चीन अपने 6980 अरब डॉलर के जीडीपी का करीब 2.5% हिस्सा, 174.5 अरब डॉलर वैज्ञानिक शोध पर खर्च करता है। भारत इस मद में 1843 अरब डॉलर के जीडीपी का मात्र 0.9% हिस्सा, 16.5 अरब डॉलर खर्च करता है। चीन ने 2020 तक खर्च बढ़ाकर जीडीपी का 3% करने का लक्ष्य रखा है, जबकि भारत का लक्ष्य 2017 तक 2% पर पहुंचने का है। चीन ने 2010 में वैज्ञानिक शोध से जुड़े 9,69,315 पेपर प्रकाशित किए, जबकिऔरऔर भी

।।मनमोहन सिंह।। संस्‍कृत भारत की आत्‍मा है। संस्‍कृत विश्‍व की प्राचीनतम जीवित भाषाओं में से एक है। लेकिन प्रायः इसके बारे में गलत धारणा है कि यह केवल धार्मिक श्‍लोकों और अनुष्ठानों की ही भाषा है। इस प्रकार की भ्रांति न केवल इस भाषा की महत्‍ता के प्रति अन्‍याय है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि हम कौटिल्य, चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्‍त व भास्‍कराचार्य जैसे अनेक लेखकों, विचारकों, ऋषि-मुनियों और वैज्ञानिकों के कार्य केऔरऔर भी

ऑपरेटरों द्वारा संचालित स्टॉक्स की धुनाई का एक और दौर बाजार में साफ-साफ देखा जा सकता है। केएसके एनर्जी वेंचर्स और गति लिमिटेड इसी का शिकार बन गए लगते हैं। केएसके को 8.22 फीसदी तोड़कर 64.20 रुपए की नई तलहटी पर पहुंचा दिया गया, वहीं 20 फीसदी तोड़कर गति की भरपूर दुर्गति कर डाली गई। ऐसे में चुनिंदा स्टॉक्स तक सीमित रहना ही भला। देखें कि डिश टीवी और वीआईपी इंडस्ट्रीज में क्या हो रहा है? हमनेऔरऔर भी

केवल विज्ञान ही निरेपक्ष और व्यापक समाज के हित में है। बाकी महान से महान विचार भी निरपेक्ष नहीं होते। उसमें किसी का हित तो किसी का अहित होता है। यह दिखता नहीं, पर देखना जरूरी है।और भीऔर भी

अध्यापकों का कर्तव्य है कि वे बच्चों के मन से इस डर को निकालें कि विज्ञान कठिन विषय है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने राजधानी दिल्ली में आयोजित एक समारोह में कहा कि अध्यापकों को छात्रों में विज्ञान की योग्यता का पता लगाते समय उनकी प्रतिभा को बाहर लाना चाहिए। राष्ट्रपति ने मंगलवार को ‘अनुसंधान के लिए विज्ञान में नवप्रवर्तन की खोज’ से संबंधित इन्सपायर पुरस्कार देते हुए दो अहम बातों की तरफ ध्यान आकर्षित किया। इनमें अध्यापकोंऔरऔर भी

माना कि इच्छाएं ही दुख का मूल कारण हैं। अमीर से अमीर शख्स भी और ज्यादा पाने के चक्कर में दुखी रहता है। लेकिन इच्छाएं है, तभी तो जीवन है। कला व ज्ञान-विज्ञान का स्रोत भी तो इच्छाएं ही हैं।और भीऔर भी

ज्ञान-विज्ञान की सारी जद्दोजहद प्रकृति व परिवेश के साथ पूरा तादात्म्य बनाने के लिए है। जो है, उसे समझने के लिए है। लेकिन एक के जानते ही पुराना बदल जाता है। इसलिए ज्ञान की यात्रा अनवरत है।और भीऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, बाजार ने कल 5420 पर पहुंचने के बाद यू-टर्न लिया और आज 5490 तक चलता चला गया। हालांकि इसके बाद वो गिरना शुरू हो गया क्योंकि मंदड़िए अपना करतब दिखाने लगे। वे निफ्टी को 5432 तक गिरा ले गए। लेकिन बाजार उसके बाद उठा तो उठता ही जा रहा है। 5500 के ऊपर वो पहुंच चुका है। दिक्कत यह है कि इस वक्त ज्यादातर ट्रेडर व निवेशक के मन में यह बात घरऔरऔर भी

दार्शनिक बंधु सदियों से इसी तर्क में उलझे हैं कि पहले अंडा आया कि मुर्गी। लेकिन विज्ञान बताता है कि पहले आया आरएनए – राइबो न्यूक्लीक एसिड जो एक साथ मुर्गी भी है और अंडा भी।और भीऔर भी

हर धर्म दावा करता है कि उसकी मान्यताएं वैज्ञानिक हैं। लेकिन धर्म स्थिर है जबकि विज्ञान अपनी ही स्थापनाओं को तोड़ता बढ़ता जा रहा है। सोचिए, किसी दिन विज्ञान ही धर्म बन गया तो!और भीऔर भी