आर्थिक समीक्षा ने अच्छे बजट की जमीन तैयार कर दी है। वित्त वर्ष 2011-12 में 9 फीसदी आर्थिक विकास की दर। कृषि और इंफ्रास्ट्रक्टर पर जोर। चालू खाते के घाटे को कम करने की चिंता जो वित्त मंत्री को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को खुश रखने को मजबूर किए रहेगी। मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत। बीमा व बैंकिंग क्षेत्र के सुधार। काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम। ऊपर से हल्के सेऔरऔर भी

प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) और माल व सेवाकर (जीएसटी) पर अमल अप्रैल 2012 से पहले नहीं हो सकता। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी सोमवार को आम बजट में इसका ऐलान कर सकते हैं। लेकिन इस बीच पूरी संभावना है कि वे नए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपए कर देंगे। अभी यह सीमा 1.60 लाख रुपए की है। सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा विश्व बाजार में कच्चे तेल के बढ़तेऔरऔर भी

एक तरफ विपक्ष विदेश में रखे एक-सवा लाख करोड़ रुपए के कालेधन पर हल्ला मचा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ देश के भीतर करीब ढाई लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के आयकर की वसूली नहीं हो पाई है। यह किसी और नहीं, खुद सरकार की तरफ से बताया गया है। संसद में सरकार की तरफ दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार चालू वित्त 2010-11 की शुरुआत में एक अप्रैल 2010 तक देश में कुल बकाया आयकर कीऔरऔर भी

मुद्रास्फीति ऐसा गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है कि इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा तक बड़ी विनम्रता से बोलते हैं। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार इतने मुंह-फट हो गए हैं कि लगता ही नहीं कि उन्हें जनता या सरकार किसी की भी प्रतिक्रिया की कोई परवाह है। मंगलवार को पवार ने कहा कि सरकार फल और सब्जियों की कीमतों से कोई लेनादेना नहीं है और वहऔरऔर भी

बजट सत्र शुरू हो रहा है। इसमें ऐसे सूत्र आने जा रहे हैं जो कई महीनों से शेयर बाजार को परेशान करनेवाली चिंताओं और समस्याओं का समाधान निकालने का सबब बनेंगे। बाकी क्या कहें? एफआईआई और उनके एजेंटों ने हमेशा की तरह इस बार भी आम निवेशकों को गच्चा दिया। बाजार (निफ्टी) जब 5200 पर पहुंच गया तो उन्होंने हल्ला मचवा दिया कि अभी इसमें 10-15 फीसदी और गिरावट आनी है। निवेशक घबराकर बेचकर निकलने लगे इसऔरऔर भी

संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा दिए जाने वाले अभिभाषण को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अपनी मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में राजधानी दिल्ली में हुई कैबिनेट की बैठक में इस अभिभाषण को मंजूरी दी गई। इसमें 2011-12 के लिए यूपीए सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का उल्लेख होगा। संसद का बजट सत्र 21 फरवरी से शुरू हो रहा है और लोकसभाऔरऔर भी

अभी कल तक बड़े-बड़े विद्वान कह रहे थे कि जनवरी माह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 8.5 फीसदी रहेगी। लेकिन, आज सोमवार को घोषित दर 8.23 फीसदी रही है जो इससे पहले के महीने दिसंबर की मुद्रास्फीति दर 8.43 फीसदी से कम है। अर्थशास्त्री कह रहे थे कि खाने-पीने की चीजों के ज्यादा दाम और पेट्रोल के महंगा होने से मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी। लेकिन हकीकत में गेहूं, दाल व चीनी जैसे जिंसों केऔरऔर भी

अपने अलग विचारों के लिए अक्सर विवादों में घिरे रहनेवाले पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने एक नया विवादास्पद बयान दिया है। उनका कहना है कि अगर आर्थिक तरक्की के कारण पर्यावरण को पहुंचे नुकसान को गिना जाए तो देश की आर्थिक वृद्धि दर आठ या नौ फीसदी नहीं, बल्कि साढ़े पांच से छह फीसदी के बीच आंकी जाएगी। रमेश की इस टिप्पणी से पहले वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बीते सोमवार कहा था कि वित्त वर्ष 2009-10औरऔर भी

कृषि उत्पादन बढ़ने से उत्साहित सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.6 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया है। इससे पिछले साल देश की आर्थिक वृद्धि दर आठ फीसदी थी। केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) की तरफ से सोमवार को जारी अग्रिम आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2010-11 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 5.4 फीसदी रहने की संभावना है, जबकि इससे पिछले साल यह मात्र 0.4 फीसदी रही थी। सीएसओ ने इसके आधार पर देशऔरऔर भी

महंगाई खासकर खाद्य मुद्रास्फीति ने सरकार को परेशान करके रख दिया है। इतना परेशान कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी झल्लाकर बोले कि मुद्रास्फीति को वश में करने के उपाय किए गए हैं, लेकिन सरकार के पास कोई जादुई चिराग नहीं है कि वह इसे फौरन नीचे ले आए। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी जिम्मेदारी केंद्र से हटाकर राज्यों पर डालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि महंगाई को काबू में रखने के लिए राज्योंऔरऔर भी