ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

मित्रों, इस कॉलम में जब भी हम किसी शेयर में निवेश की सिफारिश करते हैं तो अक्सर आगाह करते रहते हैं कि खुद ठोंक-बजाकर देख लेने के बाद ही निवेश करें। जैसे, 11 अप्रैल 2011 को हमने यहां सुप्रीम इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह देने के साथ लिखा था, “कोई कंपनी जब अच्छी तरह में समझ में आ जाए, उसमें भावी विकास की गुंजाइश नजर आए, तभी उसके शेयरों में निवेश करें। हमारे या किसी और केऔरऔर भी

रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने साफ कह दिया है कि ब्याज दरों के बढ़ने का चक्र अब पूरा हो गया है और आगे इनमें कमी ही आएगी। ऊपर से लगता है कि ब्याज दर ऊंची रहने से बैंकों को फायदा होता है। लेकिन हकीकत यह है कि ब्याज घटने से बैंकों का धंधा बढ़ता है। ब्याज घटने और धंधा बढ़ने की इसी उम्मीद में बैंकों के शेयर अब बढ़ने लगे हैं। कल सेंसेक्स 1.46 फीसदी बढ़ाऔरऔर भी

अब निवेश के लिए मर चुका है लांग टर्म। लद चुका है लांग टर्म निवेश का ज़माना। आज का दौर खटाखट नोट बनाने का है। रुझान पकड़कर समझदारी से ट्रेडिंग करने का। बाजार चाहे गिरे, या बढ़े। बनाइए नोट खटाखट। दोनों ही हाल में कमाई। दोनों हाथों में लड्डू और सिर कढ़ाई में। जी हां, ऑनलाइन ट्रेडिंग एकेडमी का यही दावा है। उसका कहना है कि वह आपको हफ्ते भर में ऐसी ट्रेनिंग दे देगी कि आपऔरऔर भी

जो कंपनी ठीक पिछले बारह महीनों में अपने हर शेयर पर 79.35 रुपए का शुद्ध लाभ कमा रही हो, जिसके शेयर की बुक वैल्यू (रिजर्व + इक्विटी / कुल जारी शेयरों की संख्या) 200.88 रुपए हो, जिसका पी/ई अनुपात पिछले साल भर से पांच, छह, सात कर रहा हो, फिर भी उसके शेयरों को पूछनेवाले न हों तो भारतीय शेयर बाजार की गली को अंधों की गली ही कहना ज्यादा ठीक होगा। या, बहुत हुआ तो यूंऔरऔर भी

शेयर बाजार इस समय सर्द-गर्द हो चुका है। बाजार के लोगों में प्रति निवेशक 10,000 रुपए के भी स्टॉक खरीदने की चाह नहीं रह गई है। यही दिखाता है कि रिटेल निवेशक सचमुच दीवालिया होने की किस हालत में पहुंच चुके हैं। बाजार अब सुपर एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स), डीआईआई व एफआईआई के लिए ही रह गया है और इस सूरत में आखिरकार होगा यह कि बहुत सारे सुपर एचएनआई आनेवाले सालों में सामान्य निवेशक बनकर रहऔरऔर भी

डीएमके के छह मंत्रियों का केंद्र सरकार से बाहर निकलना एक नौटंकी है जो सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की रजामंदी से रची जा रही है। सारे मंत्रियों के हटने के बावजूद यूपीए सरकार को डीएमके का बाहर से समर्थन जारी है, जारी रहेगा। इसलिए केंद्र सरकार के वजूद को कोई खतरा नहीं है। हां, संसद के भीतर समीकरण थोड़े जरूर बदल जाएंगे। डीएमके के 18 सांसद जाएंगे तो मुलायम की समाजवादी पार्टी के 22 सांसद सरकार को मिलऔरऔर भी

मैं कल करीब दर्जन भर दमदार विश्लेषकों के मिला और वे सभी कच्चे तेल की चढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि कच्चे तेल के दाम जल्दी ही 130-140 डॉलर प्रति बैरल तक चले जाएंगे। इसलिए वे खुद भी शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाने के बारे में मेरा रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। 2005 में जब यहऔरऔर भी

आलोचकों की आलोचनाओं को धता बताते हुए बाजार में बजट का उत्साह कायम है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी साढ़े तीन फीसदी बढ़ गए। वैसे, सच कहूं तो हमें इस बात की कतई परवाह नहीं करनी चाहिए कि कोई बजट के बारे में क्या कह रहा है क्योंकि हकीकत यही है कि इस बार का बजट पिछले साल से बेहतर है और ऐसे सुधारों से भरा हुआ है जो शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 का बजट देश और देश की अर्थव्यवस्था के हित में है। शेयर बाजार अभी इसे अपने हित में मानता है या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आखिरकार अर्थव्यवस्था ही बाजार की भी मजबूती का आधार बनती है। फिर आज अगर बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक उछला है तो जरूर बाजार ने भी इसका अहसास किया है। हालांकि सेंसेक्स बाद में केवल 122.49 अंकों या 0.69 फीसदी की बढ़त के साथ 17,823.40 परऔरऔर भी