कहते हैं कि ग्राहक भगवान होता है पर अभी कुछ समय पहले तक भारत की बीमा कंपनियों का सोचना इससे उलट था। उनके लिए पॉलिसीधारक ऐसा निरीह प्राणी होता था जो शायद परेशानी सहने के लिए अभिशप्त है। लेकिन बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीए या इरडा) की पहल से अब माहौल बदल चुका है। कैसी समस्याएं: अमूमन जीवन बीमा पॉलिसीधारकों को जो समस्याएं सताती हैं उनमें खास हैं – पॉलिसी बांड नहीं मिला, गलत पॉलिसी बांडऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने डाक जीवन बीमा निदेशालय को 7000 करोड़ रुपए के विशेष बांड जारी करने का फैसला किया है। ये बांड डाकघर जीवन बीमा निधि और ग्रामीण डाकघर जीवन बीमा निधि की जब्त रकम के एक हिस्से के रूप में जारी किए जा रहे हैं। वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक की तरफ से जारी सूचना के अनुसार इसके तहत जारी प्रतिभूतियों का नाम ‘पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस गवर्नमेंट ऑफ इंडिया सिक्यूरिटी’ होगा। ये प्रतिभूतियां दो तरह कीऔरऔर भी

शायद आप भी उचित हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनने की मुश्किल से रू-ब-रू हुए होंगे। पिछले दिनों ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्लिनिकल रिसर्च प्रोफेशनल अनुपम मिश्र को। 25 साल के अनुपम ने जब हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए बाजार की पड़ताल की तो वे अकबका रह गए। क्या लूं और क्या छोड़ दूं? बेसिक कवर, मेडिक्लेम, जटिल सर्जिकल प्रोसीजर्स, क्रिटिकल इलनेस, कैशलेश व हॉस्पिटल कैश री-इम्बर्समेंट जैसे प्लान्स ने अनुपम को कन्फ्यूज कर दिया।औरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और बीमा कंपनियों को हिदायत दी है कि वे उन तमाम कंपनियों से जुड़े लेन-देन की कायदे से जांच करें जिनके नाम सीबीआई ने हाउसिंग लोन घोटाले के सिलसिले में अदालत में दाखिल अर्जी में लिखे हैं। उन्होंने इन सभी संस्थाओं से कहा कि वे नामजद कंपनियों को दिए गए ऋणों का स्वतंत्र आकलन करें और देखें कि इनमें निर्धारित मानकों का पालन कहां तकऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने बीमा कंपनियों के पूंजी बाजार में उतरने की राह खोल दी है। लेकिन उसके बोर्ड ने सोमवार को अपनी बैठक में कुछ ऐसी शर्तें तय कर दीं जिन्हें बीमा कंपनियों को अलग से पूरा करना होगा। साथ ही बोर्ड ने किसी भी आईपीओ (प्रारंभिक पब्लिक ऑफर) में रिटेल निवेशकों के लिए अब तक चली आ रही एक लाख रुपए निवेश की सीमा को बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया है। इसकेऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने शुक्रवार, 22 अक्टूबर की रात से यूनिवर्सल लाइफ प्लान (यूएलपी) पर रोक लगा दी है। यह रोक फिलहाल 4 नवंबर को इरडा के अंतिम दिशानिर्देश आने तक जारी रहेगी। इरडा ने आनन-फानन में गुरुवार को बीमा कंपनियों को एक सर्कुलर भेजकर यह इत्तला दी है। लेकिन खुद इरडा ने ही करीब साल भर पहले 80 फीसदी कमीशन वाले रिलायंस लाइफ के यूएलपी – रिलायंस सुपर इनवेस्टमेंट प्लान को मंजूरी थी। इसकेऔरऔर भी

यूं तो हाइपरटेंशन अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन पॉलिसीधारक इसके इलाज पर जो भी खर्च करता है, उसका क्लेम वह बीमा कंपनी से ले सकता है। यह फैसला है दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का। जस्टिस बी ए जैदी की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा है, “हाइपरटेंशन बीमारी नहीं, बल्कि मानव जीवन की सामान्य गड़बड़ी है जिसे दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। यह ऐसा कोई मर्ज नहीं है जिसके इलाज के लिए अस्पतालऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को स्वास्थ्य बीमा पर भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। प्रीमियम के रूप में हासिल हर 100 रुपए पर उन्हें 140 रुपए क्लेम व अन्य मदों में खर्च करना पड़ता है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसी वजह से इन कंपनियों को मेडिक्लेम में दी जानेवाली कैशलेस सुविधा को सीमित करना पड़ा है। बता दें किऔरऔर भी

कुछ दिनों पहले हमने टाटा मोटर्स और एसबीआई की बात उठाई थी और इन दोनों ही शेयरों ने औरों से ज्यादा तेजी दिखाई है। आरडीबी को आईटीसी द्वारा खरीदने की बात अब पीटीआई, सीएनबीसी, एनडीटीवी, ब्लूमबर्म और रॉयटर्स जैसे कई समाचार माध्यमों में आ गई है। निश्चित रूप से अब इसका खंडन भी आएगा क्योंकि 350 करोड़ रुपए में सौदे की बात कही गई है, जबकि आरडीबी का बाजार पूंजीकरण अभी मात्र 75 करोड़ रुपए है। इसलिएऔरऔर भी

बीमा कंपनियां दुनिया भर में अगले तीन सालों में मोबाइल और इंटरनेट पर अपनी मार्केटिंग पर 8.4 करोड़ डॉलर (करीब 400 करोड़ रुपए) खर्च करेंगी। यह निष्कर्ष है आईटी सलाहकार कंपनी एक्सेंचर के ताजा सर्वे का। कंपनी ने इस सर्वे में तमाम देशों की 125 बड़ी बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की। इनमें अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका व एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ ही भारत की भी बीमा कंपनियां शामिल थीं। सर्वे का कहना है कि बीमाऔरऔर भी