार को कोई आसमानी या अदृश्य शक्तियां नहीं चलातीं। जो करते हैं इंसान ही करतेऔरऔर भी

दुनिया में कुछ भी अकारण नहीं होता। खासकर वित्तीय बाज़ारों के लिए तो यह खरा-खरा सच है। बाहर हालात को प्रभावित करनेवाले कारण देखने में काफी मुश्किल आ सकती है। लेकिन वित्तीय बाज़ार में कारक गिनती के होते हैं। कोई देखने पर उतर आए तो उन्हें साफ-साफ देख सकता है। हालांकि बावजूद इसके अनिश्चितता का तत्व या कारक वित्तीय बाज़ारों का जरूरी हिस्सा है जिससे कोई बच नहीं सकता। मगर, इसे नाथने के लिए प्रायिकता (Probability) सेऔरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में सक्रिय ज्यादातर लोगों की मानसिकता अब भी सट्टेबाज़ी की है। वे दिमाग से नहीं, किस्मत से खेलते हैं और बेहद लालच व भय की भावनाओं में झूलते रहते हैं तो तमाम शेयरों के भाव अतियों पर घूमते हैं। कभी बहुत ज्यादा तो कभी बहुत कम। ट्रेडिंग में तो कम पर खरीदो, ज्यादा पर बेचो का तरीका चलता ही है। लम्बे निवेश में भी हमें यह रणनीति अपनानी चाहिए। बाज़ार का जैसा स्वभाव है,औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडर बनने की कुछ अपरिहार्य शर्तें व नियम हैं। अगर आप हमेशा आकुल-व्याकुल रहते हैं तो आपको ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। अगर आपको बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है, अक्सर तैश में आकर काम करते हैं, भविष्य व वर्तमान को लेकर हमेशा भयभीत रहते हैं तो आपको ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए। शेयर बाज़ार समेत समूचे वित्तीय बाज़ार में वही ट्रेडर नियमित रूप से कामयाब होता है जिसने अपना स्वभाव बड़ा संयत बनाऔरऔर भी

पुरानी कहावत है। पुरुष बली नहीं होत है, समय होत बलवान। भीलन छीनीं गोपियां, वही अर्जुन वही बाण। भीलों के झुंड ने गोपियां छीन लीं और धुरंधर धनुर्धर अर्जुन उनको नहीं रोक पाए। जीवन में भी यही होता है। सबसे तेज़ धावक दौड़ जीत जाए, सबसे ताकतवर योद्धा जीत जाए, ज़रूरी नहीं। इसी तरह शेयर बाज़ार में ट्रेडर को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि यहां बहुत सारे कारक काम करते हैं, जिन पर उसका कोई वश नहीं।औरऔर भी