कोई अपने फायदे के लिए नोट छापे तो गुनाह है। लेकिन केंद्रीय बैंक नोट पर नोट छापता जाए और दावा करे कि वह ऐसा देश और देश की अर्थव्यवस्था के कल्याण के लिए कर रहा है तो उसे सही मान लिया जाता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बेन बरनान्के यही कर रहे हैं, किए जा रहे हैं। तीन महीने पहले 13 सितंबर को उन्होंने क्यूई-3 या तीसरी क्वांटिटेटिव ईजिंग की घोषणा की थीऔरऔर भी

भारत में अटकलें चल ही रही हैं कि रिजर्व बैंक सिस्टम में तरलता बढ़ाने की खातिर बैंकों के लिए तय नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती कर सकता है कि चीन के केंद्रीय बैंक ने इससे पहले ही अचानक इस रिजर्व अनुपात (आरआरआर) में कमी कर सारी दुनिया को चौंका दिया। चीन ने दिसंबर 2008 के बाद पहली बार रिजर्व अनुपात में 0.50 फीसदी की कमी की है। बता दें कि चीन भी कम आर्थिक विकास दरऔरऔर भी

नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश में गरीबों तक आसान कर्ज पहुंचाने में लगे ग्रामीण बैंक के संस्थापक मुहम्मद यूनुस ने बैक के प्रबंध निदेशक पद से अपनी बख्रास्तगी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक – बांग्लादेश बैंक ने बुधवार को युनुस को ग्रामीण बैंक के प्रमुख के पद से हटा दिया। ग्रामीण बैंक के काम काज को लेकर उनका सरकार के साथ विवाद चल रहा था। युसुन के वकील का कहना हैऔरऔर भी

भारतीय महाद्वीप में माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के दुर्दिन खत्म होने का नाम नहीं ले रहे। पहले भारत में आंध्र प्रदेश सरकार का रुख बदलने के बाद एसकेएस माइक्रो फाइनेंस व अन्य संस्थाओं की दुर्गति हो गई तो अब बांग्लादेश सरकार ने नोबेल पुरस्कार विजेता और गरीबों के बीच माइक्रो फाइनेंस की धारणा पहुंचानेवाले मुहम्मद यूनुस को उनके ही बनाए ग्रामीण बैंक के मुखिया पद से हटा दिया है। यूनुस पर आरोप है कि उन्होंने ग्रामीण बैंक केऔरऔर भी

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी, सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) इसे बड़ा हाउसिंग लोन घोटाला मानती है। लेकिन वित्त मंत्रालय कहता है कि बैंकिंग रिश्वतखोरी का यह मामला व्यवस्थागत खतरा नहीं है। देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख भी कहते हैं कि यह बहुत पुरानी समस्या है। इसलिए इसमें कोई ‘सिस्टेमिक रिस्क’ नहीं है। लेकिन यह कहीं से भी सामान्य बात नहीं है कि एलआईसी, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और सेंट्रल बैंक ऑफऔरऔर भी

चीन के केंद्रीय बैंक ने करीब तीन साल बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाकर सबको चौंका दिया है। वहां 20 अक्टूबर, बुधवार से एक साल की जमा और कर्ज पर ब्याज की दर 0.25 फीसदी बढ़ जाएगी। यह कदम मुद्रास्फीति और विभिन्न आस्तियों के बढ़ते दामों पर काबू पाने के लिए उठाया गया है। अभी वहां एक साल के जमा पर ब्याज की दर 2.25 फीसदी है जो अब 2.50 फीसदी हो जाएगी। इसी तरह एक सालऔरऔर भी