सरकारी बैंकों व संस्थाओं पर लगा हाउसिंग लोन घोटाले का दाग

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी, सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) इसे बड़ा हाउसिंग लोन घोटाला मानती है। लेकिन वित्त मंत्रालय कहता है कि बैंकिंग रिश्वतखोरी का यह मामला व्यवस्थागत खतरा नहीं है। देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख भी कहते हैं कि यह बहुत पुरानी समस्या है। इसलिए इसमें कोई ‘सिस्टेमिक रिस्क’ नहीं है। लेकिन यह कहीं से भी सामान्य बात नहीं है कि एलआईसी, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक व बैंक ऑफ इंडिया जैसी सरकारी वित्तीय संस्थाओं व बैंकों के आला अधिकारी 5 से 8 फीसदी कमीशन लेकर बिल्डरों को कर्ज देते रहे हैं।

यह भी चौंकानेवाली बात है कि निजी क्षेत्र की एक फाइनेंस कंपनी मनी मैटर्स फाइनेंशियल सर्विसेज ने इस तरह के ‘लोन सिंडिकेशन’ को बाकायदा अपना धंधा बना रखा है। यह कंपनी मजे से 83-93 फीसदी का परिचालन लाभ मार्जिन दिखाती रही और किसी ने उसके गोरखधंधे पर सवाल नहीं खड़ा किया। खबरों के मुताबिक यह कंपनी ऐसी रीयल एस्टेट कंपनियों के लिए बैंकों व वित्तीय संस्थाओं से कर्ज का इंतजाम करती रही है जिन्हें अपनी बैलेंस शीट के दम पर कर्ज नहीं मिल सकता था। ताजा मामले में हुआ यह कि इस कंपनी के बड़े अधिकारी सीधे एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के बड़े अधिकारियों तक पहुंचे। उन्हें 5-8 फीसदी कमीशन देकर पटाया और रीयल एस्टेट कंपनियों को मनचाहा भारी-भरकम कर्ज दिलवा दिया। जाहिर है इस लोन सिंडिकेशन से उन्होंने भी अच्छी-खासी कमाई की होगी।

सीबीआई ने फिलहाल मनी मैटर्स के सीएमडी राजेश शर्मा और दो अन्य अधिकारियों – संजय शर्मा व सुरेश गट्टानी समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। बाकी पांच आरोपियों में से मुंबई से एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के सीईओ आर आर नैयर, एलआईसी के सचिव (निवेश) नरेश चोपड़ा व बैंक ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक आर एन तायल और दिल्ली से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के निदेशक (चार्टर्ड एकाउंटेंट) मनिंदर सिंह जौहर व पंजाब नेशनल बैंक के उप-महाप्रबंधक वेंकोबा गुज्जल को गिरफ्तार किया गया है। इसमें से राजेश शर्मा, नैयर व तायल को सीबीआई ने पूछताछ के लिए 29 नवंबर तक अपनी हिरासत में ले लिया है।

सीबीआई की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि उसने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है जिसमें निजी फाइनेंस कंपनी के सीएमडी व उसके सहयोगी बड़े स्तर के कॉरपोरेट ऋणों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के बड़े अधिकारियों को रिश्वत दे रहे थे। वे वित्तीय संस्थाओं से गोपनीय बिजनेस सूचनाएं भी इकट्ठा कर रहे थे। बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एलआईसी और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के उच्च व मध्यम प्रबंधन स्तर के अधिकारियों ने निजी कंपनी से गैरकानूनी फायदा उठाया है।

इस रैकेट के भंडाफोड़ के लिए सीबीआई ने छह शहरों – मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, कोलकाता और जालंधर में कई ठिकानों पर छापे मारे, जिनमें उसे इस घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। पूरे मामले में कुल पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं और जांच जारी है। सीबीआई ने मनी मैटर्स फाइनेंशियल के सारे दफ्तरों को भी सील कर दिया है।

ऐसी भी खबरें आई हैं कि सीबीआई ने इस घोटाले में कुछ बड़ी रीयल एस्टेट कंपनियों का नाम लिया है, जिसमें लवासा कॉरपोरेशन, कुमार डेवलपर्स, एम्मार एमजीएफ, ओबेरॉय रीयल्टी, डीबी रीयल्टी व आशापुरा माइनकेम शामिल हैं। शेयर बाजार को हाउसिंग लोन के इस घोटाले के उजागर होने से तगड़ा धक्का लगा है। बुधवार को एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के शेयरों में 18.32 फीसदी, मनी मैटर्स फाइनेंशियल में 19.99 फीसदी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8.02 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया में 5.88 फीसदी और पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों में 3.10 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञ एस पी तुलसियान का मानना है कि कल गुरुवार को भी इन शेयरों में तेज गिरावट देखी जा सकती है। इसकी लपेट में रीयल एस्टेट कंपनियों के अलावा दूसरे बैंकों के शेयर भी आ सकते हैं।

इस घोटाले के बारे में एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने बड़े इतमिनान से कहा कि यह हमारे यहां सामान्य बिजनेस व्यवहार है। यह ‘वे ऑफ लाइफ’ है। जिन बिल्डरों के पास मजबूत बैलेंस शीट नहीं है, वे बिचौलियों के जरिए अपने प्रोजेक्ट के लिए कर्ज लेते रहे हैं। ऐसे ऋणों का हासिल करने के लिए वे फैसिटेशन चार्ज के रूप में 5 से 7 फीसदी रकम भी चुकाते रहे हैं। उनका कहना है कि यह गोरखधंधा पिछले 18 महीनों में हुआ होगा। उस दौरान सिस्टम में लिक्विडिटी की बहुतायत थी और बैंक व संस्थाएं ऋण देने के मौकों की तलाश में थी। जेवी कैपिटल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक संजीव धवन का कहना है कि भ्रष्टाचार कोई अंचभे की बात नहीं है, लेकिन एलआईसी हाउसिंग जैसी बड़ी व नामी कंपनी का इसमें लिप्त होना निवेशकों के भरोसे को और तोड़ सकता है जिसमें बाजार पर काफी नकारात्मक असर पड़ेगा।

खबर लिखे जाने तक भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। लेकिन पिछले एक साल से वह लगातार बैंकों को रीयल एस्टेट के ऋणों के बारे में आगाह करता रहा है। यहां तक कि उसने ऐसे ऋणों के प्रावधान का प्रतिशत भी बढ़ा दिया है। इस ताजा घोटाले के उजागर होने से देश पर राष्ट्रमंडल खेलों, आदर्श हाउसिंग सोसायटी और 2जी स्पेक्ट्रम घोटालों का दाग और गहरा हो गया है। वैसे भी, भ्रष्टाचार को मापने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी, टांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को 87वें स्थान पर रखा है, जबकि चीन 78वें स्थान पर है। यहां ज्यादा नंबर का मतलब ज्यादा भ्रष्टाचारी होना है।

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