सुप्रीम कोर्ट ने काफी हद तक सहारा समूह का पक्ष स्वीकार कर लिया है, जबकि उसके खिलाफ लड़ रहे पूंजी बाजार नियामक, सेबी और निवेशकों के समूह की शिकायत है कि अदालत ने उनका पक्ष सुना ही नहीं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अलतमस कबीर और जस्टिस एस एस निज्जर व जे चेलामेश्वर की बेंच ने फैसला सुनाया कि सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन,औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट में सहारा समूह और पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का मुकदमा लंबा खिंचता जा रहा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन (वर्तमान नाम – सहारा कमोडिटी सर्विसेज कॉरपोरेशन) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन से कहा है कि वे तीन हफ्ते में तय कर लें कि ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) के 2.3 करोड़ निवेशकों के धन को कैसे सुरक्षित करेंगी। इनमें से अधिकांश निवेशकऔरऔर भी

सहारा समूह को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत मिल गई है। अदालत ने सैट (सिक्यूरिटीज अपीलेट ट्राब्यूनल) के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें उसने सहारा समूह की दो कंपनियों को 17,400 करोड़ रुपए निवेशकों को लौटाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एस एच कापड़िया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सहारा समूह की याचिका को स्वीकार कर लिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख मुकर्रर कीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सहारा समूह को फौरी राहत दे दी। उसने सिक्यूरिटीज अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) के 18 अक्टूबर 2011 के उस आदेश पर स्टे दे दिया जिसमें सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट (वर्तमान नाम, सहारा कमोडिटी सर्विसेज) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन को ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनर्टिबल डिबेंचर) इश्यू के 2.3 करोड़ निवेशकों को छह हफ्ते के भीतर उनके द्वारा जमा कराए गए करीब 17,400 करोड़ रुपए लौटाने को कहाऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को सहारा समूह की दो कंपनियों के ओएफसीडी इश्यू की तहकीकात जारी रखने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि हो सकता है कि निवेशकों को इन उत्पादों (डिबेंचरों) का कोई आगा-पीछा ही न मालूम हो और वे बाद में खुद को हर्षद मेहता जैसी धोखाधड़ी का शिकार हुआ महूसस करें। कोर्ट ने गुरुवार को सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के ओएफसीडीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया रीयल एस्टेट को निर्देश दिया है कि वह ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) स्कीम के आवेदन का फॉर्मैट और कंपनी की तरफ से धन जुटानेवाले अपने सभी मान्यताप्राप्त एजेंटों की सूची उपलब्ध कराए। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा परिवार की इस कंपनी को यह निर्देश तब दिया जब कंपनी ने कहा कि वह निवेशकों द्वारा दिए गए गलत पतों व अन्य ब्यौरों के लिए जवाबदेह नहीं है। प्रधान न्यायाधीश एस एच कपाडिया कीऔरऔर भी

सहारा समूह आईपीएल की अपनी टीम पुणे वॉरियर्स में अपनी हिस्सेदारी घटाने पर विचार कर रहा है। यह टीम सहारा ने साल भर पहले 22 मार्च 2010 को एक नीलामी के जरिए 37 करोड़ डॉलर (करीब 1700 करोड़ रुपए) में खरीदी थी। सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय ने अमेरिकी शहर बोस्टन में कहा, “हमें भविष्य में आईपीएल टीम में कोई धन लगाने की जरूरत नहीं है। बल्कि हम इसकी कुछ हिस्सेदारी निकालने पर विचार कर रहेऔरऔर भी