सत्यम घोटाले में मुख्य दोषी मस्त, दो सीए निपटे

ऑडिट क्षेत्र की नियामक संस्था, आईसीएआई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) ने लवलॉक एवं लेवेस के दो चार्टर्ड अकाउन्टेंटों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है और करीब 14,000 करोड़ रुपए के सत्यम घोटाले में उनकी भूमिका को देखते हुए दोनों पर पांच-पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

आईसीएआई ने एक बयान में कहा, “आईसीएआई की अनुशासन समिति ने जांच में लवलॉक एवं लेविस के चार्टर्ड अकाउंटेंट पुलावर्ती शिव प्रसाद और चिंतापटला रवींद्रनाथ को प्रोफेशनल कदाचार का दोषी पाया है।” असल में ये दोनों अप्रैल 2001 से सितंबर 2008 के दौरान प्राइस वॉटरहाउस की तरफ से सत्यम का वैधानिक ऑडिट कर रही फर्म लवलॉक एंड लेवेस में ऑडिट मैनेजर थे और इन्होंने ही कंपनी के वित्तीय वक्तव्यों पर दस्तखत किए थे।

लेकिन आश्चर्य की बात है कि आईसीएआई ने मुख्य ऑडिट फर्म प्राइस वॉटरहाउस के दो पार्टनरों – एस गोपालकृष्णन और श्रीनिवास ताल्लुरी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। बल्कि स्थिति यह है कि इनके खिलाफ शुरू की गई जांच अभी तक किसी नतीजे पर ही नहीं पहुंच सकी है। बता दें कि हाल ही में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने वित्त मंत्रालय से आग्रह किया है कि ऑडिट के लिए अलग नियामक बनाया जाए क्योंकि आईसीएआई खुद ऑडिटरों का सामूहिक मंच है। इसलिए हितों के टकराव के कारण वो उनके खिलाफ समुचित कार्रवाई नहीं कर सकती।

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