अमर रेमेडीज इमामी, निरमा व घडी डिटरजेंट जैसी देशी कंपनी है जो फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) के बाजार में हिंदुस्तान यूनिलीवर व कॉलगेट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर देने की कोशिश में लगी है। इसकी शुरुआत 1984 में स्वामी औषधालय प्रा. लिमिटेड के रूप में हुई जिसने आयुर्वेदिक मेडिसिनल रिसर्च व डेवलपमेंट का बीड़ा उठाया। यहीं से उसका मौजूदा नाम निकला जो उसने 1995 से अपना रखा है। कंपनी के बारे में और जानने से पहलेऔरऔर भी

चेन्नई की कंपनी जेमिनी कम्युनिकेशंस ने 13 मई को अपने सालाना नतीजे घोषित किए। कंपनी ने बढ़-चढ़कर बताया कि वित्त वर्ष 2010-11 में उसकी कुल आय 51 फीसदी बढ़ी और शुद्ध लाभ बढ़ा 98 फीसदी। प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) हो गया अब 6.04 रुपए। मार्च 2011 की तिमाही में कुल आय में 116 फीसदी और शुद्ध लाभ में 227 फीसदी इजाफा। नतीजों के हो-हल्ले के बीच 13 मई को यह शेयर एकबारगी 19.90 रुपए से 18.34 फीसदीऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने अपनी पूरी पूंजी निगल चुकी कंपनी स्कूटर्स इंडिया को आखिरकार निजी हाथों में सौंपने का निर्णय ले लिया है। गुरुवार को कैबिनेट ने तय किया कि स्कूटर्स इंडिया में सरकार अपनी सारी 95.38 फीसदी बेच देगी। बाकी बची 4.62 फीसदी इक्विटी बैंकों, वित्तीय संस्थाओं व कॉरपोरेट निकायों के पास पड़ी रहेगी। बता दें कि स्कूटर्स इंडिया लखनऊ की कंपनी है और यह विक्रम नाम के थ्री-ह्वीलर बनाती रही है जो उत्तर भारत में काफीऔरऔर भी

बाजार में रोलओवर की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। आज बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन ठीक-ठाक उतार-चढ़ाव दिखाई दिया। सेंसेक्स 140.63 अंक इधर-उधर होने के बाद 55.20 अंकों (0.31%) की बढ़त लेकर बंद हुआ तो निफ्टी 41.35 अंक इधर-उधर होने के बाद 7.50 अंक (0.14%) बढ़कर बंद हुआ है। रोलओवर का दौर कल से शुरू हो जाएगा और अगले हफ्ते गुरुवार तक पांच दिन चलेगा। वैसे आपको बता दूं कि रोलओवर का खेल शुद्ध रूप से एफआईआई केऔरऔर भी

एमआरएफ अलग है और एसआरएफ अलग। एमआरएफ टायर बनाती है, जबकि एसआरएफ टायर कॉर्ड फैब्रिक बनाती है जो साइकिल से लेकर भारी वाहनों तक के टायरों में इस्तेमाल होता है। एसआरएफ दुनिया में ‘नाइलोन 6’ टायर कॉर्ड और बेल्टिंग फैब्रिक की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता है। बेल्टिंग फैब्रिक का उपयोग कनवेयर बेल्ट बनाने में होता है। कंपनी कोटेड फ्रैबिक्स भी बनाती है जो कृषि व रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाते हैं। रसायनों में वह फ्लूरो-केमिकल्स वऔरऔर भी

देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई का मुख्य धंधा शेयरों, डिबेंचरों व अन्य प्रतिभूतियों की ट्रेडिंग कराना है। लेकिन उसकी आमदनी का बड़ा हिस्सा निवेश व डिपॉजिट से आता है। बुधवार को घोषित नतीजों के अनुसार 31 मार्च 2011 को समाप्त वित्त वर्ष में बीएसई की कुल आमदनी 538.03 करोड़ रही है। इसमें से 227.39 करोड़ रुपए यानी 42.26 फीसदी हिस्सा निवेश व डिपॉजिट से आया है। प्रतिभूति सेवाओं से हुई उसकी आय 179.73 करोड़ रुपएऔरऔर भी

यह शेयर बाजार है प्यारे। यहां बड़ा अजब-गजब चलता रहता है। चांदी भले ही इधर पिटने लगी हो, लेकिन सोने की चमक अभी बाकी है। फिर भी सोने के धंधे में लगी कंपनियों को बाजार से कायदे का भाव नहीं मिल रहा। ज्यादातर कंपनियों के शेयर इस समय 10 से कम के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहे हैं। जैसे, गीतांजलि जेम्स का पी/ई अनुपात इस समय 7, श्रीगणेश ज्वैलरी का 5.9, सु-राज डायमंड्स का 2.8, वैभवऔरऔर भी

किसी कंपनी के होने का मूल मकसद होता है नोट बनाना और कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराने का मकसद होता है, उसके स्वामित्व को जनता में बिखेर कर पूंजी की सुलभता व लाभ सुनिश्चित करना और कमाए गए लाभ को लाभांश या अन्य तरीकों से अपने शेयरधारकों तक पहुंचाना। अगर कोई लिस्टेड कंपनी लाभ नहीं कमा रही है तो उसके शेयरों में मूल्य खोजना खुद को धोखे में रखना या भयंकर रिस्क लेना है। किसीऔरऔर भी

एम्फैसिस बड़ी ठसक वाली कंपनी है। नाम तक सीधे नहीं लिखती। खुद को MphasiS लिखती है। लेकिन नाम से क्या! हमें तो काम से मतलब है। मुख्यतः बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) और रिमोट इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट या इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग (आईटीओ) सेवाओं सक्रिय है। दुनिया के 14 देशों में 29 ऑफिस हैं। धंधा अच्छा करती है। लेकिन उसका वक्त अभी अच्छा नहीं चल रहा है। पिछले कुछ महीनों से एडेलवाइस जैसी देशी और सीएलएसए जैसी विदेशी निवेश फर्मेंऔरऔर भी

ऐसा कैसे हो सकता है कि एक दिन कोई शेयर 52 हफ्ते का शिखर बनाए और अगले ही दिन 20 फीसदी के निचले सर्किट का शिकार हो जाए? लेकिन सुमीत इंडस्ट्रीज के साथ ऐसा ही हुआ है। बुधवार, 11 मई को उसने वित्त वर्ष 2010-11 और मार्च 2011 की तिमाही के नतीजे घोषित किए जो वाकई काफी जानदार-शानदार हैं। शेयर ऐसा उछला कि 42.30 रुपए पर पहुंच गया। लेकिन अगले ही दिन यानी, कल यह बीएसई (कोडऔरऔर भी