हमने इसी जगह करीब सवा साल पहले 13 जनवरी 2011 को अमारा राजा बैटरीज में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 185 रुपए पर चल रहा था। कल, 23 अप्रैल 2012 को 4.06 फीसदी गिरने के बावजूद वो 302.20 रुपए पर बंद हुआ है। इस बीच यह बहुत नीचे गया तो 30 दिसंबर 2011 को 179 रुपए तक, जबकि 19 अप्रैल 2012 को उसने 324 रुपए का शिखर हासिल किया है। हालांकि, इसमें अब भीऔरऔर भी

कैस्ट्रॉल इंडिया का शेयर इस साल जनवरी से लेकर कल तक 26.76 फीसदी बढ़ चुका है। इसी दौरान सेंसेक्स 12.08 फीसदी बढ़ा है। लेकिन कैस्ट्रॉल शायद बाजार से आगे रहने का यह क्रम आगे जारी न रख सके। कारण, तीन दिन पहले सोमवार को घोषित मार्च तिमाही के उसके नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। इस दौरान जहां उसकी बिक्री 4.13 फीसदी बढ़कर 781.7 करोड़ रुपए पर पहुंची है, वहीं शुद्ध लाभ 10.03 फीसदी घटकर 122.9 करोड़ रुपएऔरऔर भी

मित्रों, इस कॉलम में जब भी हम किसी शेयर में निवेश की सिफारिश करते हैं तो अक्सर आगाह करते रहते हैं कि खुद ठोंक-बजाकर देख लेने के बाद ही निवेश करें। जैसे, 11 अप्रैल 2011 को हमने यहां सुप्रीम इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह देने के साथ लिखा था, “कोई कंपनी जब अच्छी तरह में समझ में आ जाए, उसमें भावी विकास की गुंजाइश नजर आए, तभी उसके शेयरों में निवेश करें। हमारे या किसी और केऔरऔर भी

सब वही। धंधा वही। बरक्कत वही। लेकिन बाजार ने किसी भी वजह से नजरों से गिरा दिया तो कंपनी का शेयर धड़ाम से नीचे आ जाता है। हरियाणा में गुड़गांव से संचालित होनेवाली कंपनी एचएसआईएल लिमिटेड के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। करीब नौ महीने पहले, 29 जुलाई 2011 को उसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 245.80 रुपए पर इसलिए था क्योंकि बाजार से उसे एकबारगी चढ़ा दिया था और वो 19.71 के पी/ई अनुपातऔरऔर भी

हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि सेल मार्केटिंग की एक बाजीगरी है जिसके चलिए उपभोक्ताओं की मानसिकता को भुनाया जाता है। शेयर बाजार में भी हर साल इस तरह की ‘क्लियरेंस’ सेल तीन बार लगती है, जिसमें बेचनेवाले अपना माल निकालते हैं। पहली बजट के आसपास, दूसरी दीवाली पर और तीसरी नई साल की शुरुआत पर। सेल में लोगबाग टूटकर भाग लेते हैं। जब उन्हें कोई रोक नहीं सकता तो आपको कोईऔरऔर भी

कोई मानें या न माने, हम अब भी कहीं न कहीं दलितों व मुस्लिमों के प्रति सवर्ण और हिंदू मानसिकता से ग्रस्त हैं। नहीं तो क्या वजह है कि जिस मिर्ज़ा इंटरनेशनल का धंधा पिछले तीन सालों में 14.06 फीसदी और शुद्ध लाभ 115.60 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा हो, उसका शेयर मार्च 2008 से लेकर मार्च 2012 तक घूम-फिरकर 20 रुपए के आसपास अंकड़ा क्यों पड़ा है? वैसे, इधर अचानक इस स्टॉक में सक्रियताऔरऔर भी

बात एकदम सीधी है। जो भी शेयर बाजार में निवेश नहीं करते, वे भारत की विकासगाथा के लाभ से वंचित है। लेकिन आश्चर्यजनक, किंतु सत्य यह है कि देश की 121 करोड़ की आबादी में से कम से कम 120 करोड़ लोग इस लाभ से वंचित हैं, जबकि ठीकठाक कमानेवाले भारतीय मध्य वर्ग की ही आबादी 15 करोड़ से ज्यादा है। सबको साथ लेनेवाले कौन-से समावेशी विकास की बात करती यह सरकार? देश की विकासगाथा को व्यापकऔरऔर भी

जिस तरह गहरा पानी शांत बहता है, कम गहरा पानी थोड़ा ज्यादा और ज्यादा छिछला पानी कुछ ज्यादा ही उछलता है, उसी तरह का हाल शेयर बाजार में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप स्टॉक्स का रहता है। यह बाजार का ऐसा स्वभाव है जिसे हम बदल नहीं सकते। समझदारी इसी में है कि इसी स्वभाव के मद्देनज़र निवेश और रिटर्न का हिसाब-किताब बैठाया जाए। इसी से फैसला किया जाए कि कहां लंबे समय का निवेशऔरऔर भी

नहीं समझ में आता कि शेयर बाजार में यह किसके करमों की गति और कौन-सी होनी है जो सब कुछ अच्छा होते हुए भी किसी कंपनी के शेयर के साथ बुरा हो जाता है। सही संदर्भ के लिए पहले संत कबीर का पूरा पद, “करम टारे नाहिं टरी। मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी साधि के लगन धरी। सीता हरन मरन दसरथ को, वन में बिपत परी। कहं वह फन्द कहां वह पारिधि, कहं वह मिरग चरी। कोटिऔरऔर भी

मैं कोई लंबी-चौड़ी बात नहीं करता। क्या करूं! लंबी नहीं, छोटी नजर है अपनी। साल-दो साल भी नहीं, दस-पंद्रह दिन की सोचता हूं। किसी की टिप्स नहीं, ठोस खबरों पर काम करता हूं। इन्हीं के आधार पर आपको बता रहा हूं कि जागरण प्रकाशन में तेजी आनेवाली है। इसका शेयर दस-पंद्रह दिन में 110 रुपए को पार कर सकता है। यानी, इसमें खटाखट दस फीसदी तक का रिटर्न मिल सकता है। पांच फीसदी तो कहीं नहीं गया।औरऔर भी