जनगणना के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश में 1991 के बाद से किसानों की संख्या करीब 1.50 करोड़ घट गई है, जबकि 2001 के बाद यह कमी 77 लाख से थोड़ी ज्यादा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पिछले बीस सालों में हर दिन औसतन 2035 काश्तकार या किसान अपनी स्थिति से बेदखल होते जा रहे हैं। जानेमाने कृषि विशेषज्ञ और अंग्रेज़ी अखबार ‘द हिंदू’ में ग्रामीण मामलों के संपादक पी साईनाथ ने अपने एकऔरऔर भी

देश में सबसे ज्यादा ऋण के बोझ तले दबा राज्य महाराष्ट्र है। रिजर्व बैंक के मुताबिक बीते साल 2010-11 में महाराष्ट्र के ऊपर 2.36 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इससे ठीक पीछे उत्तर प्रदेश है जिस पर कुल 2.34 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। फिर क्रम से पश्चिम बंगाल (1.98 लाख करोड़), गुजरात व आंध्र प्रदेश (1.36 लाख करोड़) और तमिलनाडु (1.09 लाख करोड़ रुपए) का नंबर आता है। राज्य के नए बजट अनुमान केऔरऔर भी

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एक तरह से ठेकेदारों जैसा ही काम करती हैं। लेकिन ठेकेदार की छवि हमारे दिमाग में नेताओं तक पहुंच और सरकारी धन की लूट करनेवाले गुंडे-मवाली की ही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही मूलतः ठेकेदार ही तो रहे थे। पर, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एकदम भिन्न व प्रोफेशनल तरीके से काम करती हैं। देश में जिस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर की खस्ता हालत को लेकर त्राहि-त्राहि मची है, उसमें इस क्षेत्र कीऔरऔर भी

2008 से लेकर अब तक के तीन सालों में देश में 1,55,939 कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 35,154 कंपनियां महाराष्ट्र की हैं। इसके बाद 27,972 कंपनियां दिल्ली, 24,055 कंपनियां आंध्र प्रदेश, 19,106 कंपनियां तमिलनाडु और 11,776 कंपनियां गुजरात की हैं। इस तरह 1,18,063 यानी 75% से ज्यादा बंद कंपनियां इन पांच राज्यों की ही हैं। इस दौरान बिहार की 1534, मध्य प्रदेश की 1546, राजस्थान की 2160 और उत्तर प्रदेश की 5593 कंपनियोंऔरऔर भी

अजंता फार्मा देश की दवा कंपनियों में धंधे के लिहाज 63वें नंबर पर है। छोटी कंपनी है। कुल बाजार पूंजीकरण 410 करोड़ रुपए का है। लेकिन काम जबरदस्त कर रही है। बीते हफ्ते गुरुवार, 28 जुलाई को उसने जून 2011 की तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। इनके मुताबिक इन तीन महीनों में उसकी बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 29.52 फीसदी बढ़कर 98.29 करोड़ रुपए से 127.31 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 79.51औरऔर भी

एक 15 दिसंबर 2010 का दिन था जब सरकारी कंपनी मॉयल (पूरा पुराना नाम मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड) की लिस्टिंग हुई थी और 375 रुपए पर जारी किया गया उसका शेयर पहले ही दिन 591.05 के शिखर पर जा बैठा था। उस दिन उन तमाम पंटरों के कपड़े उतर गए थे जो लिस्टिंग के पहले अनधिकृत बाजार में इन शेयरों को 200-250 रुपए में बेच रहे थे। और, एक कल 23 जून 2011 का दिन रहा, जबऔरऔर भी

केंद्रीय उपभोक्ता मामलात मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक नेशनल कंज्यूमर हेल्पाइन पर शिकायतें दर्ज कराने में दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश के ग्राहकों की है। हो सकता है कि इनमें सबसे ज्यादा योगदान दिल्ली से सटे नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़नेवाले उत्तर प्रदेश के इलाकों का है। अप्रैल 2011 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन को ग्राहकों की कुल 10,170 शिकायतें मिलींष। साथ ही वेबसाइट पर 639 शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कराई गईं। कुलऔरऔर भी

बिहार पूरे देश का इकलौता राज्य है जहां सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। वहां कोई भी कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान से 155311 पर फोन करके आवेदन लिखवा सकता है जिसे संबंधित कार्यालय के पीआईओ को डाक/ई-मेल द्वारा भेज दिया जाता है। इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए अब आम आदमी को ऑनलाइन आरटीआई आवेदन दर्ज कराने की सुविधा दे दी गई है। इस तरह की सुविधा न तो महाराष्ट्रऔरऔर भी

बालाजी अमीन्स स्मॉल कैप कंपनी है। बीएसई के बी ग्रुप में है। उसका कुल बाजार पूंजीकरण 162 करोड़ रुपए है। कंपनी की कुल इक्विटी 6.48 करोड़ रुपए है जो पहले 10 रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी थी, लेकिन 18 नवंबर 2010 से इन्हें 2 रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बांट दिया गया है। इसका 53.88 फीसदी हिस्सा प्रवर्तकों और 46.12 फीसदी हिस्सा पब्लिक के पास है। उसका शेयर शुक्रवार को बीएसई (कोड – 530999)औरऔर भी

उत्तर प्रदेश के दशहरी और दूसरे किस्मों के आम के शौकीन लोगों को इस बार ‘फलों का राजा’ खरीदने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी क्योंकि प्रतिकूल हालात की वजह से इस मौसम में आम के उत्पादन में खासी गिरावट के आसार साफ नजर आ रहे हैं। उधर महाराष्ट्र में अलफांसों की तीन चौथाई से ज्यादा फसल बरबाद हो जाने की खबर पहले ही आ चुकी है। ऑल इंडिया मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंसरामऔरऔर भी