नैतिकता की दुहाई कमजोर लोग देते हैं। धर्म, समाज व राजनीति के ठेकेदारों के लिए यह लोगों को भरमाने का एक जरिया है जिसका नाम जपते हुए वे खुद जघन्य से जघन्य काम किए जाते हैं।और भीऔर भी

जब कभी लगता है कि अब तो हद हो गई, अति हो गई, अब कोई सूरत नहीं बची है, तभी अचानक कोई ऐसी राह निकल आती है जिसके बारे में दूर-दूर तक नहीं सोचा होता है। यह किसी धर्म का नहीं, प्रकृति का नियम है।और भीऔर भी