जो लोग कर्ज, आग, शत्रु व बीमारी, इन चारों को पूरी तरह खत्म किए बिना चैन से नहीं बैठते, उनको बाद में कभी नहीं रोना पड़ता। लेकिन जो इन्हें लोग पाले रहते हैं, वे ताजिंदगी विलाप ही करते रहते हैं।और भीऔर भी

भावुक होना जरूरी है क्योंकि महज बुद्धि के दम पर हम सच तक नहीं पहुंच सकते। लेकिन बुद्धि को कभी इतनी दूर घास चरने नहीं भेज देना चाहिए कि किसी को हमारी भावनाओं से खेलने का मौका मिल जाए।और भीऔर भी

बात किसने कही, यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि वह हमारी विचार-श्रृंखला को कहां तक आगे बढ़ाती है, हमारे कितने काम की है। इसलिए विचारों को हमेशा नाम से काटकर देखना चाहिए।और भीऔर भी

जिंदगी में आफत नहीं, मोड़ और उतार-चढ़ाव ही आते हैं। यह एक दुस्साहस भरा सफर है। इसमें जो मोड़ या रास्ता आप चुनते हैं, वही आपकी किस्मत बनता है। ऊंच-नीच जीवन के एडवेंचर का हिस्सा भर है।और भीऔर भी

हम भगवान को मानना बंद कर दें तो बाबाओं की ही नहीं, नेताओ व अभिनेताओं तक की दुकान बंद हो जाए। भगवान तो शक्तिहीन मूरत है, जबकि उसके नाम पर असली शक्ति इन कलाबाजों को मिलती है।  और भीऔर भी

हम व्यक्ति या वस्तु को जानकर नहीं, मानकर चलते हैं। परखने से पहले ही उन्हें किसी खांचे में कस लेते हैं और उसके हिसाब से अपेक्षाएं पाल लेते हैं। ऐसे में धोखा खाते हैं तो इसमें दोष हमारा भी है।और भीऔर भी

24 घंटे में 8 घंटे सोना और बाकी 16 घंटा जगना। दिनचर्या का यही चक्र है। लेकिन सवाल यह है कि जगने के दौरान हम चैतन्य कितने घंटे रहते हैं? इसी से हमारी मानव चेतना का स्तर तय होता है।और भीऔर भी

लोगों को जो जरूरत है और लोग जो चाहते हैं, हम उन्हें वही सिखा सकते हैं। साथ ही किसी को कुछ भी सिखाने से पहले जरूरी है यह जानना कि हम खुद दूसरों से कितनी सारी बातें सीख सकते हैं।और भीऔर भी

वे रेखाएं या आहट देखकर भविष्य बांचने का काम औरों का नहीं, अपना भविष्य संवारने के लिए करते हैं। भविष्यवाणी करना उनके पापी पेट का सवाल है। इससे हमें ढाढस के सिवा कुछ नहीं मिलता।और भीऔर भी

विचार किसी लता की तरह हैं जिन्हें अगर बाहर का कोई सहारा न मिले तो उनका बढ़ना रुक जाता है। इसलिए विचारों को बराबर व्यवहार के धरातल पर कसते रहना चाहिए। नहीं तो बे-काम हो जाते हैं।और भीऔर भी