कुछ मल्टीबैगर गए तो आ गए नए

बाजार खुलते ही निफ्टी 5645 तक चला गया। लेकिन बड़ी साफ वजहों से खुद को इस स्तर पर टिकाए नहीं रख सका और धड़ाधड़ 5555 तक गिर गया। बंद हुआ है 0.83 फीसदी की गिरावट के साथ 5567.05 पर। ट्रेडर भौचक और भ्रमित हैं। उनका वही पुराना सवाल है कि बाजार इस तरह आखिर गिरा क्यों? तो प्यारे! यह रोलओवर की पुरानी तकलीफ है। इस डेरिवेटिव सेटलमेंट की एक्सपायरी में सिर्फ सात दिन बचे हैं। इस बीच रोलओवर के दौरान तेज उतार-चढ़ाव तो रहेगा। फिर भी मेरा मानना है कि निफ्टी इसी सेटलमेंट में 5730 तक पहुंच जाएगा।

क्रॉम्प्टन ग्रीव्स अच्छी कंपनी है। लेकिन खराब नतीजों के कारण उन्हें धुन डाला गया। अकेले एक फंड हाउस ने उसके 30 लाख से ज्यादा शेयर बेचे हैं। ल्यूपिन में राकेश झुनझुनवाला अपनी इक्विटी हिस्सेदारा निकाल रहे हैं। बीएसई व एनएसई के आधिकारिक आंकड़ों के मार्च 2011 की तिमाही के अंत तक उनके व उनकी पत्नी के पास कंपनी के 1.44 करोड़ (3.22 फीसदी इक्विटी) शेयर थे। जून 2011 की तिमाही के अंत तक ये घटकर 77.30 लाख पर आ चुके हैं।

इस तरह आरजे ने तीन महीने में ल्यूपिन के करीब 67 लाख शेयर बेच डाले हैं। सुना है कि उनकी बिक्री अब भी जारी है। इसके वास्ते माकूल माहौल बनाने के लिए ही मीडिया में कंपनी का भारतीय कामकाज बिकने की खबर चलवाई गई। यह अलग बात है कि शेयर बढ़ने के बजाय गिर गया। एलआईसी हाउसिंग एक और स्टॉक है, जिसे खराब नतीजों की अपेक्षा में मंदड़िए ठोंके जा रहे हैं।

खरीद की बात करें तो कई फंड हाउस इस समय रीयल्टी स्टॉक्स में हाथ डाल रहे हैं। इसमें सबसे पहला स्टॉक है डीएलएफ। नोमुरा सिक्यूरिटीज ने डीएलएफ में नए मूल्य का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन इससे पहले एक प्रमुख ब्रोकरेज हाउस ने 210 रुपए पर डाउनग्रेड कर इसमें 180 रुपए का लक्ष्य तय किया था। एक बार फिर डाउनग्रेड का इस्तेमाल खुद खरीदने के लिए किया गया। ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि बाजार नियामक ने एनालिस्टों के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं बना रखे हैं।

सेंचुरी टेक्सटाइल्स ने अपनी सालाना रिपोर्ट में खुलासा किया है कि वह बहुत जल्दी ही वरली की जमीन पर 13 लाख वर्गफुट में कंस्ट्रक्शन का काम पूरा कर रही है। इससे सेंचुरी की बैलेंस शीट में भारी आय और मुनाफे की आवक होगी। मैं सेंचुरी और बॉम्बे डाईंग को लेकर लंबे अरसे से काफी तेजी की धारणा रखता हूं।

अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस महीने के रोलओवर के बाद कम से कम अगले दो सालों के लिए हालात बड़े सुखद हो जाएंगे। तय है कि बाजार अब तक के सारे शिखर के पार चला जाएगा। इसमें भी बी ग्रुप के शेयर ज्यादा ही तेजी से बढ़ेंगे। आप सभी टीटीके हेल्थकेयर, वीआईपी इंडस्ट्रीज और टीटीके प्रेस्टिज वगैरह का हाल देख चुके हैं। इन सभी को हमने एकदम शुरू में पकड़ा था। अब वे मनचाही रफ्तार पकड़ चुके हैं और फिलहाल मौजूदा बाजार भावों पर इनमें काफी जोखिम है। लेकिन धरती वीरों से कभी खाली नहीं होती। कुछ नए स्टॉक मल्टीबैगर बनने की दिशा में बढ़ रहे है। इनके नाम हैं – फिलाटेक्स, स्पिक, आशियाना हाउसिंग, अशाही सांगवन कलर्स व पीएसएल। ये सभी आपको अच्छा खासा रिटर्न दे सकते हैं। मल्टीबैगर का मतलब उन स्टॉक्स है जो आपको कई गुना रिटर्न दे सकते हैं।

मानिए तो उम्र है, नहीं तो वो एक पड़ाव भर है। अगर मंजिल साफ है तो इसकी परवाह करने की जरूरत नहीं है। चलते जाइए। यह आपके पीछे-पीछे चलती आएगी। आपकी राह की बाधा नहीं बनेगी।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का फीस-वाला कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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