महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज या छोटे में कहें तो महिंद्रा फाइनेंस का फोकस ग्रामीण व अर्धशहरी इलाकों पर है। वह बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के बीच की चीज है। नई-पुरानी ट्रक, जीप, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व कार के लिए लोन से लेकर घर बनाने और शादी, इलाज व बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कर्ज देती है। गावों के करीब 10 लाख लोगों को अपना ग्राहक बना चुकी है। कंपनी की कई सब्सिडियरी इकाइयां भी हैं।औरऔर भी

बिड़ला कॉरपोरेशन को भले ही एम पी बिड़ला समूह की फ्लैगशिप कंपनी कहा जाए। लेकिन हकीकत में वह आर एस लोढ़ा के दिवंगत हो जाने के बाद पूरी तरह उनके बेटों हर्ष व आदित्य लोढ़ा के नियंत्रण में है। माधव प्रसाद बिड़ला ने यह कंपनी 1919 में बनाई थी। उनके मरने के बाद इसका मालिकाना उनकी विधवा प्रियंवदा के हाथ में आ गया है। निःसंतान प्रियंवदा ने वसीयत अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट आर एस लोढ़ा के नाम लिखऔरऔर भी

टेक्समैको रेल एंड इजीनियरिंग लिमिटेड पहले के.के. बिड़ला समूह की कंपनी टेक्समैको लिमिटेड में समाहित थी। लेकिन अक्टूबर 2010 से हैवी इंजीनियरिंग व स्टील फाउंड्री डिवीजन को अलग कर नई कंपनी टेक्समैको रेल एड इंजीनियरिंग बना दी गई। अब मूल कंपनी टेक्समैको के पास रीयल एस्टेट व मिनी हाइडेल पावर प्लांट का धंधा ही बचा है। इस तरह टेक्समैको से निकली टैक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग ही एक तरह से असल कंपनी है जो मुख्यतः भारतीय रेल केऔरऔर भी

ओम्निटेक इनफोसोल्यूशंस का 10 रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल बीएसई (कोड – 532882) में 8.47 फीसदी उछल कर 152.40 रुपए और एनएसई में 7.92 फीसदी उछल कर 151.30 रुपए पर बंद हुआ है। इसके बावजूद सस्ता है क्योंकि उसका टीटीएम (ठीक पिछले बारह महीनों का) ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 39.32 रुपए है और इस तरह वो केवल 3.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। असल में इधर एफआईआई अपना ध्यान बड़ी आईटी कंपनियों सेऔरऔर भी

केईसी इंटरनेशनल आरपीजी समूह की करीब 65 साल पुरानी इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनी है। सचमुच इंटरनेशनल है क्योंकि दुनिया के 45 से ज्यादा देशों से उसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ठेके बराबर मिलते रहते हैं। उसके पास उभी 7800 करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं जो साल भर पहले की अपेक्षा 42 फीसदी ज्यादा है। कंपनी ने सितंबर 2010 में ही अमेरिका की एसएई टावर्स होल्डिंग्स का अधिग्रहण किया है जिसके चलते उसका लाभ मार्जिन बढ़ गया है। अधिग्रहणऔरऔर भी

उम्मीद पर दुनिया कायम है और शेयर बाजार भी। किसी कंपनी ने लाख अच्छा किया हो, लेकिन अगर वो बाजार की उम्मीद पर खरी नहीं उतरी तो उसका शेयर गिर जाता है। नहीं तो क्या वजह है कि टीवीएस मोटर कंपनी का शुद्ध लाभ मार्च तिमाही में साल भर पहले की तुलना में दोगुना हो गया। पहले 20.29 करोड़ रुपए था। अब 105.42 फीसदी बढ़कर 41.68 करोड़ रुपए हो गया। फिर भी शुक्रवार 29 अप्रैल को नतीजोंऔरऔर भी

कोरोमंडल इंटरनेशनल दक्षिण भारत के मुरुगप्पा समूह की कंपनी है। फर्टिलाइजर, स्पेशियलिटी न्यूट्रिएंट व फसल बचाने के उत्पादों के साथ-साथ रिटेल के धंधे में भी है। 2007 में उसने दो रिटेल आउटलेट से शुरुआत की थी। अभी उसके पास आंध्र प्रदेश के ग्रामीण अंचल में 425 से ज्यादा रिटेल स्टोर हैं जहां खाद वगैरह के साथ ही कपड़े-लत्ते व रोजम्रर्रा की तमाम चीजें मिलती हैं। कंपनी फॉस्फेट खाद में देश की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता है। मतलबऔरऔर भी

देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) भारत में कार्यरत कर्मचारियों का वेतन इस साल 12 से 14 फीसदी बढ़ाने पर विचार कर रही है। विकसित देशों में यह वृद्धि 2 से 4 फीसदी और उभरते देशों में 2 से 14 फीसदी रह सकती है। यह कहना है कि कंपनी के सीईओ एन चंद्रशेखरन का। गुरुवार को मुंबई में कंपनी के चौथी तिमाही व सालाना नतीजों की घोषणा के बाद चंद्रशेखरन ने मीडियाऔरऔर भी

पता नहीं, अब महिंद्रा सत्यम (सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज) के शेयर का क्या हश्र होगा क्योंकि बाजार उम्मीद लगा रहा था कि उसका प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) वित्त वर्ष 2009-10 में 9 रुपए के आसपास रहेगा। लेकिन हकीकत में यह ऋणात्मक में 1.14 रुपए है क्योंकि कंपनी को 124.6 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। अगर पुराने चेयरमैन रामालिंगा राजू द्वारा लगाई गई कालिख को धोने-पोछने के लिए मुकदमेबाजी व जांच वगैरह पर किए गए 416.9 करोड़ रुपएऔरऔर भी

सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के अंतिम कायाकल्प की तैयारी है। अप्रैल 2009 में महिंद्रा समूह ने इसे खरीदने के बाद इसका नाम बदल कर महिंद्रा सत्यम कर दिया था और छह से आठ महीने के भीतर बाकायदा इसका विलय टेक महिंद्रा में कर दिया जाएगा। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बाजार के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि 29 सितंबर महिंद्रा सत्यम का निदेशक बोर्ड अपनी बैठक में वित्त वर्ष 2008-09औरऔर भी