थोड़े समय तक शेयर बाज़ार सनकी जैसा अतार्किक बर्ताव कर सकता है और शेयरों के भाव असली मूल्य से दूर पड़े रह सकते हैं। पर, लंबे समय में भाव हमेशा सच्चे मूल्य पर आ जाते हैं। यह बात बेंजामिन ग्राहम ने अस्सी साल पहले 1934 में अपनी किताब ‘सिक्यूरिटी एनालिसिस’ में लिखी थी। वॉरेन बफेट ग्राहम को अपना गुरु मानते हैं। भाव सबको दिखते हैं, असली मूल्य को पकड़ना चुनौती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हम अगर शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं तो कंपनियों के विकास में हिस्सेदारी करते हैं। आईपीओ के जरिए प्राइमरी बाज़ार में लगाया गया धन बिना किसी ब्याज व देनदारी के सीधे कंपनी को मिल जाता है। ऐसा न हो तो कंपनी के लिए पूंजी की लागत बढ़ जाएगी। सेकेंडरी बाज़ार/स्टॉक एक्सचेंज इस निवेश के रिस्क को संभालने का माध्यम हैं। वो हमें जब चाहें, निकल जाने का मौका देता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

सिस्टम में अतिरिक्त धन/मूल्य कहां से जुड़ता है? आप कहेंगे कि गोल्ड स्टैंडर्ड हटने के बाद रिजर्व बैंक जितना चाहे, नोट छापकर डाल देता है। लेकिन नोटों में मूल्य जोड़ता है किसान जो एक दाने से सैकड़ों दाने पैदा करता है या उद्योग-धंधे जो एक करोड़ से दस करोड़ का नया मूल्य सृजित करते हैं। किसान ‘मूल्य’ बांटता नहीं, लिस्टेड कंपनियां बांटती हैं। शेयर बाज़ार में लंबा निवेश हमें यही मौका देता है। अब आज का निवेश…औरऔर भी

साल या सालगिरह हमें समीक्षा का मौका देती है ताकि हम आत्ममुग्धता से ऊपर उठकर आनेवाली चुनौतियों को पकड़ सकें। आप जानते ही हैं, अवसर अक्सर चुनौतियों की शक्ल में सामने आते हैं। साल का आखिरी तथास्तु लिखते हुए हमें खुशी है कि हमने अब तक 38 में से 32 सलाहों में यह सेवा लेनेवालों का फायदा कराया है। अफसोस ज़रूर है कि बाकी छह में घाटा क्यों हुआ? लेकिन यही है अनिश्चितता और रिस्क। अब आगे…औरऔर भी

किसी भी अर्थशास्त्री से पूछें कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने की सबसे बड़ी रुकावट क्या है तो दस में नौ का जवाब होगा कमज़ोर इंफ्रास्ट्रक्चर। अगर आज हमारा कॉरपोरेट क्षेत्र नमो-नमो कहते हुए नरेंद्र मोदी की जयकार कर रहा है तो उसकी बड़ी वजह यह है कि उसे लगता है कि मोदी प्रधानमंत्री बने तो देश का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधर  सकता है। यह उम्मीद आगे दबाव का काम करेगी। इसलिए आज तथास्तु में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी

जब देश के भीतर और देश के बाहर अनिश्चितता का माहौल कुछ ज्यादा ही गहरा हो चला हो, तब हमें उन्हीं कंपनियों में निवेश करना चाहिए जो तगड़ी होड़ में भी सीना तानकर खड़ी ही नहीं, लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे माहौल में कमज़ोर पर दांव लगाना अपनी बचत को जान-बूझकर चक्रवात में फंसाने जैसा है। हमें तो वही कंपनी चुननी चाहिए, मजबूत होते हुए भी जिसका दाम गिरा हुआ है। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

बच्चों की पढ़ाई से लेकर रिटायरमेंट की योजना काफी पहले से बनानी होती है। आप जो भी बचाते हैं, उसे मुद्रास्फीति खोखला न कर दे, इसका भी इंतज़ाम करना होता है। यह आप तब तक नहीं कर सकते, जब तक बचत का 20-30% हिस्सा स्टॉक्स में नहीं लगाते क्योंकि कंपनियां ही आपको 12-15% रिटर्न दे सकती हैं। वो भी तब, जब आप सुरक्षित व मजबूत कंपनियों का चयन करें। तथास्तु में आज ऐसी ही कुछ चुनिंदा कंपनियां…औरऔर भी

जब लार्जकैप या बड़ी कंपनियों में जमकर खरीद हो चुकी होती है तो उनमें कुछ दिनों के लिए मुनाफावसूली चल निकलती है। ठीक इसी वक्त मिडकैप स्टॉक्स में खरीद बढ़ने लगती है और वे फटाफट उढ़ने लगते हैं। फिलहाल बाज़ार का यही हाल है। लेकिन जैसे ही कोई बुरी खबर आएगी, यही मिडकैप स्टॉक्स बड़ी तेज़ी से गिरेंगे, जबकि लॉर्जकैप या तो संभले रहेंगे या गिरेंगे तो बहुत थोड़ा। इस सावधानी के साथ अब नज़र आज पर…औरऔर भी

कोई भी शेयर अपनी सहूलियत से खरीदें, न कि दूसरों के दबाव और बाजार के शोरशराबे पर। वो भी तब, जब भाव अपने माफिक आ जाए। सौ-पचास स्टॉक्स खरीदने की जरूरत नहीं। आठ-दस साल में दौलत पैदा करने के लिए पांच-दस स्टॉक्स ही काफी हैं। तथास्तु में आज एक ऐसी कंपनी जो पिछले 15 सालों से अपने मुनाफे का 3/4 हिस्सा शेयरधारकों में बांटती रही है। इसका शेयर अभी महंगा है। थोड़ा नीचे आए तभी खरीदना है…औरऔर भी

अगर आप बूढ़े व अशक्त नहीं हैं और पहाड़ चढ़ रहे हों तो बड़ा छोड़कर छोटा रास्ता अपनाते हैं, भले ही वहां पैर फिसलने का जोखिम हो। दरअसल, मानव मस्तिष्क के तार जुड़े ही ऐसे हैं कि हम स्वभावतः शॉर्टकट को तरजीह देते हैं। लेकिन लंबे निवेश में शॉर्टकट की मानसिकता बेहद नुकसानदेह साबित होती है। इसलिए हमें संयम और अनुशासन से खुद को शॉर्टकट की तरफ जाने से रोकना पड़ता है। अब आज की चुनिंदा कंपनी…औरऔर भी