विज्ञापन और भगवान
भगवान और धर्म के नाम पर खुल्लमखुल्ला लूट सदियों से जारी है। कभी राजा-महाराजा से लेकर पंडित, पादरी और मुल्ला यह काम करते थे। इतने अनुष्ठान कि लोगों का तर्क तेल लेने चला जाए। अब बाजार के जमाने में वही काम विज्ञापन करने लगे हैं।और भीऔर भी
प्यार से वसूली
फिरौती, राजनीति, धर्म और धंधा – चारों में पब्लिक से वसूली की जाती है। फिरौती में फौरी तो राजनीति में स्थाई भय दिखाकर वसूली की जाती है, जबकि धर्म और धंधे में वसूली बड़े प्यार से की जाती है।और भीऔर भी
नीयत में खोट
लोकतंत्र कोई धर्म या पंथ नहीं, जहां सब कुछ आस्था व भावना से तय होता है। यहां अगर कोई भावनाओं को भड़का कर आपको लुभाता है तो समझ लेना चाहिए कि उसकी नीयत में कोई गहरा खोट है।और भीऔर भी
राष्ट्रीय एकता व सांप्रदायिक सद्भाव के नाम पर गूगल व फेसबुक पर चाबुक
केंद्र सरकार का कहना है कि गूगल, फेसबुक, ऑरकुट, ब्लॉग स्पॉट, यू ट्यूब, याहू व माइक्रोसॉफ्ट समेत 21 सोशल नेटवर्किंग साइटें व सर्च इंजन देश में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को चोट पहुंचा रहे हैं। इसलिए इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दी जाती है। सरकार की तरफ से यह फरमान कपिल सिब्बल के नेतृत्व वाले सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने जारी किया है। दिल्ली के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुदेश कुमार से समक्ष रखी गई दो पेज कीऔरऔर भी
साध्य या साधन
भगवान और धर्म की शुरुआत समाज में सुख-शांति के साधन के रूप में हुई थी। सदियों तक सब कुछ राजी-खुशी चलता रहा। समस्या तब से शुरू हुई जब इन्हें साधन के बजाय साध्य बना दिया गया।और भीऔर भी
धर्म पुश्तैनी!
पुश्तैनी पेशे का जमाना अब नहीं रहा। सोनार का बेटा, लोहार का बेटा लोहार या किसान का बेटा किसान बनें, जरूरी नहीं। फिर धर्म क्यों पैतृक संपदा या पुश्तैनी जागीर के रूप में हम पर मढ़ दिया जाता है?और भीऔर भी
जाली नोटों के साथ दो दर्जी, एक अली, एक भोला
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नेपाल से लाए गए दो लाख रूपये मूल्य के जाली नोटों के साथ पेशे से दर्जी दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी की मदद से दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की टीम ने सोमवार को दिल्ली के ख्याला में रहने वाले 32 साल के कौसर अली और भोला कुमार को धर दबोचा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अली बिहार केऔरऔर भी
विज्ञान ही धर्म!
हर धर्म दावा करता है कि उसकी मान्यताएं वैज्ञानिक हैं। लेकिन धर्म स्थिर है जबकि विज्ञान अपनी ही स्थापनाओं को तोड़ता बढ़ता जा रहा है। सोचिए, किसी दिन विज्ञान ही धर्म बन गया तो!और भीऔर भी


