स्विटजरलैंड के जिस बदनाम बैंक, यूबीएएस एजी की भारत में इसलिए थू-थू होती है कि उसने यहां के तमाम लोगों का काला धन अपने यहां जमा कर रखा है, उसकी शाखा भारत सरकार की अनुमति पिछले तीन सालों से मजे में काम कर रही है। शायद इससे बड़े किसी सबूत की जरूरत नहीं है कि सरकार क्यों काले धन के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है और सुप्रीम कोर्ट को खुद आगे बढ़कर विशेष जांच दल (एसआईटी)औरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव का तीन साल का कार्यकाल सितंबर में खत्म हो रहा है। इसलिए सरकारी हलकों में उनकी जगह नए गवर्नर को लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक इस दौड़ में तीन लोगों का नाम सबसे आगे हैं। ये हैं – शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार रघुराम राजन, आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपालन और कार्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व वित्त मंत्रालयऔरऔर भी

भारत पर मार्च 2011 तक चढ़े कुल विदेशी ऋण की मात्रा 305.89 अरब डॉलर है। यह साल भर पहले मार्च 2010 तक के विदेशी ऋण 261.04 अरब डॉलर से 17.2% ज्यादा है। देश के पास फिलहाल 310.56 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। 305.89 अरब डॉलर के मौजूदा विदेशी ऋण में 240.90 अरब डॉलर के ऋण लंबी अवधि और 64.99 अरब डॉलर के ऋण छोटी अवधि के हैं। इसमें आईएमएफ से लिया ऋण 6.31 अरब डॉलर, औरऔर भी

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 18 जून को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर 7.78 फीसदी रही है, जबकि इससे ठीक पिछले हफ्ते इसकी दर 9.13 फीसदी थी। एक साल पहले जून महीने के समान सप्ताह में यह 20.12 फीसदी थी। लेकिन इसी दौरान ईंधन व बिजली की मुद्रास्फीति बढ़कर आठ हफ्तों के शिखर 12.98 फीसदी पर जा पहुंची। ठीक पिछले हफ्ते यह 12.84 फीसदी और साल भर पहले 12.54औरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक के वरिष्ठतम डिप्टी गवर्नर के सी च्रकवर्ती ने कहा है कि समावेशी बैंकिंग अनेक इलाकों में पहले ही लाभप्रद हो चुकी है। उन्होंने कहा है कि धनी लोगों के बजाय गरीब लोगों के साथ व्यवसाय या बैंकिंग हमेशा अपेक्षाकृत अधिक लाभप्रद या व्यवहार्य रहती है। उन्होंने इस तथ्य की ओर इशारा किया कि जहां कॉरपोरेट क्षेत्र को बैंकों से 7-8 फीसदी ब्याज पर कर्ज मिल जाता है, वहीं माइक्रो फाइनेंस संस्थाएं गरीबों को 60औरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में की गई वृद्धि को वापस लेने की संभावना से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों पर कस्टम व एक्साइज शुल्क में कटौती से सरकार के राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं होगा। यह पूछे जाने पर कि डीजल, घरेलू गैस व केरोसिन की कीमतों में वृद्धि में कुछ कमी की जाएगी, मुखर्जी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडियाऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के खिलाफ सुनाया गया आदेश 66 लाख निवेशकों को ब्याज समेत उनका धन लौटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समूह और उसके मुखिया सुब्रत रॉय के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और अंदेशा जताया गया है कि इन कंपनियों में बड़े पैमाने पर मनी लॉन्डिंग हो रही है। सेबी के पूर्णकालिक निदेशकऔरऔर भी

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए पिछले डेढ़ साल में दस बार नीतिगत दरों में वृद्धि करने के बाद रिजर्व बैंक ने कहा है कि महंगाई थामने के लिये उसके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। शुक्रवार को दिल्ली में उद्योग संगठन एसोचैम के एक कार्यक्रम में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘आप सभी चाहते हैं कि मुद्रास्फीति नीचे आनी चाहिए। न तो वित्त मंत्रालय और न ही रिजर्व बैंक केऔरऔर भी

सब कुछ यंत्रवत। न थोड़ा इधर, न थोड़ा उधर। गिने-चुने लोगों को छोड़कर सब यही माने बैठे थे कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की पहली मध्य-तिमाही समीक्षा में ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ाएगा और मुद्रास्फीति को बड़ी चुनौती मानेगा। सो, ऐसा ही हुआ। रिजर्व बैंक ने चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत रेपो दर को 7.25 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। रिवर्स रेपो दर को चूंकि इससे एक फीसदी कम और एमएसएफ (मार्जिनल स्टैंडिंगऔरऔर भी

एक तरफ लगभग आम राय बन चुकी है कि मुद्रास्फीति को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की पहली मध्य-तिमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों को चौथाई फीसदी बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के नए कैबिनेट सचिव अजित कुमार सेठ मुद्रास्फीति को कोई खतरा नहीं मानते। उनका कहना है कि मुद्रास्फीति को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं हैं। सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि नवीनतम आंकड़ोंऔरऔर भी