हद हुई बेचने की, बारी अब खरीद की
कल की शानदार रैली के बाद आज कमजोर शुरूआत होनी ही थी। लेकिन अमेरिका में बेरोजगारी के आंकडों का भी असर होना था जो काफी सकारात्मक रहे। अप्रैल 2008 में वहां बेरोजगारी भत्ते का आवेदन करनेवालों की संख्या में अप्रत्याशित कमी आई है। इसके ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े आ गए तो हर तरफ ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद दौड़ गई। खाद्य मुद्रास्फीति की दर 1.81 फीसदी पर पहुंच गई है जो करीब चार सालोंऔरऔर भी
साहस और प्रतिभा
प्रतिभा को साहस और बहादुरी का साथ न मिले तो वह कभी खिल ही नहीं सकती। डर-डर कर जीनेवाला दुनियादार हो सकता है, प्रतिभाशाली नहीं। प्रतिभा तो हमेशा लीक से हटकर, खांचे को तोड़कर चलती है।और भीऔर भी
हैं सैकड़ों शेयर जो देंगे 100% रिटर्न
आखिरकार भारत वैश्विक झटके से धीरे-धीरे उबर रहा है। हालांकि हमारे मंदड़िए बाजार को तोड़कर नीचे से नीचे ले जाने की हरचंद कोशिश में जुटे हैं। वे इसमें कामयाब नहीं हो पाएंगे और उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। यह अलग बात है कि ऑपरेटरों व एफआईआई का खेल रह-रहकर अपना प्रताप दिखाता रहता है। बाजार के संचालकों के लिए ऑप्शंस में कॉल व पुट राइटिंग के ऊंचे और नीचे स्तर से फायदा कमाकर घर ले जानेऔरऔर भी
कर्ज-फांस तक ऑपरेटरों पर बेअसर
तीन साल पुराने लेहमान ब्रदर्स के प्रेत ने हमारे निवेशकों व ट्रेडरों के मन को अभी तक अवांछित नकारात्मकता से भर रखा है। अमेरिका के ऋण संकट को यहां इतनी संजीदगी से देखा जा रहा था जैसे भारत व एशिया के निवेशकों ने ही अमेरिका को सारा उधार दे रखा हो और कोई भी संभावित डिफॉल्ट उनका धन स्वाहा कर देगा। यह निराशावाद की इंतिहा है और मेरी राय में अगर कोई निवेशक जोखिम नहीं उठा सकताऔरऔर भी
सोचिए, रुख पलटा तो क्या होगा?
बाजार के रुख और रवैये का बदलना अब इतना आसान नहीं रह गया है क्योंकि ट्रेडरों का बहुमत मानता है कि हम निफ्टी में 5500 व 4700 की तरफ जा रहे हैं। वे मानते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री को पद छोड़ना पड़ेगा और इससे बाजार की स्थितियां जटिल हो जाएंगी। ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। हालांकि उनके तर्क में दम नहीं नजर आता, लेकिन उनकी हरकतें पूरी तरह उनकी सोच के अनुरूप हैं। 100औरऔर भी

