बाजार में जिस तरह बड़े पैमाने पर चालबाजी व जोड़तोड़ चल रही है, भावों को सायास गिराया-उठाया जा रहा है, उसके रहते सही रुझान का पता लगाना बहुत मुश्किल है। फिर भी यह तो साफ दिख रहा है कि बाजार ने ऊपर की यात्रा तो फिर से शुरू कर दी है। बीएसई सेंसेक्स जहां 209.80 अंक (1.11 फीसदी) की बढ़त लेकर 19092.05 पर बंद हुआ है, वहीं एनएसई निफ्टी 69.30 अंक (1.23 फीसदी) बढ़कर 5724.05 पर पहुंचऔरऔर भी

थोड़ी-सी मुद्रा-स्फीति हमें भी दे दो यह कहते हैं दुनिया के कुछ देशों की केन्द्रीय बैंकों के प्रमुख हमारे डी. सुब्बाराव से। भारतीय रिर्ज़व बैंक के गवर्नर सुब्बाराव ने बताया कि हम मुद्रा-स्फीति घटाने के लिए परेशान हैं और कुछ देश मुद्रा-स्फीति बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। 25 जनवरी को की जाने वाली मौद्रिक नीति की तीसरी त्रैमासिक समीक्षा में मुद्रा-स्फीति को नियंत्रण में लाने व विकास-दर को बढ़ाने के लिए अनुरुप कदम उठाने पड़ेंगे।औरऔर भी

एक तो शुक्रवार, ऊपर से 13 तारीख। पश्चिम देशों के निवेशक इसे बडा अपशगुनी संयोग मानते हैं। इसलिए वे उस दिन घर से निकले ही नहीं। भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 13 जनवरी का दिन कतई अच्छा नहीं रहा। बीता हफ्ता करेक्शन के लिहाज से ही नहीं, उथल-पुथल के लिहाज से भी हमारे शेयर बाजार के लिए सबसे बुरा हफ्ता रहा। हम बाजार की गिरावट से ज्यादा चौंके नहीं क्योंकि हमारा मानता है कि निफ्टी मेंऔरऔर भी

बाजार डांवाडोल है। कभी इधर तो कभी उधर भाग रहा है। यह 2008 में लेहमान के संकट के बाद की स्थिति का दोहराव है। उस वक्त भी सारे पंटर और बाजार के पुरोधा कह रहे थे कि सेंसेक्स 6000 तक चला जाएगा। अक्सर लोगबाग टीवी स्क्रीम पर आ रही कयासबाजी देखते हैं और मान बैठते हैं कि जैसा कहा जा रहा है, वैसा ही होगा। लेकिन वे एनालिस्टों की चालाकी पर गौर नहीं करते हैं जो कहतेऔरऔर भी

दाल, गेहूं और आलू के दाम गिरने से खाद्य मुद्रास्फीति में पिछले पांच सप्ताह से जारी तेजी पर विराम लग गया। एक जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति 1.41 फीसदी घटकर 16.91 फीसदी रही है। यह दीगर बात है कि सब्जी, प्याज और प्रोटीन आधारित खाद्य वस्तुओं के दाम में पहले जैसी तेजी बनी हुई है। इससे पिछले सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 18.32 फीसदी पर पहुंच गई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य मुद्रास्फीति मेंऔरऔर भी

गठबंधन की मजबूरियों को महंगाई पर नियंत्रण में बाधक बताये जाने संबंधी कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बयान को बीजेपी ने हास्यापद बताया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस में नेतृत्व का घोर अभाव है। बीजेपी की प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में संवाददताओं से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘कमरतोड़ महंगाई से जहां पूरा देश त्रस्त है, वहीं ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर राहुल गांधी का बयान किसी के गले नहीं उतर रहा है।औरऔर भी

भारतीय शेयर बाजार में बाजार के शातिर उस्तादों और राजनेताओं का क्या खेल हो सकता है? उनके बीच क्या कोई दुरभिसंधि है? वह भी तब जब पूरा बाजार, खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट बेहद खोखले आधार पर खड़ा है? शेयर बाजार में होनेवाले कुल 1,70,000 करोड़ रुपए के कारोबार में से बमुश्किल 15,000 करोड़ कैश सेगमेंट से आता है। इस कैश सेगमेंट से अरबों डॉलर का बाजार पूंजीकरण एक झटके में उड़ जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति यह हैऔरऔर भी

कल भारी वोल्यूम के साथ निफ्टी के 5800 अंक से नीचे चले जाने के साथ बाजार ने ट्रेडरों और निवेशकों के विश्वास को डिगाकर रख दिया है। मुझे उम्मीद थी कि निफ्टी 5820 के बाद वापस उठेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बढ़ने का अंदेशा बताया जा रहा है। पर यह बाजार के इस तरह धराशाई हो जाने का असली कारण नहीं हो सकता। जब वित्त मंत्री ऑन रिकॉर्ड कह रहेऔरऔर भी

मुद्रास्फीति क्यों बढ़ रही है? मुद्रा का प्रसार ज्यादा है, जबकि क्रय-शक्ति ठहरी हुई है। नतीजतन मुद्रास्फीति बढ़ती जा रही है। निश्चित रूप से अगर मौद्रिक नीति के जरिए मुद्रास्फीति से लड़ना है तो ब्याज दरें बढ़ाना ही इकलौता विकल्प है। हालांकि, मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए आपूर्ति बढ़ाने, आयात शुल्क घटाने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने जैसे कई दूसरे उपाय भी किए जा सकते हैं। अगर कारगर उपाय किए जाएंऔरऔर भी

अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का अनुमान है कि रिजर्व बैंक 25 जनवरी को मौद्रिक नीति की तीसरी त्रैमासिक समीक्षा में ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ा देगा। रेपो दर को 6.25 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 6.5 फीसदी और रिवर्स रेपो दर को 5.25 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया जाएगा। इस कदम का मकसद मुद्रास्फीति की बढ़ती दरों पर लगाम लगाना होगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के एक मत-संग्रह के मुताबिक आर्थिक विश्लेषक मानतेऔरऔर भी