दिल्ली में मेरे एक पुराने परिचित हैं। यूं तो हम लोग एक ही कमरे में कई साल तक रहे हैं। लेकिन उन्हें मित्र कहना मैं मुनासिब नहीं समझता। उनका दावा है कि उनको देर रात कोलकाता से एफआईआई व म्यूचुअल फंडों की खरीद की खबर मिल जाती है। यही तरीका है शेयरों की चाल को समझने का। बाकी सब फालतू है। मेरा मानना है कि एफआईआई या डीआईआई के पीछे भागना फालतू है। अब लंबे निवेश कीऔरऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

आज मार्च के डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का दिन है। यानी, जबरदस्त उठापटक का दिन। आज आम ट्रेडरों या निवेशकों की नहीं, ऑपरेटरों की मर्जी चलती है। जो जितना बलवान, वो उतना धनवान। जानकार बताते हैं कि निफ्टी में सेटलमेंट 5665 के आसपास हो सकता है, जबकि नीचे में यह 5610 के ऊपर टिके रखने की हरचंद कोशिश करेगा। इस बीच विदेशी निवेशक संस्थाओं की खरीद और घरेलू निवेशक संस्थाओं की बिक्री का सिलसिला जारी है। मंगलऔरऔर भी

हफ्ते के पहले दिन निफ्टी 5690 का स्तर तोड़कर ऊपर में 5718 तक चला गया। लेकिन बंद हुआ पहले से नीचे 5634 अंक पर। आगे का हाल यह है कि दोपहर दो बजे तक चढ़ा रहा बाज़ार जिस तरह बाद में बिकवाली के दबाव में गिरा है, उससे नहीं लगता कि आज होली के एक दिन पहले कोई खास रंगत आएगी। वो केंद्र सरकार के टिके रहने और जल्दी चुनावों को लेकर डर रहा है। लेकिन यूरोपीयऔरऔर भी

सुप्रीम पेट्रोकेम देश में पॉलिस्टिरीन के धंधे की सबसे बड़ी कंपनी है। घरेलू बाज़ार में उसकी हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है। वो पॉलिस्टिरीन की सबसे बड़ी निर्यातक भी है। दुनिया में 80 से ज्यादा देशों को निर्यात करती है। दिसंबर 2012 की तिमाही में उसका धंधा साल भर पहले की अपेक्षा 35.69 फीसदी बढ़कर 1415.49 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इस पर उसका शुद्ध लाभ 33.47 करोड़ रुपए का है जो साल भर पहले से 289.18 फीसदीऔरऔर भी

अगले दो हफ्ते तक बाजार में कमोबेश शांति का दौर चलेगा। इस दौरान बाजार जमने की कोशिश करेगा। बजट के दिन जितना वो नीचे चला गया था, शायद उससे नीचे अब नहीं जाएगा। बाज़ार का यूं गिरना निवेशकों के लिए अच्छा मौका है। विदेशी निवेशक मॉरीशस के पते पर सरकार की सफाई के बाद फिर से खरीदारी करने लगे हैं। बजट के दिन उन्होंने शुद्ध रूप से 1274.60 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे, वहीं शुक्रवार कोऔरऔर भी

लॉटरी खेलनेवाले के कपड़े उतर जाते हैं, बचा-खुचा भी बिक जाता है। लेकिन लॉटरी खिलानेवाला हमेशा चांदी काटता है। इसी तरह शेयर बाज़ार में कानाफूसी और टिप्स पर चलनेवाले कंगाल हो जाते हैं, लेकिन इन टिप्स और कानाफूसियों को चलानेवाले हमेशा मौज करते हैं। शेयर बाजार में स्वार्थी तत्वों या साफ कहें तो ठगों का बड़ा गैंग बैठा है जो टिप्स का जाल फेंककर हम-आप जैसी छोटी मछलियों का शिकार करता है। हमें उनकी बातों के बजायऔरऔर भी

राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम की सारी खानापूरी हो चुकी है। 23 नवंबर को वित्त मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया और 6 दिसंबर को पूंजी बाजार नियामक, सेबी ने सर्कुलर जारी कर दिया। इन दोनों को पढ़कर आप स्कीम के सारे नुक्तों से वाकिफ हो सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये उन बचतकर्ताओं के लिए है जिन्होंने अभी तक शेयर बाजार में निवेश नहीं किया है। हालांकि इसमें वे निवेशक भी शामिलऔरऔर भी

सेंसेक्स 19,000 के ऊपर और निफ्टी 5800 के पार। यही नहीं, बी ग्रुप के शेयर जिस तरह बढ़े हैं, उसे बाजार में रिटेल निवेशकों की वापसी का संकेत माना जा रहा है। ब्रोकर गदगद हैं। औरों को झांसा देकर अपनी जेब भरनेवाले धंधेबाज अब सड़क चलते लोगों को भी यकीन दिलाने में लग गए कि यही सही वक्त है शेयरों में पूंजी लगाने का। लेकिन आंख पर पट्टी बांधकर निवेश करनेवाला शेयर बाजार में हमेशा गच्चा खाताऔरऔर भी

जिस तरह लोकतंत्र में हर शख्स को बराबर माना गया है, माना जाता है कि कानून व समाज की निगाह में हर कोई समान है, उसी तरह सुसंगत बाजार के लिए जरूरी है कि उसमें हर भागीदार बराबर की हैसियत से उतरे। यहां किसी का एकाधिकार नहीं चलता। इसलिए एकाधिकार के खिलाफ कायदे-कानून बने हुए हैं। लोकतंत्र और बाजार के बीच अभिन्न रिश्ता है। लेकिन अपने यहां लोकतंत्र और बाजार की क्या स्थिति है, हम अच्छी तरहऔरऔर भी