कामयाब ट्रेडर बाज़ार में इकलौते मकसद से उतरता है। वो है पूंजी को बराबर बढ़ाते जाना। इससे उसे शोहरत भी मिल सकती है। लेकिन मनोरंजन, प्यार या सामाजिक प्रतिष्ठा वगैरह-वगैरह उसे बाज़ार से नहीं, बाहर से मिलती है। बाज़ार में सुबह से शाम तक टाइमपास करना भी बेमतलब है। लोग भले ही कहें कि कितना मेहनती ट्रेडर है। लेकिन जो मेहनत पूंजी न बढाए, वो किस काम की? आइए देखते हैं पूंजी बढ़ाने के आज के मौके…औरऔर भी

तमाम अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि भारत की हालत सरकारी कर्मों व आम भारतीय स्वभाव के चलते अंदर ही अंदर इत्ती खोखली होती जा रही है कि हल्के धक्के से गिर जाए। रुपया डूब रहा है। विदेशी निवेशकों को रोक पाना बहुत कठिन है। वैसे, अर्थशास्त्रियों पर एक चर्चित लेखक कहते हैं कि जिज्ञासु जन वैज्ञानिक, संवेदनशील जन कलाकार और व्याहारिक लोग बिजनेस करते हैं; बाकी बचे लोग अर्थशास्त्री हो जाते हैं। सो, उन्हें छोड़ बढ़ें आगे…औरऔर भी

बाजार खुलते ही निफ्टी 5645 तक चला गया। लेकिन बड़ी साफ वजहों से खुद को इस स्तर पर टिकाए नहीं रख सका और धड़ाधड़ 5555 तक गिर गया। बंद हुआ है 0.83 फीसदी की गिरावट के साथ 5567.05 पर। ट्रेडर भौचक और भ्रमित हैं। उनका वही पुराना सवाल है कि बाजार इस तरह आखिर गिरा क्यों? तो प्यारे! यह रोलओवर की पुरानी तकलीफ है। इस डेरिवेटिव सेटलमेंट की एक्सपायरी में सिर्फ सात दिन बचे हैं। इस बीचऔरऔर भी

ल्यूपिन लिमिटेड नाम से कुछ भी लगे। लेकिन है यह खांटी देसी कंपनी। केमिस्ट्री में एमएससी करनेवाले देशबंधु गुप्ता ने 1968 में इसकी स्थापना की। बताते हैं कि गुप्ता जी शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के जमाने में जाली दवाएं बनाकर बेचते थे। लेकिन 1970 में भारतीय पेटेंट एक्ट आ गया। फिर गुप्ता जी को वाल्मीकि के अंदाज में समझ में आ गया है कि गलत धंधा करने में फायदा नहीं और वे कुशल सारथी व उद्यमी कीऔरऔर भी