दुनिया में छा रही आर्थिक मंदी से स्‍थायी रूप से उबरने के लिए रोजगार का मुद्दा विकास की हर रणनीति में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। इसके बिना मंदी से मुक्ति संभव नहीं है। यह बात केंद्रीय श्रम व रोज़गार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को पेरिस में जी-20 देशों के श्रम मंत्रियों के सम्‍मेलन में कही। इस सम्‍मेलन में जी-20 देशों के श्रम मंत्री वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद से बेरोज़गार की समस्‍या से निपटनेऔरऔर भी

यूरोपीय संघ व्यापार परिषद ने 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ और भारत के बीच महत्वाकांक्षी व व्यापक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स में सोमवार को परिषद की बैठक में यह रेखांकित किया गया कि समझौते का मकसद यूरोपीय वस्तुओं व सेवाओं को भारतीय बाजार में पहुंचाना है। लेकिन बैठक के बाद यह भी कहा जा रहा है कि दोनों के बीच मुक्त व्यापार समझौता मुश्किल में पड़ गया है। यूरोपीयऔरऔर भी

वर्ष 2003 में आठवें स्थान के मुकाबले वर्ष 2010  तक भारत दुनिया में कच्चे इस्पात (क्रूड स्टील) का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है। केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने सोमवार को अपने मंत्रालय से जुडी संसदीय सलाहकार समिति की अध्यक्षता करते हुए भरोसा जताया कि भारत साल 2015 तक दुनिया में कच्चे इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन सकता है। चीन तब भी सबसे ऊपर बना रहेगा। बैठक में स्टील अथॉरिटीऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाह को आगाह किया है कि अगर मौजूदा आर्थिक संकट गहराता है तो मुद्रा युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है। मुखर्जी ने गुरुवार को वॉशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्यालय में ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों के संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस तरह के मुद्रा युद्ध को आपसी बातचीत से ही टाला जा सकता है न कि प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन से। एक सवाल के जवाब में मुखर्जी नेऔरऔर भी

अपने यहां इनकम टैक्स की अधिकतम दर 30% है,  जबकि चीन में यह दर 45%, जर्मनी में 45%, जापान में 50% और स्वीडन में 57% है। लेकिन टैक्स की कम दरों के बावजूद भारत में अवाम पर बोझ ज्यादा है। कारण, भारत में सामाजिक सुरक्षा नहीं है, जबकि यहां गिनाए गए सभी देशों में हर व्यक्ति को रिटायरमेंट पेंशन, स्वास्थ्य और बच्चों के पालन-पोषण की अनिवार्य बीमा सरकार की तरफ से मिलती है। ऊपर से भारत मेंऔरऔर भी

लगातार दो महीने तक जोरदार तेजी दिखाने के बाद जुलाई में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 38 फीसदी घटकर 1.09 अरब डॉलर रह गया है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पिछले साल जुलाई देश में 1.78 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था। बता दें कि जून माह में देश में एफडीआई का प्रवाह सालाना आधार पर 310 फीसदी बढ़कर 11 साल में किसी भी महीने के रिकॉर्ड स्तर 5.65 अरब डॉलरऔरऔर भी

दुनिया भर में सोने की बिक्री बढ़वाने में लगी विश्व स्वर्ण परिषद का कहना है कि भारत में इस त्योहारी सीजन में सोने के जेवरात की रिटेल ब्रिकी 10 से 15 फीसदी बढ़ सकती है। परिषद के निदेशक शिवराम कुमार ने कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि अब तक सोने की खरीदारी शादी-ब्याह के दौरान ही की जाती थी। लेकिन अब धारणा बदल रही है। उन्होंने कहा कि हमें इस साल त्योहारी सीजन में देश भर मेंऔरऔर भी

इधर हर कोई सोने में चल रही तेजी की वजह यूरोप के ऋण संकट और अमेरिका में आई आर्थिक सुस्ती को बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार विश्लेषक क्लाइड रसेल का कहना है कि इसकी असली वजह दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीद के अलावा भारत व चीन के ग्राहकों की बढ़ी हुई मांग है जहां सोना खरीदना मुद्रास्फीति के बचाव के साथ-साथ स्टेटस सिम्बल भी बनता जा रहा है। क्लाइड रसेल काऔरऔर भी

भारत अगर ऋषियों-मुनियों का देश रहा है तो एकबारगी यह उनसे रीता नहीं हो सकता। दिक्कत यह है कि हम भागकर अतीत की वादियों में यूं गुम हो जाते हैं कि वर्तमान को ठीक से देख ही नहीं पाते।और भीऔर भी

उभरते बाजारों में निवेश करने वाले प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंडों ने सबसे ज्यादा धन भारत और चीन में लगाया है। उभरते बाजारों में पीई निवेश में इन दो देशों की कुल हिस्सेदारी 68 फीसदी है। इमर्जिंग मार्केट्स प्राइवेट इक्विटी एसोसिएशन द्वारा कराए गए अध्ययन के मुताबिक, इस साल जून तक के छह महीनों में दुनिया में हुए कुल पीई निवेश में चीन और भारत की हिस्सेदारी 68 फीसदी रही। जहां चीन में 5.8 अरब डॉलर का पीईऔरऔर भी