गुजरात इंडस्ट्रीज पावर कंपनी लिमिटेड गुजरात सरकार की कंपनी है जिसने इसमें अपनी चार कंपनियों गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स, गुजरात एल्कलीज एंड केमिकल्स, गुजरात ऊर्जा विकास निगम और पेट्रोफिल्स को-ऑपरेटिव के जरिए इसकी 58.21 फीसदी इक्विटी ले रखी है। वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी की बिक्री 14.78 फीसदी बढ़कर 1077.95 करोड़ और शुद्ध लाभ 52.60 फीसदी बढ़कर 162.95 करोड़ रुपए हो गया। कंपनी ने दस रुपए अंकित मूल्य के शेयर पर 2.50 रुपए (25 फीसदी) लाभांशऔरऔर भी

एक तरफ कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य गिरने की भविष्यवाणी हो रही है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार आज ही मंत्रियों के समूह की बैठक के बाद डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ा सकती है। ऐसे माहौल में न जाने कौन-सा आशावाद काम कर गया कि करीब 1.90 लाख करोड़ रुपए के वोल्यूम के साथ बाजार आज बल्ले-बल्ले कर उठा। सेंसेक्स 513.19 अंक (2.89 फीसदी) बढ़कर 18,240.68 और निफ्टी 151.25 अंक (2.84 फीसदी) बढ़त लेकर 5471.25 परऔरऔर भी

एक 15 दिसंबर 2010 का दिन था जब सरकारी कंपनी मॉयल (पूरा पुराना नाम मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड) की लिस्टिंग हुई थी और 375 रुपए पर जारी किया गया उसका शेयर पहले ही दिन 591.05 के शिखर पर जा बैठा था। उस दिन उन तमाम पंटरों के कपड़े उतर गए थे जो लिस्टिंग के पहले अनधिकृत बाजार में इन शेयरों को 200-250 रुपए में बेच रहे थे। और, एक कल 23 जून 2011 का दिन रहा, जबऔरऔर भी

बाजार अब भी खुद को संभालने की जद्दोजहद में लगा है। सुबह की पस्ती के बाद चीते की तरह बढ़ा। निफ्टी 5330 और सेंसेक्स 17,755 तक जाकर थोड़ा नीचे आया है। इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का करीब 3 फीसदी बढ़ जाना थोड़ा सुकून दे रहा है क्योंकि अंततः कंपनी को डी-6 ब्लॉक में कुछ गैस मिल गई है और भारत सरकार की तरफ से सकारात्मक बयान आए हैं। क्या इसके बाद अब आरआईएल में दूसरी बारऔरऔर भी

लोग कहे जा रहे हैं, कहे जा रहे हैं, लेकिन नुस्ली वाडिया की ऐतिहासिक कंपनी बॉम्बे डाईंग का शेयर मरा जा रहा है तो मरा ही जा रहा है। हमारे चक्री महाशय तो बॉम्बे डाईंग को लेकर लंबे समय से बुलिश हैं। 21 दिसंबर 2010 को उन्होंने लिखा था कि यह नए साल का ब्लॉक बस्टर साबित होगा और दिसंबर 2011 तक चार अंकों में पहुंच जाएगा। यूं तो वे 31 मार्च 2010 से ही इसे तबऔरऔर भी

बाजार पूरे लहरिया अंदाज में चला। सेंसेक्स हल्का-सा गिरा। निफ्टी हल्का-सा बढ़ा। यह फर्क है सेंसेक्स के 30 और निफ्टी के 50 का। इसलिए आवाजें उठ रही हैं कि कम से कम सेंसेक्स का आधार बढ़ा दिया जाए क्योंकि वो बाजार का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। सेंसेक्स में कम से कम 100 कंपनियां तो होनी चाहिए। खैर, फिलहाल बाजार में शोर है कि निफ्टी 4800 की तरफ जा रहा है। जब तक बिकवाली की लहर उतरती नहीं,औरऔर भी

एडीएफ फूड्स छोटी-सी कंपनी है। 20.38 करोड़ रुपए की पूंजी है जो दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। बाजार पूंजीकरण कोई खास नहीं, 126 करोड़ रुपए है। इसलिए स्मॉल कैप में गिनी जाती है। लेकिन काम जबरदस्त करती है। भारतीय स्वाद की मास्टर है। अचार, चटनी व मसालों से लेकर फ्रोजन फूड तक बनाकर निर्यात करती है। अशोका, कैमल, एयरोप्लेन, खानखामा, ट्रूली इंडियन और सोल इसके ब्रांड हैं। 95 फीसदी कमाई मध्य-पूर्व, अमेरिका, यूरोपऔरऔर भी

दोपहर तक चढ़ रहा बाजार बाद में गिर गया। निफ्टी 1.23 फीसदी बढ़त लेकर 5322.45 तक चला गया। लेकिन मंदड़ियों का हमला जारी रहा तो आखिर में महज 0.34 फीसदी की बढ़त के साथ 5275.85 पर बंद हुआ। लेकिन मुझे कोई भ्रम नहीं, कोई दुविधा नहीं। मंदड़ियों का हमला बाजार का रुख बदल सकता है, मेरी राय नहीं। मॉरीशस के मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तान दिया गया। बाजार का हर खिलाड़ी इस हकीकत से वाकिफ हैऔरऔर भी

यूं एक ही दिन में किसी शेयर का आधे से भी कम भाव पर आ जाना अकारण नहीं होता। अगर 7 जनवरी 2009 को सत्यम कंप्यूटर का शेयर 84 फीसदी गिरकर 188.70 रुपए से 30.70 रुपए पर आया था तो इसलिए कि उसी दिन रामालिंगा राजू ने कंपनी में किए गए फ्रॉड की घोषणा की थी। लेकिन 20 जून 2011 को जीटीएल के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कि उसका शेयर 339.90 रुपए से 63.5औरऔर भी

सुबह बाजार खुलने पर धीमी गिरावट चल रही थी कि दस बजे के आसपास एक बिजनेस चैनल ने खबर चला दी कि सरकार मॉरीशस से साथ टैक्स-संधि पर पुनर्विचार कर रही है और मॉरीशस से भारत में हुए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगाया जा सकता है। फिर क्या था! बाजार खटाक से 3 फीसदी नीचे गिर गया। खबर आते ही तमाम शेयरों पर हमला शुरू हो गया भले ही उनमें मॉरीशस के जरिए आया धन लगाऔरऔर भी