प्यार और प्रकृति
जीने के साधनों की सौदेबाज़ी में ज़िंदगी इस कदर निचुड़ जाती है कि हम जीने लायक ही नहीं बचते। हालांकि चाहें तो हम इनके बगैर भी मजे से जी सकते हैं। इसके लिए दो ज़रूरी चीजें हैं प्यार और प्रकृति, जहां सिर्फ समर्पण चलता है, सौदेबाज़ी नहीं।और भीऔर भी
जिम्मा आपका
लोगों को आपसे नहीं, आपको लोगों से जुड़ना है। जोड़ और प्रेम में अहंकार नहीं चलता। आप होश में हो, लोग नशे में हैं तो उनको खींचकर सही मुकाम, सही राह पर लाने का जिम्मा तो आपका ही हुआ न!और भीऔर भी
प्यार से वसूली
फिरौती, राजनीति, धर्म और धंधा – चारों में पब्लिक से वसूली की जाती है। फिरौती में फौरी तो राजनीति में स्थाई भय दिखाकर वसूली की जाती है, जबकि धर्म और धंधे में वसूली बड़े प्यार से की जाती है।और भीऔर भी
बाजार में 1.5%, पर असर 40% पर
बाजार दो साल के न्यूनतम स्तर को छूकर लौटा है। इस मुकाम पर निवेशकों के विश्वास को फिर से जमाना एकदम टेढ़ी खीर है। बल्कि अभी का जो माहौल है, उसमें हालात के और बदतर होते जाने के ही आसार हैं। सरकार के बयान और कदम बेअसर हैं क्योंकि वे खोखले हैं और उनकी दिशा भी सही नहीं है। आपूर्ति को संभालकर एमसीएक्स में हस्तक्षेप के जरिए कमोडिटी के भाव थामे जा सकते थे। वहीं, करेंसी डेरिवेटिव्सऔरऔर भी






