वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में तय लक्ष्य से भी अधिक कर-वसूली के लिए आयकर विभाग की पीठ थपथपाई और कहा कि 7.90 लाख करोड़ रुपए की अप्रत्याशित कर वसूली करके विभाग ने देश को वित्तीय मजबूती के रास्ते पर लाने में मदद दी है। सरकार ने 2010-11 में 7.90 लाख करोड़ रुपए का कर संग्रह किया जबकि 74,000 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया। वित्त मंत्री ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड :सीबीडीटी:औरऔर भी

विदेशी बैंकों में जमा काले धन का पता लगाने और उसे देश में वापस लाने के लिए कदम उठाने की खातिर एक विशेष जांच दल गठित करने के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति एस एस निज्जर ने उस याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें सरकार को जर्मनी के लीश्टेंस्टाइन बैंक में काला धन रखने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक करने के लिएऔरऔर भी

कैबिनेट सचिवालय ने फोन टैपिंग पर दी गई अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को या तो टेलीफोन टैपिंग के लिए अधिकृत एजेंसियों की सूची से बाहर निकाल दिया जाए या विशेष परिस्थितियों में गृह सचिव की मंजूरी लेने के बाद ही उसे इसकी इजाजत दी जाए। सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि कानून केवल कर चोरी का पता लगाने के लिए टेलीफोन टैपिंग और बातचीत की निगरानी करने की अनुमतिऔरऔर भी

नौकरीपेशा लोगों के एक हिस्से को आयकर रिटर्न दाखिल करने से मुक्ति की वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की बजट घोषणा के बारे में अभी तक केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। लेकिन सीबीडीटी के चेयरमैन सुधीर चंद्रा के मुताबिक इस साल 5 लाख रुपए से कम वेतनवाले लोगों को टैक्स रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होगी। सुधीर चंद्रा का कहना है, “वेतनभोगी लोगों, हो सकता है 5 लाख रुपए तकऔरऔर भी

जल्दी ही देश के बहुत सारे नौकरीपेशा लोगों को टैक्स-रिटर्न भरने के झंझट से निजात मिल जाएगी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्त वर्ष 2011-12 का आम बजट पेश करते हुए यह घोषणा की। उनका कहना था कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) जल्दी ही ऐसे नौकरीपेशा करदाताओं की श्रेणी घोषित करेगा जिन्हें आयकर रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि उनका टैक्स तो नियोक्ता द्वारा टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) के जरिए पहले ही अदाऔरऔर भी

एक तरफ विपक्ष विदेश में रखे एक-सवा लाख करोड़ रुपए के कालेधन पर हल्ला मचा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ देश के भीतर करीब ढाई लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के आयकर की वसूली नहीं हो पाई है। यह किसी और नहीं, खुद सरकार की तरफ से बताया गया है। संसद में सरकार की तरफ दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार चालू वित्त 2010-11 की शुरुआत में एक अप्रैल 2010 तक देश में कुल बकाया आयकर कीऔरऔर भी

अभी तक केवल कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों के लिए ही आयकर रिटर्न इलेट्रॉनिक रूप से भरना जरूरी है। लेकिन अब इसमें उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) को भी शामिल कर दिया गया है जिसके खातों का अंकेक्षण आयकर एक्ट 1961 की धारा 44 एबी के तहत होता है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इसकी अधिसूचना 9 जुलाई 2010 को जारी कर दी है और गजट में प्रकाशित होते ही यह नियम लागू हो जाएगा।औरऔर भी

वित्त मंत्रालय ने प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड, डीटीसी) का संशोधित प्रारूप जारी कर दिया है। इसमें अब ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं है। जिसको भी कोई सुझाव देना हो, वे 30 जून तक directtaxescode-rev@nic.in पर मेल कर सकते हैं। अगले महीने शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इसे विधेयक के रूप पेश किया जाएगा और पारित होने के बाद यह करीब 50 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह ले लेगा। सभी लोगऔरऔर भी

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती या टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) के सर्टिफिकेट से लेकर उसके जमा करने के तरीके और निर्धारित तारीखों में बदलाव कर दिया है। ये बदलाव चालू वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2010 के बाद से लागू किए गए हैं। एक अहम बदलाव तो यह है कि पहले जहां वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में काटे गए टीडीएस का रिटर्न 15 जून तक देना होता था,औरऔर भी

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के एक नए सर्कुलर ने ऐसी तमाम कंपनियों को सकते में डाल दिया है जो करेंसी फ्यूचर्स सौदों में हुए मार्क टू मार्क नुकसान के दम पर कर में छूट हासिल करती रही है। सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव या करेंसी फ्यूचर्स सौदे असल में पूरे नहीं हो जाते, तब उन पर होनेवाले सांकेतिक नुकसान का फायदा कर रियायत के लिए नहीं मिल सकता। असल मेंऔरऔर भी