जबरदस्त हताशा व निराशा का आलम है। वजह चाहे जो भी हो, कच्चे तेल का 114 प्रति डॉलर पर पहुंच जाना, भारतीय शेयर बाज़ार का मूल्यांकन या मार्जिन ट्रेड के सौदों को समेटने का दबाव। अब तो लार्जकैप से कहीं ज्यादा मार स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स पर पड़ रही है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को निफ्टी-50 सूचकांक 0.39% ही घटा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 2.94% और मिडकैप-100 सूचकांक 2.21% गिर गया। अभी तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक ही भागे जा रहे थे। उन्होंने अक्टूबर महीने में अब तक हमारे शेयर बाज़ार से ₹48,056 करोड़ रुपए निकाले हैं, जबकि इस साल जनवरी से अब तक ₹3.08 लाख करोड़ या 32.80 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। अब तो रिटेल निवेशक तक इस कदर घबरा गए हैं कि घाटे पर भी बेचकर निकलने लगे हैं। जो बहुत हिम्मत, समझ व सामर्थ्य वाले हैं, उन्होंने म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों में एसआईपी जारी रखी है। बाकी का हाल देखकर तो कलेजा मुंह को आ जाता है। ऐसा हाल तो कोरोना महामारी में भी नहीं था। तब तो कुछ महीनों में बाज़ार डुबकी लगाकर उबर आया था। इस बार तो रात की सुबह होती ही नहीं दिख रही। फिर भी आशा है कि जाती नहीं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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