जाने-अनजाने
समाज में जब तक हम बहुत बड़े नहीं बन जाते, तब तक इस्तेमाल किए जाने का खतरा हमेशा हमारे ऊपर मंडराता रहता है। हम मगन होकर काम करते हैं। लेकिन अनजाने में इस्तेमाल हो जाते हैं।और भीऔर भी
समाज में जब तक हम बहुत बड़े नहीं बन जाते, तब तक इस्तेमाल किए जाने का खतरा हमेशा हमारे ऊपर मंडराता रहता है। हम मगन होकर काम करते हैं। लेकिन अनजाने में इस्तेमाल हो जाते हैं।और भीऔर भी
ट्यूब पर कठोर टायर न लगाया जाए तो गाड़ी चल नहीं सकती। कछुए की कठोर खोल न हो, शाही के लंबे काँटे न हों तो कोई भी उन्हें खा जाए। इसी तरह समाज में बहुत सीधा होना भी अच्छा नहीं।और भीऔर भी
कोटरों में दाने बीनती दुनिया। व्यक्ति की निजी दुनिया। व्यक्तियों से समाज, समाजों से देश और देशों से बनी दुनिया। हर किसी को मुकम्मल जहां मिल जाता तो इस तरह नहीं बनती दुनिया।और भीऔर भी
ये वर्ग और वर्ग संघर्ष संक्रमण काल की चीजें हैं। शांति काल आते ही व्यक्ति ही अंतिम सत्य बन जाता है और सामाजिक व्यवस्था एक-दूसरे को निचोड़ने-खसोटने का जंगल राज बन जाती है।और भीऔर भी
कुछ खेल ऐसे होते हैं जिनमें आपकी जीत पूरे देश व समाज की जीत होती है। तो, टुच्चे खेल काहे खेलें! हमें तो ऐसे काम में खुद को लगाना चाहिए जिसमें हमारे जीतने पर करोड़ों चेहरे खिल जाएं।और भीऔर भी
जो लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं, वे नौकरी करते हैं। जो लोग सिर्फ समाज के बारे में सोचते हैं, वे होलटाइमरी करते हैं। जो लोग अपने साथ-साथ समाज के बारे में भी सोचते हैं, वे उद्यमी बनते हैं।और भीऔर भी
नैतिकता की दुहाई कमजोर लोग देते हैं। धर्म, समाज व राजनीति के ठेकेदारों के लिए यह लोगों को भरमाने का एक जरिया है जिसका नाम जपते हुए वे खुद जघन्य से जघन्य काम किए जाते हैं।और भीऔर भी
मानव समाज कोई गेहूं का बोरा नहीं है जो चार दाने उठाकर सारे माल की गुणवत्ता तय कर दी जाए। यहां तो अंतिम आदमी भी इतना अनोखा हो सकता है कि सारे सर्वेक्षण का नतीजा ही पलट जाए।और भीऔर भी
हर कोई अपनी ज़िंदगी जीने को स्वतंत्र है। लेकिन जैसे ही आप देश या समाज की सामूहिक जिम्मेदारी संभालते हैं, आपकी निजता खत्म हो जाती है, अपने निजत्व को निर्वासित करना पड़ता है।और भीऔर भी
समुद्र में कहीं से पानी उठाओ, वह खारा ही निकलेगा। उसमें एक ही तरह के खनिज मिलेंगे। इसी तरह समाज के हर तबके में अच्छे-बुरे, दुष्ट-सज्जन लोग मिलते हैं। ऊंची डिग्रियों से किसी का मूल स्वभाव नहीं बदलता।और भीऔर भी
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