देश की आर्थिक विकास दर अक्टूबर से दिसंबर 2011 की तिमाही में घटकर 6.1 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले करीब तीन सालों (11 तिमाहियों) में किसी भी तिमाही की सबसे कम आर्थिक विकास दर है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 की सितंबर तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर 6.9 फीसदी और उससे पहले जून तिमाही में 7.7 फीसदी रही थी। आर्थिक विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह इस साल अबऔरऔर भी

फरवरी में बड़ा कुछ नहीं हुआ तो ऑपरेटरों ने इसका फायदा उठाकर निफ्टी को पिछले सेटलमेंट से खींचकर 5650 तक पहुंचा दिया। अब बहुप्रतीक्षित करेक्शन आना शुरू हुआ है तो यह सारे उम्मीदों को तोड़ता हुआ 5500, 5400, 5300 से 5200 की तरफ लिए जा रहा है। आखिरी दो दिनों में तेजड़ियों ने हाथ खड़े कर दिए। लांग सौदों का मामूली रोलओवर हुआ। जो थोड़े-बहुत रोल्स हुए, वे कैश व डेरिवेटिव सेगमेंट में ऑर्बिट्रेज का नतीजा हैंऔरऔर भी

महज 300 अंकों की मोटामोटी गिरावट ने ट्रेडरों की पैंट ढीली कर दी क्योंकि उन्हें ऑपरेटरों की पकड़वाले चंचल स्टॉक्स में अंदाज़ से कहीं ज्यादा मार्क टू मार्केट ढीला करना पड़ा। ऐसा होना ही था। ट्रेडर अब बैलेंसशीट के लिहाज से वापस निफ्टी के 5000 या 4700 वाले स्तर पर जा पहुंचे हैं। ऐसा एकदम योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। हम इस दौरान बराबर चौकन्ने रहे क्योंकि 5400 के ऊपर की रैली पूरी तरह जोड़तोड़ काऔरऔर भी

आज नहीं तो कल इसे होना ही था और आज यह हो गया। 1.33 बजे तक निफ्टी कल से महज दो अंक नीचे था। लेकिन फिर अगले दो घंटे में 102 अंक टूट गया। 40 फीसदी रोलओवर हुए और ऑपरेटरों ने बाजार पर जमकर चोट की। निफ्टी अंत में 1.82 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 5505.35 पर बंद हुआ। कल खत्म हो रहे सेटलमेंट के निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव भी इसी के आसपास 5518.10 रहा।औरऔर भी

एक और दिन गुजर गया और बाजार के तमाम लोग जिस करेक्शन या गिरावट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, वह आज भी नहीं हुआ। हमें उम्मीद थी कि निफ्टी 5610 तक जाएगा। लेकिन वह तो दोपहर 2.40 बजे के आसपास 5621.50 तक पहुंच गया और आखिर में 0.77 फीसदी की बढ़त के साथ 5607.15 पर बंद हुआ। निफ्टी फरवरी फ्यूचर्स 5634.70 तक जाने के बाद 5620.20 पर पहुंच गया। मैंने जैसा आपको पहले बताया था,औरऔर भी

सोमवार को महाशिवरात्रि की छुट्टी। बाजार मंगलवार को खुलेगा। डेरिवेटिव सौदों का सेटलमेंट इसके दो दिन बाद गुरुवार 23 फरवरी को पूरा होगा। इस तरह रोलओवर के लिए मंगलवार को मिलाकर तीन दिन ही बचे हैं। सिद्धांत कहता है कि बीते हफ्ते जिस तरह बाजार 3 फीसदी बढ़ा है, उसमें अब करेक्शन आना चाहिए। लेकिन भारतीय बाजार का व्यवहार कहता है कि गुरुवार तक ऐसा होने के आसार नहीं है। कुछ जानकारों का कहना है कि शुक्रवारऔरऔर भी

यूं तो आज के समय में कंपनियों के साथ राष्ट्रीयता या राष्ट्रवाद को जोड़ने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि देशी-विदेशी हर कंपनी का मकसद अंधाधुंध मुनाफा कमाना है। अन्यथा, वॉलमार्ट या केयरफोर से सबसे ज्यादा चोट खा सकने वाले बिग बाज़ार या रिलायंस फ्रेश जैसे देशी रिटेलर ही उनका स्वागत पलक पांवड़े बिछाकर नहीं कर रहे होते। किशोर बियानी जैसे लोग तो इस चक्कर में हैं कि अपने उद्यम की इक्विटी इन विदेशियों को बेचकर कैसेऔरऔर भी

अमेरिका में बेरोज़गारी की दर तीन सालों के न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है। डाउ जोन्स मई 2008 के बाद के सर्वोच्च स्तर पर आ चुका है। वह शुक्रवार को 1.2 फीसदी की बढ़त लेकर 12,862.23 पर बंद हुआ है। लेकिन अब वहां करेक्शन आना लाजिमी है। देश में निफ्टी बड़े शान से 5300 का स्तर तोड़कर ऊपर आ चुका है। लगातार तीन दिन से 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) से ऊपर टिका है। अरसे सेऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के बायबैक प्रस्ताव ने काफी निराश कर दिया। उसका शेयर तो बायबैक की घोषणा के पहले ही 15 फीसदी की बड़ी बढ़त ले चुका था। ऐसे में शुक्रवार के बंद भाव पर महज 10 फीसदी का प्रीमियम निवेशकों को मंजूर नहीं है। खासकर तब, जब कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे बाजार की अपेक्षा से भी काफी कमजोर रहे हैं। निवेशकों की इसी निराशा को दर्शाते हुए आरआईएल का शेयर आज 2.66 फीसदी गिरकरऔरऔर भी

नई पीढ़ी या अमेरिका-यूरोप के लोग फास्टफूड के पीछे भागें तो समझ में आता है। लेकिन हमें भी सब कुछ पकापकाया पाने की चाहत लग गई है। हम भूल जाते हैं कि ये न तो कोई राजा-महाराजों का जमाना है और न ही हम कोई धन्नासेठ हैं कि जिसे भी चाहें, सेवा में लगाकर अपना काम करवा सकते हैं। अपनी बचत को संभालकर निवेश करने की कला हमें खुद ही सीखनी व विकसित करनी होगी। दूसरा कोईऔरऔर भी