पिसान अवधी का शब्द है जिसका अर्थ है आटा। वाकई, हमारी केंद्र सरकार ने दाल पर ऐसा रवैया अपना रखा है जिससे किसानों का पिसान निकल गया है। इससे यही लगता है कि या तो वह घनघोर किसान विरोधी है या खेती-किसानों के मामले में उसके कर्ताधर्ता भयंकर मूर्ख है। वैसे, शहरी लोग बड़े खुश हैं कि अरहर या तुअर की जो दाल साल भर पहले 180-200 रुपए किलो बिक रही थी, वह अब 60-70 रुपए किलोऔरऔर भी

कपास की कीमतें भले ही कमोबेश स्थिर हों, लेकिन कपड़ा मंत्रालय देश की प्रमुख मंडियों में पहुंच रहे कपास की रोजाना निगरानी कर रहा है। कपास की औसत कीमत 4000 रूपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है जो तय एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) 3100 रूपए प्रति क्विंटल से अधिक है। यह स्थिति एमएसपी की जरूरत को ही नकार देती है। कपड़ा क्षेत्र में घरेलू जरूरत के लिए कच्‍चे माल की आपूर्ति को सुरक्षित करने का कामऔरऔर भी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 2012-13 में 2011-12 की रबी फसलों की खरीद के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) को मंगलवार को मंज़ूरी दे दी। गेहूं का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य 1285 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह पिछले वर्ष के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की तुलना में 165 रूपए प्रति क्विंटल ज्यादा है। इस तरह गेहूं का समर्थन मूल्य 14.7 जौ का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य 200 रूपए प्रति क्विंटल या 25.6 फीसदी बढ़ाकर 980 रूपएऔरऔर भी

खाद्य मंत्री के वी थॉमस अड़ गए हैं कि वे देश से गेहूं का निर्यात नहीं होने देंगे। ऐसा तब जबकि 19 जनवरी तक उनके बॉस रहे कृषि मंत्री शरद पवार ने पिछले ही हफ्ते कहा था कि देश में गेहूं का भारी स्टॉक है और हमें इसके निर्यात की इजाजत दे देनी चाहिए। वैसे, थॉमस ने मंगलवार को कहा कि गेहूं निर्यात के बारे में अगले हफ्ते मंत्रियों का समूह विचार करेगा। मंत्रियों के समूह कीऔरऔर भी

कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र में आय सृजन के बीच एक तरह का संरचनागत या बुनावटी असंतुलन और बेमेल है जिस तत्काल दूर करना जरूरी है। यह मानना है कृषि राज्यमंत्री प्रो. के वी थॉमस का। उन्होंने बुधवार को प्रोसेस्ड फूड, एग्री बिजनेस व बेवरेजेज पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन की शुरुआत में कहा कि कृषि हमारे देश में 58 फीसदी से ज्यादा आबादी के लिए जीविका का मुख्य स्रोत है, लेकिन जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) मेंऔरऔर भी