पिछले बीस महीनों से कसते ब्याज दर के फंदे ने भले ही मुद्रास्फीति का बालबांका न किया हो, लेकिन औद्योगिक विकास का गला जरूर कस दिया है। खदानों, फैक्टरियों और सेवा क्षेत्र से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में मात्र 1.81 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि जानकारों का औसत अनुमान 3.5 फीसदी का था। यह सितंबर 2009 के बाद पिछले दो सालों की न्यूनतम औद्योगिक वृद्धि दर है। सितंबर 2010 में आईआईपीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर में हल्की-सी कमी जरूर आई है। लेकिन यह अब भी दहाई अंक में बनी हुई है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दर 29 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 11.81 फीसदी रही है। इससे ठीक पिछले हफ्ते में इसकी दर 12.21 फीसदी दर्ज की गई थी। दाल, सब्जियों, दूध व मांस, मछली की कीमतों का बढ़ना जारी रहा। अक्टूबर के चार हफ्चोंऔरऔर भी

बढ़ती मुद्रास्फीति के साथ महंगा होता कर्ज उद्योगों की मुश्किलें बढ़ाता रहा है और उद्यमियों को लग रहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि आठ फीसदी से ज्यादा नहीं रहेगी। प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई द्वारा उत्तर भारत के उद्योगों के बीच किए गए सर्वेक्षण में 60 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जीडीपी वृद्धि आठ फीसदी से अधिक होगी और 10 फीसदी का तो मानना है किऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद सरकार घरलू बाजार में डीजल के दाम अब और ज्यादा समय तक थामे रखने को तैयार नहीं दिख रही और इसमें फिलहाल तीन रुपए प्रति लीटर की बढोतरी की योजना बना रही है। नए दाम की घोषणा पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की मौजूदा प्रक्रिया पूरी होने के साथ की जा सकती है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिल्ली में संवाददाताओं से  अनौपचारिक बातचीतऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीजी) में वृद्धि की दर अगले वित्त वर्ष 2011-12 में 8.8 फीसदी रह सकती है और इसके चालू वित्त वर्ष के आर्थिक विकास दर से कम रहने का अनुमान है। आर्थिक शोध संस्थान सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकनोमी (सीएमआईई) ने यह अनुमान जताया है। उसने चालू वित्त वर्ष 2010-11 के लिए आर्थिक वृद्धि 9.2 फीसदी रहने की संभावना जताई है। सीएमआईई ने कहा कि वित्त वर्ष 2010-11 में कृषिऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट की तैयारियां जोरों पर हैं। वित्त मंत्रालय के दफ्तर नॉर्थ ब्लॉक में इस समय पत्रकार-परिंदे तक पर नहीं मार सकते। बजट को इतना टॉप सीक्रेट मुख्यतः एक्साइज व कस्टम ड्यूटी जैसे अप्रत्यक्ष कर प्रस्तावों की वजह से रखा जाता है क्योंकि पता लगने पर व्यापार व उद्योग जगत इनका बेजा इस्तेमाल कर सकता है। आयकर या कॉरपोरेट कर जैसे प्रत्यक्ष करों या रक्षा, शिक्षा व ग्रामीण विकास जैसी मदों का आवंटनऔरऔर भी

अगर किसी को भारतीय अर्थव्यवस्था की सही दशा-दिशा पर शक हो तो उसे अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने दूर कर दिया है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन की अध्यक्षता वाली इस परिषद ने ‘इकनोमिक आउटलुक 2010-11’ नाम से जारी लगभग नब्बे पेज की रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था के एक-एक पहलू का विवेचन किया है। उसका खास आकलन है कि इस वित्त वर्ष 2010-11 में कृषि की विकास दर 4.5 फीसदी रहेगी, जबकि बीते वित्तऔरऔर भी