हमारा शेयर बाजार जिस तरह बढ़ते-बढ़ते गिरने लगा है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक खरीदते-खरीदते बेचने लगे हैं, उसमें ऐसी कोई उम्मीद नहीं बनती कि निफ्टी-50 जल्दी ही नया शिखर बनाने जा रहा है? वैसे भी जब तक रिटेल ट्रेडरों का भरोसा बाज़ार में नहीं बनता और निवेशक मौका पाते ही मुनाफा निकालने लगते हैं, तब तक बाज़ार में कोई भी तेज़ी लम्बी नहीं खिंच सकती। लेकिन बाज़ार में एक सिद्धांत और चलता है कि जब रिटेल ट्रेडरऔरऔर भी

अपने यहां मार्च 2020 में कोरोना के क्रैश के बाद शेयर बाज़ार में तेज़ी का जो दौर शुरू हुआ, उसमें रिटेल निवेशक झूमकर बाज़ार में आए। उन्हें गहरा यकीन था कि बाज़ार को बढ़ना ही बढ़ना है। इस दौरान जब भी बाज़ार गिरा, उन्होंने खरीद बढ़ा दी। उनकी यह पहल मुख्य रूप से म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों के ज़रिए हुई। इसमें इतना दम था कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली को वह पचाती गई। अबऔरऔर भी

शेयर बाज़ार का शीर्ष सूचकांक निफ्टी-50 अक्टूबर 2021 में हासिल शिखर से अभी 7.46% दूर है। असल में वह जब भी चढ़ता है, मुनाफावसूली का दबाव उसे नीचे खींच लेता है। यह कोई असहज या बुरी बात नहीं क्योंकि शेयर बाज़ार में हर कोई कमाने ही आया है और महीनों बाद जब ज्यादा भाव पाने का मौका आया है तो क्यों चूके? ऐसे भी लोग बेच रहे हैं जिन्होंने अक्टूबर 2021 में निफ्टी के शिखर के आसपासऔरऔर भी

देश की सबसे बड़ी व सक्रिय 50 कंपनियों और भारतीय शेयर बाज़ार की नुमाइंदगी करनेवाला निफ्टी-50 सूचकांक इस साल 15 जुलाई के बाद से 26 अगस्त तक 9.41% बढ़ चुका है। यह वही अवधि है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर 2021 से हमारे शेयर बाज़ार में खरीदने से ज्यादा बेचने का सिलसिला रोककर बेचने से ज्यादा खरीदने का क्रम शुरू किया है। इस दौरान उन्होंने हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में 22,312.40 करोड़ रुपएऔरऔर भी

जिस तरह हर तरह के बिजनेस या व्यापार की लागत होती है, उसी तरह शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने की भी स्पष्ट लागत है जिससे कोई बच नहीं सकता। स्थाई लागत तो हर कोई जानता है जिसमें कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल फोन, वाई-फाई या इंटरनेट कनेक्शन, घर-ऑफिस, ब्रोकरेज़ और एसटीटी वगैरह का खर्च शामिल है। लेकिन इसके अलावा पूंजी की लागत से अक्सर लोग आंख मूंद लेते हैं। इसमें एक है मुद्रास्फीति और दूसरी खास लागत हैऔरऔर भी

आखिर शेयर बाज़ार में थोक व रिटेल भाव का कैसे पता लगाया जाए? व्यापार की तरह यहां कोई डिस्ट्रीब्यूटर या होलसेलर तो होता नहीं, जिससे माल थोक में खरीदकर फुटकर ग्राहकों पर बेच दिया जाए और कस्टमर को डिस्काउंट देने के बाद भी जमकर कमा लिया जाए! जाननेवाले जानते ही होंगे कि भरपूर डिस्काउंट देने के बाद भी डी-मार्ट (एवेन्यू सुपरमार्ट) कितना जमकर कमाता है, जिसके मालिक राधाकृष्ण दामाणी शेयर बाज़ार के भी बहुत पुराने उस्ताद हैंऔरऔर भी

जिसे भी शेयर बाज़ार का सफल ट्रेडर बनना है, उसे सबसे पहले व्यापारी की सूझ-बूझ और धंधे का बुनियादी तौर-तरीका सीखना होगा। सीखना ही नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करना होगा, अपने जेहन में गहरे बैठाना होगा। कोई भी व्यापारी थोक के भाव में खरीदता और रिटेल के भाल पर बेचता है। इसी मार्जिन से वह अपनी दुकान के रखरखाव व कर्मचारियों का सारा खर्च निकालने के बाद मुनाफा कमाता है। यह मुनाफा इतना होता है कि अपनाऔरऔर भी

महंगाई क्यों बढ़ी या घटी, व्यापारी इस चक्कर में कभी पड़ता ही नहीं है। उसे इतना भर पता होता है कि अभी चल क्या रहा है। इसी तरह शेयर बाज़ार के ट्रेडर को कभी इस पर मगज़मारी करनी ही नहीं चाहिए कि ऐसा क्यों या वैसा क्यों है। उसे तो बारीकी से यह जानना चाहिए कि अभी, ठीक इस वक्त बाज़ार में चल क्या रहा है। इसके लिए उसे माइक्रोस्कोप लगाना पड़े या टेलिस्कोप, सब चलेगा। लेकिनऔरऔर भी

जिस तरह घोड़े पर अच्छी सवारी करने के लिए उससे जान-पहचान और दोस्ती बनानी पड़ती है, उसी तरह हमें जिन शेयरों में ट्रेड करना है, उसका स्वभाव समझना पड़ता है, उससे अच्छी जान-पहचान बनानी पड़ती है। तभी हम सही मौके पर उन्हें खरीद और बेचकर ट्रेडिंग से मुनाफा कमा सकते हैं। शेयरों का स्वभाव उसमें सक्रिय ट्रेडरों व निवेशकों की प्रवृत्ति से बनता है। कुछ शेयर अच्छे होते हैं, लेकिन लम्बे समय तक चलते ही नहीं। इसलिएऔरऔर भी

शेयरों के भाव बढ़ते हैं क्योंकि धन उनका पीछा करता है। धन उनका पीछा किसी खबर या अनुमान की वजह से करता है। इस चक्र में खबर की खास अहमियत है। लेकिन शेयर बाज़ार में कोई खबर सार्वजनिक रूप से ही सबके लिए बाहर आती है। अप्रकाशित या अघोषित खबर पर ट्रेडिंग करना इनसाइडर ट्रेडिंग हैं और ऐसा करना दंडनीय अपराध है। लेकिन अपने यहां खुद कंपनी प्रवर्तक ही अपने शेयरों में खेल करते और करवाते हैं।औरऔर भी