दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मशीन से मशीन और व्‍यक्ति से मशीन तक संदेश भेजने की प्रतिदिन प्रति सिम 200 एसएमएस की सीमा में बुधवार को छूट दे दी। ट्राई द्वारा एक दिसंबर 2010 को जारी दूरसंचार व्‍यवासायिक संचार उपभोक्‍ता प्राथमिकता अधिनियम 27 सितंबर 2011 को लागू किया गया था। इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किसी भी एक्‍सेस प्रोवाइडर को प्रतिदिन प्रति सिम 200 से ज्‍यादा एसएमएस भेजने की इजाजत नहीं है। दूरसंचार मंत्रालय की कहनाऔरऔर भी

इस देश का हाल अजीब है जहां कश्मीर कैश्मीर हो जाता है और अंतरिक्ष एंट्रिक्स। खैर, अंतरिक्ष व निजी कंपनी देवास के बीच हुए करार के मुद्दे पर अपने खिलाफ की गई कार्रवाई से आहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने इस कदम के पीछे अंतरिक्ष एजेंसी के मौजूदा चेयरमैन के राधाकृष्णन का हाथ होने का आरोप लगाया है। बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने नायर और तीन अन्यऔरऔर भी

डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का आखिरी दिन होने के बावजूद बाजार ने खुद को टिकाए रखा। इससे साफ तौर पर आखिरी आंधे घंटे में मंदड़ियों और तेजडियों, दोनों के विकेट उखड़ने के हालात बन गए। अचानक तीन बजे बाजार उठने लगा और निफ्टी दिन के सबसे ऊंचे स्तर के 5174.15 तक जा पहुंचा। फिर 10-11 मिनट में ही गिरकर 5148.70 तक आने के बाद फिर उठने लगा और बाजार के बंद होते-होते कल से 0.60 फीसदी कीऔरऔर भी

बर्फ से ढंके यूरोपीय देश स्विटजरलैंड के दावोस शहर में दुनिया भर के प्रभुता-संपन्न और एक फीसदी अमीरतम लोगों के नुमाइंदे अपनी सालाना बहस के लिए जुट चुके हैं। आल्प्स की खूबसूरत पहाड़ियों और बर्फीली वादियों के बीच वे आज, 25 जनवरी बुधवार से 29 जनवरी रविवार तक विश्व अर्थव्यवस्था की दशा-दिशा पर विचार करेंगे। लेकिन उनके साथ जिरह करने के लिए दुनिया के 99 फीसदी वंचितों के प्रतिनिधियों ने भी इग्लू के कैंपों में डेरा डालऔरऔर भी

रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने साफ कह दिया है कि ब्याज दरों के बढ़ने का चक्र अब पूरा हो गया है और आगे इनमें कमी ही आएगी। ऊपर से लगता है कि ब्याज दर ऊंची रहने से बैंकों को फायदा होता है। लेकिन हकीकत यह है कि ब्याज घटने से बैंकों का धंधा बढ़ता है। ब्याज घटने और धंधा बढ़ने की इसी उम्मीद में बैंकों के शेयर अब बढ़ने लगे हैं। कल सेंसेक्स 1.46 फीसदी बढ़ाऔरऔर भी

दुर्भाग्य कहीं आसमान से नहीं टपकता। वह तो हमारे ही कर्मों का नतीजा होता है। हां, वह अपने साथ इतनी चासनी लेकर ज़रूर आता है कि कुछ सोचे-समझे बिना हम उसके स्वागत के लिए लपक पड़ते हैं।और भीऔर भी