बड़े-बड़े विश्लेषक, टीवी चैनल और म्यूचुअल फंड बुला रहे हैं कि आओ! शेयर बाज़ार में निवेश करने का यही मौका है। सेंसेक्स अभी 25,000 पर है, जल्दी ही 40,000 तक चला जाएगा। सावधान, यह हमारी लालच को भुनाने की कोशिश है। आज वे कोल्टे पाटिल डेवलपर्स को 154 पर खरीदने को कहेंगे, जबकि हमने आठ महीने पहले इसे 20 अक्टूबर को तब खरीदने को कहा था, जब यह 77 पर था। निवेश का एक और शानदार मौका…औरऔर भी

थोड़ा-सा धैर्य और थोड़ी-सी समझ हो तो शेयर बाज़ार में निवेश से कमाई कतई मुश्किल नहीं। हमने यहीं पर इसी साल 26 जनवरी को एसबीआई को तीन साल में 2900 तक पहुंचने के लक्ष्य के साथ 1615 पर खरीदने की सिफारिश की थी। यह शेयर 14 फरवरी को 1455 तक गिर गया। लेकिन 26 मई को 2835 तक उठ गया। चार महीने में 75.54% का रिटर्न! सुचितिंत रणनीति हमेशा फायदा कराती है। आज फिर एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

कमाएंगे नहीं तो बचाएंगे क्या! बचाएंगे नहीं तो बढ़ाएंगे क्या! शेयरों में निवेश कमाने-बचाने नहीं, बल्कि जो है उसे बढ़ाने के लिए किया जाता है। हमने 4 मई को सिंटेक्स इंडस्ट्रीज़ में 45 रुपए पर तीन साल में 96 रुपए के लक्ष्य के साथ निवेश की सलाह दी थी। वो तीन हफ्ते में ही 85 रुपए तक पहुंच गया। जो चाहें 89% रिटर्न लेकर निकल सकते हैं। आज तथास्तु में एक बेहद जोखिम-भरा, लेकिन संभावनामय मिडकैप स्टॉक…औरऔर भी

उत्साह का आलम। नई शुरुआत। बाज़ार को मनमांगी मुराद मिल गई तो सेंसेक्स व निफ्टी नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर। ऐसे में निवेश तो बनता है। पर सबसे बड़ी चुनौती है कि किस शेयर में? इसे सुलझाने के लिए जितना बड़ा रिसर्च सेटअप चाहिए, उसमें हर महीने पांच-दस लाख डालने होंगे। फिर भी हम यहां-वहां से जुगाड़ कर 200 रुपए/माह में चार शेयर बता रहे हैं। उठाएं इस सस्ती व भरोसेमंद सेवा का लाभ। अब आज की कंपनी…औरऔर भी

स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश इसीलिए करते हैं कि उनमें कई गुना बढ़ने की संभावना होती है। लेकिन जब सभी स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ टूट पड़े हों तो उनके भाव ज्यादा ही चढ़ जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 17.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि उसका स्मॉल कैप सूचकांक 116.05 के पी/ई पर। आखिर, इतनी महंगी चीज़ के पीछे क्यों भागें! तो, आज तथास्तु में एक लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी

महंगाई साल-दर-साल बढ़ती है। देशी घी तीन साल पहले 250 रुपए/किलो था, अभी 400 रुपए/किलो हो चुका है। फिर कंपनी के शेयरों में महंगाई क्यों नहीं आती? आती है, बल्कि सच कहें तो अच्छी कंपनियां ही महंगाई को मात दे पाती हैं। इसीलिए महंगाई को बेअसर करने के लिए उनमें धन लगाया जाता है। तीन साल पहले यहां सुझाया सुप्रीम इंडस्ट्रीज़ का शेयर 155 से 460 हो चुका है। आज तथास्तु में एक मिडकैप कंपनी…और भीऔर भी

जिस तरह गलत लोगों के बहकावे पर गलत लोगों को चुनने से राजनीति गलत नहीं हो जाती, उसी तरह गलत लोगों के कहने पर गलत कंपनियां चुनने से शेयर बाज़ार गलत नहीं हो जाता। इसका एक और उदाहरण। हमने इसी जगह 15 सितंबर 2010 को आरती ड्रग्स में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 137 रुपए था। अभी 372 के शिखर पर है। साढ़े तीन साल में 171.5% ऊपर! अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अक्सर हम निवेश के लिए कोई कंपनी अंदाज़ से चुनते हैं या आलस्य कर जाते हैं कि ऊपर-ऊपर तो अच्छी दिख रही है। ऐसा निवेश ज़्यादातर धोखा देता है। वहीं, जब हम रिसर्च के दम पर निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना लगभग तय रहता है। दो साल पहले हमने यहीं वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स के दोगुना होने की संभावना जताई थी। वो शेयर तब 480 पर था, अभी 1060 पर है। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश के दो तरीके हैं। पहला, कहीं किसी से, जान-पहचान वाले या टीवी पर एनालिस्ट से सुन लिया तो दांव लगा दिया। यह एक तरह की सट्टेबाज़ी है जो 100% नुकसान ही नुकसान करती है। आज देश के करीब दो करोड़ डीमैट खातों में से आधे से ज्यादा निष्क्रिय क्यों पड़े हैं? दूसरा तरीका है वैल्यू इनवेस्टिंग। इसमें कंपनी की अंतर्निहित ताकत को देखकर निवेश किया जाता है। तथास्तु में अब आज की कंपनी…औरऔर भी

असली दौलत किसी चमत्कार या धोखाधड़ी से नहीं आती। आती तो हमारे तमाम दगाबाज़ नेता दुनिया के सबसे खुश इंसानों में शुमार होते। अवाम को धोखा देकर वे जनधन की लूट से धनवान तो बन गए। लेकिन दौलतमंद वे कतई नहीं। असली दौलत में एक सुकून होता है जो उनके पास नहीं है। ऐसी दौलत को हासिल करने के लिए कठिन मेहनत के साथ निवेश के सही फैसलों की जरूरत होती है। तथास्तु में मदद आज की…औरऔर भी