हर कोई दो का चार करने में जुटा है, बिना यह जाने कि असल में दो का चार होता कैसे है। यह धरती क्या, पूरा ब्रह्माण्ड कमोबेश नियत है, स्थाई है। यहां कुछ जोड़ा-घटाया नहीं जा सकता। कोई चीज एक महाशंख टन है तो आदि से अंत तक उतनी ही रहेगी। बस, उसका रूप बदलता है। द्रव्य दूसरे द्रव्य में ही नहीं, ऊर्जा तक में बदल जाता है। लेकिन ऊर्जा और द्रव्य का योगफल एक ही रहताऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने निजी कंपनियों के मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की तर्ज पर भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के रूप में काम करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सरकारी कंपनियों के मामले में सीवीसी भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के रूप में काम करता है। सेबी ने अपनी पिछली बोर्ड बैठक में पेश किए गए एक ज्ञापन में यह राय जाहिर की है। भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल केऔरऔर भी

देश की नई पीढ़ी हो सकता है कि वित्तीय रूप से हम से कहीं ज्यादा साक्षर हो। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों में अगले शैक्षणिक वर्ष से वित्तीय साक्षरता को अलग विषय के रूप में पढ़ाने की तैयारी में जुटा हुआ है। यह नैतिक विज्ञान की तरह एक अलग विषय होगा। वित्तीय साक्षरता के तहत विद्यार्थियों को शेयर बाजार की ट्रेडिंग, ऑप्शंस व फ्यूचर्स जैसे डेरिवेटिव्स की जटिलता के साथ इनसाइडर ट्रेडिंग का भी ज्ञान करायाऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के एक अधिकारी को खूस देकर फर्जी चिट्ठी बनवाने से लेकर मनी लॉन्डरिंग व शेयर बाजार में धांधली करने जैसे अपराधों का दोषी स्टॉक ब्रोकर निर्मल कोटेचा फरार हो गया है। वह भी तब, जब सेबी और रिजर्व बैंक जैसे नियामक ही नहीं आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, आईबी और सीबीआई जैसी एजेंसियां उस पर गिद्ध निगाह रखे हुए थीं। कोटेचा ने तीन साल पहले पिरामिड साइमीरा के शेयरों को जबरन चढाने केऔरऔर भी

दुनिया ही नहीं, इस सृष्टि की हर चीज हर पल बदलती रहती है। लेकिन परिवर्तन का यह नियम अगर आप किसी आम किसान से पूछेंगे तो वो कहेगा कि ऐसा नहीं है क्योंकि उसकी दुनिया तो कभी बदलती ही नहीं। सूरज के निकलने से लेकर डूबने तक का वही चक्र। न सावन हरे, न भादो सूखे। देश के आम आदमी से पूछेंगे तो वह भी कहेगा कि हां, चीजें बदलती जरूर हैं, लेकिन बेहतर नहीं, बदतर हीऔरऔर भी

कंपनियों के सामने चुनौती होती है साल दर साल ही नहीं, हर तिमाही लगातार बढ़ते रहने की। कभी 15 तो कभी 20 फीसदी या इससे भी ज्यादा तो और भी अच्छा। किसी तिमाही झटका लगा तो हम-आप मुंह बनाने लगते हैं कि कैसी कंपनी है जो बढ़ती नहीं। निरंतर विकास की इसी जरूरत को पूरा करने के लिए वित्तीय बाजार, खासकर शेयर बाजार अस्तित्व में आया। लेकिन धीरे-धीरे यह लोगों की बचत को खींचने का नहीं, लूटनेऔरऔर भी

बाजार में कोई दिशा नहीं नज़र आती। तेजड़िए और मंदड़िए अपने-अपने तीर-कमान और तर्क लेकर भिड़े हुए हैं। मंदड़ियों के पास शॉर्ट सौदे करने की तमाम वजहें हैं। जैसे, अर्थव्यवस्था का कामकाज ठीक नहीं है, जीडीपी घट रहा है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, कंपनियों का लाभार्जन दबाव में है और बराबर डाउनग्रेड हो रहे हैं। इन सबसे ऊपर उनकी पक्की राय है कि निफ्टी 4000 तक गिर सकता है और अगले छह महीनों में बाजार मेंऔरऔर भी

ऑडिट क्षेत्र की नियामक संस्था, आईसीएआई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) ने लवलॉक एवं लेवेस के दो चार्टर्ड अकाउन्टेंटों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है और करीब 14,000 करोड़ रुपए के सत्यम घोटाले में उनकी भूमिका को देखते हुए दोनों पर पांच-पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। आईसीएआई ने एक बयान में कहा, “आईसीएआई की अनुशासन समिति ने जांच में लवलॉक एवं लेविस के चार्टर्ड अकाउंटेंट पुलावर्ती शिव प्रसाद और चिंतापटला रवींद्रनाथ कोऔरऔर भी

अक्सर बहुत सारी बातें सिद्धांत में बड़ी सतरंगी होती हैं, लेकिन व्यवहार में बड़ी बदरंग होती हैं। सिद्धांततः माना जाता है कि शेयरधारक अपने हिस्सेदारी की हद तक कंपनी का मालिक होता है। लेकिन सच्चाई में ऐसा बस मन का धन है। सौ-दो सौ या हजार-दो हजार शेयर रखनेवालों की तो बात छोड़ दीजिए, 10-15 फीसदी हिस्सेदारी रखनेवाले संस्थागत निवेशकों (एफआईआई, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां) तक का कोई योगदान कंपनी के फैसलों में नहीं होता है। पब्लिकऔरऔर भी

बाजार कमजोरी के साथ खुला और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े आने तक कमजोर ही बना रहा। बाजार में आम धारणा थी कि इसकी विकास दर 6.9 फीसदी रहेगी और सचमुच यह 6.9 फीसदी ही रही। लेकिन बाजार का चाल-चलन इस कदर बदल चुका है कि ट्रेडरों को बहुत सारी सूचनाएं ‘गजब की तेजी’ से मिल जाती हैं और वे उसके हिसाब से बहकने लगते हैं। पहले जीडीपी के 6.2 फीसदी बढ़ने की अफवाह खबर केऔरऔर भी