प्याज निर्यात पर पाबंदी लगाने के पाकिस्तान के कदम के जवाब में अमृतसर स्थित सब्जी निर्यातकों ने शुक्रवार को टमाटर व अन्य सब्जियों से लदे ट्रक अटारी-वाघा सीमा से पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया। टमाटर, अदरक, मिर्च समेत सब्जियों से लदे करीब 70 ट्रकों को सब्जी निर्यातकों द्वारा रोक लिया गया है और इन्हें सीमा शुल्क से मंजूरी के लिए नहीं भेजा गया। अमृतसर के सब्जी व्यापारी अनिल मेहरा ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया,औरऔर भी

पाकिस्तान ने वाघा-अटारी सड़क-मार्ग से भारत को प्याज के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उसके इस कदम से प्याज की कीमतों पर नियंत्रण के भारत सरकार के प्रयासों को झटका लग सकता है। सीमा शुल्क विभाग (अमृतसर) के उपायुक्त आर के दुग्गल ने गुरुवार को बताया, “पाकिस्तान सरकार ने सड़क के रास्ते से भारत को प्याज की आपूर्ति प्रतिबंधित कर दी है।” इस प्रतिबंध के बाद पाकिस्तान के अधिकारियों ने किसी भी ट्रक को प्याजऔरऔर भी

भारत में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2005 से 2008 के बीच 2.9% से घटकर 2.6% पर आ गई है। देश के 35 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में से 14 ने 2.1% का टीएफआर स्तर हासिल कर लिया है यानी वहां की जनसंख्या अब ठहर गई है। चार राज्यों दमन-दीव, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा में यह दर 2.2 से 2.5% और सात अन्य राज्यों में 2.6 से 3% के बीच है। बाकी दस राज्यों – बिहार, उत्तर प्रदेश,औरऔर भी

मेक्सिको के कानकुन शहर में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत और चीन सहित कई प्रमुख विकासशील देशों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती के संबंध में कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते को स्वीकार कर लें। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी समझौते को तत्काल मानने को तैयार नहीं है। इस सम्मेलन में अमेरिका, भारत और चीन कानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौते को स्वीकार करनेऔरऔर भी

फ्रांसीसी कंपनियां साल 2012 तक भारत में 10 अरब यूरो (13.37 अरब डॉलर) का निवेश करने को प्रतिबद्ध हैं। फ्रांस की वित्त मंत्री क्रिस्टीन लगार्ड ने सोमवार को उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित भारत-फ्रांस व्यापार मंच की बैठक में कहा, ‘‘यह सिर्फ आंकड़ा (10 अरब यूरो) नहीं है। यह फ्रांसीसी कंपनियों की 2008 से 2012 के बीच भारत में निवेश को लेकर प्रतिबद्धता है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि हर बिजनेस ‘आपसी लाभ’ के सिद्धांत पर कामऔरऔर भी

मैं दस साल के नजरिए से अर्थव्यवस्था और बाजार व कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति को देखता हूं। इसलिए महसूस कर सकता हूं कि क्या हो रहा है। लेकिन निवेशक तो दस घंटे की बात भी नहीं देख पाते। इसलिए बाजार के खिलाड़ियों के हाथ में अपनी गरदन पकड़ा देते हैं। मैं भी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बनाने-संभालने की सलाह देता हूं। लेकिन उन्हें नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे कभी भी कर्ज लेकर बाजारऔरऔर भी

भारत जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा आयात करता है। केवल माल के व्यापार की बात करें तो विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2009 में हमारा व्यापार घाटा (आयात व निर्यात का अंतर) 87 अरब डॉलर था। दुनिया में केवल ब्रिटेन (129 अरब डॉलर) और अमेरिका (549 अरब डॉलर) हम से ऊपर थे। माल व सेवा को मिला दें तो शुद्ध आयात में हम केवल अमेरिका से पीछे हैं। अमेरिका का आंकड़ा 699 अरबऔरऔर भी

देश कहां से कहां पहुंचता जा रहा है और हम वहीं के वहीं अपनी चौहद्दी में सिमटे हैं! देश का काम हमारे बगैर चल सकता है, लेकिन हमारा काम उसके बगैर नहीं। इसलिए दौड़कर देश का साथ पकड़ना जरूरी है।और भीऔर भी

केंद्र सरकार ने इस साल फरवरी में ही ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) की सलाह पर छह विशेषज्ञों की एक कमिटी बना दी थी जिसे तय करना था कि भारत में डायबिटीज की दवा रोज़िग्लाइटाज़ोन की बिक्री व इस्तेमाल पर कैसे बैन लगाया जाए। तब तक अमेरिका का खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ढिढोरा पीट चुका था कि इस दवा के इस्तेमाल से मरीज को दिल की बीमारी हो सकती है और वह मर भी सकता है।औरऔर भी