नौकरियां बढ़ाने के लिए ओबामा का 447 अरब डॉलर का पैकेज दुनिया के बाजारों में चहक नहीं ला सका क्योंकि समयसिद्ध नियम है कि जब भी कोई अच्छी खबर आती है, निवेशक हमेशा बेचते हैं। यह भी कि यह पैकेज रातोंरात असर नहीं दिखा सकता। लेकिन इसने इतना तो साबित कर दिया कि व्हाइट हाउस मानता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। इन हालात में दोतरफा बिकवाली होनी ही थी। जिन्होंने सुधार की उम्मीदऔरऔर भी

मंदड़ियों के खेमे व सोच में कुछ ऐसी तब्दीलियां हुई हैं जिनके चलते 5000 को अब समर्थन का मजबूत स्तर मान लिया है। यानी, माना जा रहा है कि निफ्टी के अब इससे नीचे जाने की गुंजाइश बेहद कम है। फिर भी अगर मंदड़िए और एफआईआई मिलकर तगड़ी बिकवाली का नया दौर शुरू करते हैं तो बाजार 5000 पर भी नहीं रुकेगा और सीधे टूटकर 4700 तक चला जाएगा। ऐसा होगा या नहीं, यह तो हमें केवलऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार पर लगता है कि धमाकों का कोई असर ही नहीं होता। दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सुबह करीब 10.15 बजे बम फटा। लेकिन निफ्टी 11 बजे के बाद निर्णायक रूप से 5100 के पार चला गया। बाजार में भारी मात्रा में शॉर्ट सौदे हुए पड़े हैं। गिरावट की आशंका और आनेवाली कुछ नकारात्मक घटनाएं शॉर्ट सेलिंग करनेवालों को अपनी पोजिशन काटने से रोक रही हैं। हालांकि रिटेल निवेशक इससे बेअसर हैं क्योंकि डेरिवेटिव सेगमेंट मेंऔरऔर भी

बैंकों के लिए अपनी जमा का इतना बड़ा हिस्सा सरकारी बांडों में लगाना क्यों जरूरी है? यह मुद्दा उछाल दिया है खुद रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड के एक समारोह में कहा कि बैंकों द्वारा सरकारी बांडों में निवेश करने के लिए तय न्यूनतम जमा का अनिवार्य अनुपात धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए। जानकारों को लगता है कि ऐसा हो गया तो बाजार में सरकारीऔरऔर भी

जो बात एक्सिस बैंक अपने विज्ञापन में खुद को अलग दिखाने के लिए कर रहा है, उसी बात का फैसला देश भर के बैंकिंग ओम्बड्समैन ने अपने सालाना सम्मेलन में सभी बैंकों के लिए कर लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव समेत बैंकों के शीर्ष संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बैंकिंग ओम्बड्समैन सम्मलेन ने तय किया है कि बैंकों को फ्लोटिंग रेट लोन पर कतई कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहींऔरऔर भी

अमेरिका में पिछले तीन दिनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। इससे भारतीय बाजारों में लगातार बढ़त जारी है और वो खुद को जमाने में लग गया है। उम्मीद के अनुरूप निफ्टी 5120 से 5200 की तरफ बढ़ता जा रहा है। वहां पहुंचने के बाद ही हम समीक्षा करेंगे कि आगे की दशा-दिशा और हमारी रणनीति क्या होगी। फिलहाल आज यह ऊपर में 5113.70 तक जा चुका है। सेंसेक्स भी 16,989.86 तक जाने के बाद लौटाऔरऔर भी

सोमवार को रिजर्व बैंक ने नए बैंकों को लाइसेंस देने के नियमों का खाका पेश किया। मंगलवार को सहारा इंडिया समूह की पैरा-बैंकिंग कंपनी सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने घोषणा कर दी कि उसके पास जून 2011 तक जमाकर्ताओं के कुल 73,000 करोड़ रुपए जमा है, जिसे वह इसी साल दिसंबर वापस कर देगी और उसके बाद उसके ऊपर एक पैसे की भी देनदारी नहीं बचेगी, जबकि रिजर्व बैंक ने उसे इसके लिए 30 जून 2015औरऔर भी

रिजर्व बैंक एक तरफ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की सेहत को लेकर परेशान है, वहीं हमारे बैंक इस क्षेत्र को जमकर कर्ज रहे हैं। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के वाणिज्यिक बैंकों ने जुलाई 2011 में एनबीएफसी को पिछली जुलाई की तुलना में 55.6 फीसदी ज्यादा कर्ज दिया है, जबकि पिछली बार इस क्षेत्र को दिए गए कर्ज में वृद्धि केवल 10.9 फीसदी थी। एनबीएफसी को दिए गए बैंक ऋण की मात्रा इस समयऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर जून तिमाही में पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम रही है। फिर भी यह सबसे ज्यादा आशावादी अनुमान से भी बेहतर है। इसीलिए शेयर बाजार पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर कम रहने का असर नहीं पड़ा और वह करीब 1.6 फीसदी बढ़ गया। हालांकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जून तिमाही की विकास दर को निराशाजनक करार दिया है। मंगलवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिकऔरऔर भी

अगर रिजर्व बैंक की पूर्व डिप्टी गवर्नर ऊषा थोराट की अध्यक्षता में बने कार्यदल की सिफारिशों का मान लिया गया तो गैर बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) को पूंजी बाजार (प्राइमरी + शेयर बाजार) में दिए गए ऋण के लिए 150 फीसदी और कमर्शियल रीयल एस्टेट को दिए ऋण के लिए 125 फीसदी प्रावधान करना होगा। अभी इन दोनों ही ऋणों पर इन्हें 100 फीसदी प्रावधान करना पड़ता है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को इस कार्यदल की रिपोर्टऔरऔर भी