वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी महंगाई की दर में मामूली गिरावट से भी उत्साहित हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि आनेवाले महीनों में मुद्रास्फीति और नीचे आएगी। उनका मानना है कि खाद्यान्नों के स्टॉक में बढ़ोतरी और मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं की लागत घटने से महंगाई और घटेगी। मुखर्जी ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘‘अप्रैल में मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं व खाद्य वस्तुओं, दोनों के दाम में गिरावट आई है। यह एक अच्छा रुख है।औरऔर भी

मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रफ्तर से बढ़ा है। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रही किसी भी धीमेपन के डर को दरकिनार कर दिया है। इससे उन आलोचनाओं पर भी लगाम लग सकती है जिनमें कहा जा रहा है था कि रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को थामने के उत्साह में आर्थिक विकास को दांव पर लगा दिया है। मार्च 2011 में फैक्ट्रियों, खदानों व सेवा क्षेत्र में उत्पादन साल भर पहलेऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने महीने पर पहले ही मौद्रिक नीति की समीक्षा में कहा था कि मार्च 2011 में मुद्रास्फीति की दर 8 फीसदी रहेगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु तक कहते रहे थे कि मार्च अंत तक मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया जाएगा और यह 7 फीसदी पर आ जाएगी। लेकिन शुक्रवार को आए असली आंकड़ों के मुताबिक मार्च में मुद्रास्फीति की दर 8.98 फीसदी रही है। यह फरवरी महीने केऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि 8.6 फीसदी रहने के अनुमान से उत्साहित मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष में नौ फीसदी आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य संभव लगता है। बसु ने सोमवार को दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हालांकि पूरी दुनिया का आर्थिक परिदृश्य ठीक-ठाक लग रहा है, लेकिन अब भी अनिश्चितता के बादल दिखते हैं। इसलिए अगले वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि की उम्मीदऔरऔर भी

महंगाई का असर लोग जब झेल चुके होते हैं, तब सरकार को पता चलता है और यह अगर ज्यादा हुई तो उसकी परेशानी बढ़ जाती है क्योंकि इससे मुद्रा से जुड़े सारे तार हिल जाते हैं, बैंकों व कॉल मनी की ब्याज दरों से लेकर सरकार की उधारी तक प्रभावित होती है और रिजर्व बैंक को फटाफट उपाय करने पड़ते हैं। ऊपर से सरकार को विपक्ष का राजनीतिक हमला अलग से सहना पड़ता है। इस समय यहीऔरऔर भी

उत्पादन बढ़ने और खरीफ फसल की आवक से सब्जियों, गेहूं व दालों के दाम में गिरावट से 20 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर घटकर चार माह के निचले स्तर 8.60 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले सप्ताह खाद्य मुद्रास्फीति 10.15 प्रतिशत पर थी। मानसून का मौसम समाप्त होने के साथ ही बाजार में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार हुआ है। यह लगातार सातवां सप्ताह है जब खाद्य मुद्रास्फीति की दरऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कुछ दिन पहले कहा था कि इस साल जुलाई-सितंबर की तिमाही में देश के आर्थिक विकास दर अप्रैल-जून की तिमाही की विकास दर 8.8 फीसदी के काफी करीब रहेगी। दूसरे अर्थशास्त्री और विद्वान कल तक कह रहे थे कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में जिस तरह कमी आई है, उसे देखते हुए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में बढ़त की यह दर 8 से 8.3 फीसदी ही रहेगी। लेकिन केंद्रीयऔरऔर भी

मुद्रास्फीति की दर में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है। खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 24 अप्रैल को खत्म हफ्ते में 16.04 फीसदी रही है, जो इसके ठीक पहले 16 अप्रैल के हफ्ते में 16.61 फीसदी थी। इस बीच केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अनुमान जताया है कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर अगले तीन महीनों में घटकर 6-7 फीसदी पर आ सकती है और फिलहाल विदेश से आनेवाली पूंजीऔरऔर भी